पलक्कड़: LDF के दबदबे को चुनौती देने के लिए क्या करेगा UDF?
केरल के पलक्कड़ जिले में LDF ने अपनी मजबूत पकड़ बना रखी है। अगर UDF या NDA को अपनी सरकार बनाना है तो यहां जीत करना बेहद जरूरी है।

पलक्कड़ जिला, Photo Credit: Khabargaon
केरल के बीच में आने वाला पलक्कड़ जिला तमिलनाडु से सटा हुआ है। यह ऐसा जिला है जिसकी कोई भी सीमा समुद्र से नहीं लगती लेकिन राज्य के बड़े फॉरेस्ट रिजर्व और नेशनल पार्क इसी जिले में आते हैं। पलक्कड़ जिले की कुल 12 विधानसभा सीटों में से एक सीट पोन्ननी लोकसभा क्षेत्र में आती है। बाकी की 7 विधानसभा सीटें पलक्कड़ लोकसभा और 4 सीटें अलातुर विधानसभा क्षेत्र में आती हैं। 2024 में अलातुर लोकसभा में लेफ्ट को जीत मिली थी। वहीं, पोन्ननी और पलक्कड़ में UDF को जीत मिली थी। 2021 के चुनाव में इस जिले की 10 सीटों पर लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट को जीत मिली थी। विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) को सिर्फ दो ही सीटें मिली थीं।
पश्चिमी घाट में पड़ने वाले पलक्कड़ गैप के चलते इसे 'केरल का गेटवे' कहा जाता है। तमिलनाडु से आने वाले लोग इसी रास्ते से केरल में प्रवेश करते हैं। चावल के भरपूर उत्पादन के चलते पलक्कड़ जिले को 'केरल का चावल भंडार' भी कहा जाता है। इसके अलावा यह जिला कथकली के लिए मशहूर है। अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए मशहूर यह जिला पर्यटकों का पसंदीदा केंद्र है। धोनी वाटरफॉल्स, टाइगर रिजर्व, साइलेंट वैली नेशनल पार्क समेत कई हिल स्टेशन पर्यटकों को अपनी ओर खींचते हैं।
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राजनीतिक दृष्टि से देखें तो यह जिला भी लेफ्ट के लिए मजबूत माना जाता है। कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) यहां की कई सीटों पर बेहद मजबूत स्थिति में है। कुछ सीटों पर सीपीएम, कांग्रेस और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) भी जीतती रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ई के नयनार और नंबूदरीपाद जैसे नेता इसी जिले से निकले थे।
2021 में क्या हुआ था?
साल 2021 में इस जिले की 12 में से 10 सीटों पर लेफ्ट गठबंधन को जीत मिली थी। एक-एक सीट पर कांग्रेस और IUML को जीत मिली थी। पलक्कड़ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में जीते राहुल ममकूटथिल विवादों में रहे और कांग्रेस ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। अब इस बार उनकी जगह पर नए उम्मीदवार को चुनाव में उतारा गया है।
विधानसभा सीटों का इतिहास
पत्तांबी-पलक्कड़ जिले और पलक्कड़ लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह विधानसभा सीट लेफ्ट और कांग्रेस के बीच रोचक मुकाबले का गवाह बनती है। कांग्रेस की लगातार तीन जीत के बाद पिछले दो चुनाव से यहां से सीपीआई जीतती आ रही है। सीपीआई के मोहम्मद मोहसिन दो बार से बड़ी जीत हासिल कर रहे हैं।
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त्रिताला- यह पलक्कड़ जिले की ऐसी सीट है जो पोन्ननी लोकसभा क्षेत्र में आती है। लेफ्ट और कांग्रेस यहां पर एक-दूसरे को मजबूत टक्कर देती आ रही हैं। 1991 से 2011 तक यहां सीपीएम का कब्जा था लेकिन 2011 और 2016 में कांग्रेस के वीटी बलराम ने यहां से जीत हासिल की थी। 2021 के चुनाव में 3016 वोटों के अंतर से वीटी बलराम यह सीट हार गए थे और सीपीएम के एम बी राजेश ने जीत हासिल की थी। इसी बार इन्हीं दोनों नेताओं के बीच फिर से मुकाबला होना है।
शोरनूर- 2008 के परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर शुरुआत से ही सीपीआई जीतती आ रही है। हालांकि, हर बार सीपीआई ने अपना उम्मीदवार बदल दिया है। इस बार ही मौजूदा विधायक पी. मामीकुट्टी को फिर से टिकट दिया गया है। इस सीट पर बीजेपी भी मजबूत स्थिति में मानी जा रही है।
