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मलप्पुरम: IUML के गढ़ में सेंध नहीं लगा पा रहा लेफ्ट, BJP का क्या होगा?

मलप्पुरम जिला पारंपरिक रूप से IUML का मजबूत गढ़ है और कांग्रेस भी यहां इसी के सहारे है। बाकी दलों की राह कैसी होगी?

Malappuram district of kerala

मलप्पुरम जिला, Photo Credit: Khabargaon

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केरल का मलप्पुरम जिला राजनीतिक तौर पर इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का गढ़ है। 30 प्रतिशत मुस्लिम और 54 प्रतिशत से ज्यादा हिंदू वोटरों के बावजूद IUML ने इस जिले की ज्यादातर सीटों पर अपना दबदबा दशकों से बना रखा है। पिछले साल के आखिर में हुए निकाय चुनावों में भी 11 नगर पालिकाओं में यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) ने जीत हासिल की थी। ये नतीजे दिखाते हैं कि अभी भी IUML के इस गढ़ में सेंध नहीं लग पा रही है।

 

लगभग मध्य केरल में आने वाला यह जिला समुद्र तट पर स्थित है और पूर्व में तमिलनाडु से सटा हुआ है। दक्षिण में पलक्कड़ जिला है और उत्तर में कोझिकोड और वायनाड से इसकी सीमा लगी हुई है। मलप्पुरम, नीलांबुर, वेंगारा, तेन्नला, कलाडी, आलमकोड, पोन्ननी और नेडुआ जैसे शहर इस जिले के मुख्य आकर्षण हैं। केरल की अहम नदी भरतपुज्झा का आखिरी सिरी इसी जिले में है और यहीं पर यह नदी समुद्र में मिल जाती है। एरनाड, पेरिंतलमन्ना, तिरूर और पोन्ननी तालुकों को मिलाकर बना यह जिला अपने पहाड़ों, टीक के जंगलों और आयुर्वेद की वजह से मशहूर है।

 

मालाबार विद्रोह (साल 1921) का केंद्र रहे इस जिले ने मालाबार स्पेशल पुलिस का दमान भी खूब देखा है। खिलाफत आंदोलन हो या फिर मप्पिला विद्रोह, यह जिला ऐतिहासिक तौर पर भी अहमियत रखता है। टीपू सुल्तान के बनवाए किले के सबूत आज भी इस जिले में मौजूद हैं।

 

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मलप्पुरम जिले की 16 विधानसभा सीटें तीन लोकसभा क्षेत्रों में फैली हुई हैं। 7 सीटें मलप्पुरम लोकसभा, 6 सीटें पोन्ननी लोकसभा सीट और 3 सीटें वायनाड लोकसभा क्षेत्र में आती हैं। राजनीतिक रूप से इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग का गढ़ माने जाने वाले मलप्पुरम की कई सीटों पर इसी पार्टी को जीत मिलती है।

2021 में क्या हुआ था?

साल 2021 में सत्ता से दूर रह गए UDF को मलप्पुरम जिले से थोड़ी राहत मिली थी। इस जिले में IUML का दबदबा एक बार फिर से दिखा था और IUML के सहारे ही UDF ने मलप्पुरम जिले की 16 में से 13 सीटों पर जीत हासिल कर ली थी। इस बार भी इस जिले में UDF को पूरी उम्मीद है कि IUML का जलवा बरकरार रहेगा और उसे यहां से ज्यादा से ज्यादा सीटों पर जीत मिलेगी। दूसरी तरफ लेफ्ट के अलावा बीजेपी भी इस जिले में अपनी पैठ बनाने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। एनडीए की ओर से इस जिले की कुछ सीटों पर तुषार नतेसन की पार्टी के उम्मीदवारों को उतारा गया है। 

विधानसभा सीटों का इतिहास

 

कोंडोट्टी- मलप्पुरम लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह विधानसभा सीट IUML का अभेद्य किला है। आज तक हुए 15 चुनावों में एक भी बार यहां IUML को कोई नहीं हरा पाया है। हार जीत के अंतर को देखकर यह कहा जा सकता है कि इस बार भी लेफ्ट या बीजेपी के लिए इस सीट पर IUML यानी UDF को हरा पाना आसान नहीं होगा।

 

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एरनाड- वायनाड लोकसभा क्षेत्र में आने वाली एरनाड विधानसभा में भी पिछले तीन चुनाव से IUML ही जीतती आ रही है। 2011 से ही पी के बशीर यहां से चुनाव जीत रहे हैं और चौथी बार भी उन्हें ही उम्मीदवार बनाया गया है।

 

नीलांबुर- यह विधानसभा क्षेत्र में मलप्पुरम जिले में है लेकिन वायनाड लोकसभा क्षेत्र में आता है। लंबे समय से कांग्रेस ने यहां अपना दबदबा बना रखा है। 2016 और 2021 में पी वी अनवर ने यहां से जीत जरूर हासिल की थी लेकिन 2025 के उपचुनाव में कांग्रेस ने यह सीट फिर से जीत ली। कांग्रेस ने मौजूदा विधायक ए शौकत को ही एक बार फिर से अपना उम्मीदवार बनाया है।

 

वंडूर- IUML और कांग्रेस के गठबंधन का नतीजा यह है कि वायनाड लोकसभा क्षेत्र की वंडूर विधानसभा में कांग्रेस आसानी से जीतती आ रही है। कांग्रेस के ए पी अनिल कुमार लगातार यहां से पांच चुनाव जीत चुके हैं और छठी बार भी मैदान में हैं। सीपीएम यहां से जीत हासिल करने के लिए लगातार अपने उम्मीदवार बदल रही है लेकिन अभी तक उसे कामयाबी नहीं मिली है।

 

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मंजेरी- यह विधानसभा भी पिछले 13 बार से IUML के कब्जे में है। लेफ्ट की तरह की बार-बार उम्मीदवार बदलने वाली IUML ने यहां से लगातार जीत हासिल की है। 2021 में यू ए लतीफ ने IUML के टिकट पर यहां से जीत हासिल की थी। यह विधानसभा सीट मलप्पुरम लोकसभा क्षेत्र में आती है।

 

पेरिंतलमन्ना- मलप्पुरम लोकसभा क्षेत्र की तीसरी विधानसभा सीट पेरिंतलमन्ना पर भी IUML का दावा मजबूत है। हालांकि, 2006 में सीपीआई ने यहां से IUML को हरा दिया था। 2021 में यहीं से जीते नजीब कांतापुरम को IUML ने एक बार फिर से मैदान में उतारा है।

 

मांकड़- मलप्पुरम लोकसभा क्षेत्र की इस सीट पर भी IUML बेहद मजबूत स्थिति में है। साल 2001 और 2006 को छोड़कर बाकी के हर चुनाव में IUML ने ही यहां जीत हासिल की है। 2021 में जीते मंजलमकुझी अली को ही IUML ने इस बार भी अपना उम्मीदवार बनाया है।

 

मलप्पुरम- मलप्पुरम विधानसभा सीट भी ऐसी है जहां से आज तक IUML को कोई हरा नहीं पाया है। लगातार तीन बार से जीत रहे पी उबैदुल्ला की जगह इस बार IUML ने पी के कुन्हलीकुट्टी को मैदान में उतारा है। वह बगल की ही वेंगारा सीट के विधायक हैं यानी इस बार उनकी सीट बदली गई है। लेफ्ट ने इस बार एनसीपी (शरद पवार) को यह सीट दे दी है और के टी मुजीब उसके उम्मीदवार हैं।

 