ओट्टापालम- लंबे समय तक कांग्रेस के कब्जे में रही यह सीट अब सीपीआई के कब्जे में है। पिछले चार चुनावों में सीपीआई ने ही यहां से जीत हासिल की है और के प्रेमकुमार यहां के मौजूदा विधायक हैं। लेफ्ट ने एक बार फिर से प्रेमकुमार को ही यहां से विधायक बनाया है।
कोंगाड (SC)- 2008 में बनी यह सीट 2011 से ही सीपीएम के कब्जे में है। दो बार के वी विजयदास विधायक बने और 2021 में के शांताकुमारी ने यहां से चुनाव जीता था। इस बार भी उन्हें सीपीएम ने उम्मीदवार बनाया है।
मन्नारक्कड- इस सीट पर लंबे समय से लेफ्ट और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का मुकाबला होता आ रहा है। 2011 से यहां से IUML के एन शमशुद्दीन चुनाव जीतते आ रहे हैं। इस बार उन्हें चुनौती देने के लिए सीपीआई ने ए मंजिल को चुनाव में उतारा है।
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मलमपुझा- यह विधानसभा सीट लंबे समय से लेफ्ट का गढ़ रही है। केरल के पूर्व सीएम ई के नयनार, पूर्व मंत्री टी शिवदास मेनन और वी एस अच्युतानंदन जैसे नेताओं ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया है। 2021 में अच्युतानंदन की जगह पर सीपीआई ने ए प्रभाकरण को चुनाव में उतारा था और वह भी बीजेपी और कांग्रेस को हराने में कामयाब रहे थे। बीजेपी के सी कृ्ष्णकुमार ने यहां लेफ्ट को तगड़ी चुनौती दी है। इस बार भी वही ए प्रभाकरण को चुनौती दे रहे हैं।
पलक्कड़- यौन उत्पीड़न की वजह से विवादों में आए कांग्रेस के राहुल ममकूटथिल इसी सीट से विधायक हैं। वह 2024 के उपचुनाव में विधायक बने थे। उससे पहले लगातार तीन बार कांग्रेस के ही शफी परंबिल चुनाव जीतते आ रहे थे। 2024 में वह वटाकरा लोकसभा क्षेत्र से सांसद बन गए तब यहां उपचुनाव हुए थे। आरोपों से घिरे राहुल को कांग्रेस ने इस बार टिकट नहीं दिया है और पार्टी से भी निकाल दिया है। कांग्रेस ने उनकी जगह पर रमेश पिशारोडी को उतारा है। बीजेपी ने शोभा सुरेंद्रन और लेफ्ट ने एन एम आर रज्जाक को टिकट दिया है।
तरूर (SC)- अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह इस सीट पर पिछले तीन चुनाव से सीपीएम को जीत मिल रही है। दो बार ए के बालन ने यहां से चुनाव जीता था और 2021 में पी पी सुमोद को यहां से उतारा गया। सीपीएम ने एक बार फिर से उन्हें ही उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने इस बार अपना उम्मीदवार बदलकर के सी सुब्रमण्यम को उतारा है।
चित्तूर- अलातुर लोकसभा क्षेत्र में आने वाली इस विधानसभा में लगातार 4 बार से कांग्रेस के के अच्युतन चुनाव जीत रहे थे। 2016 और 2021 में के कृष्णकुट्टी यहां से चुनाव जीते। वह दो बार से जनता दल (सेक्युलर) के टिकट पर चुनाव जीते थे। यही पार्टी अब इंडियन सोशलिस्ट जनता दल का बन गई है और लेफ्ट गठबंधन का हिस्सा है। के कृष्णकु्ट्टी खुद केरल सरकार में मंत्री रहे लेकिन इस बार वह चुनाव नहीं लड़ रहे हैं। उनकी जगह पर वी मुरुकदास को टिकट दिया गया है। पिछली बार चुनाव हारने वाले एस अच्युतन को ही कांग्रेस ने फिर से मौका दिया है।
नेनमारा- नेनमारा विधानसभा सीट अलातुर लोकसभा क्षेत्र में आती है। पिछले दो चुनाव से सीपीआई के के. बाबू यहां से चुनाव जी रहे थे। इस बार उनकी जगह पर सीपीएम के के प्रेमन को उतारा गया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के ए थनकप्पन से होना है।
अलातुर- इस विधानसभा क्षेत्र में साल 1957 से लेकर अभी तक सिर्फ एक बार कांग्रेस को जीत मिली है। बाकी के सभी चुनाव में यहां से लेफ्ट के दल ही जीतते आ रहे हैं। 1996 से लेकर अभी तक यहां से सीपीएम को जीत मिलती आ रही है। पिछले दो चुनाव से के डी प्रसेनन यहां से विधायक बन रहे हैं। इस बार उनकी जगह पर टी एम सासी को उतारा गया है और उनका मुकाबला कांग्रेस के के एम फेबिन से होना है।
जिले की स्थिति
विधानसभा सीटें-12
क्षेत्रफल-4482 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर-89.31%
तालुका-7
नगर पालिका-7
ब्लॉक-13
ग्राम पंचायत-88
विधानसभा सीटें-12
LDF-10
UDF-2
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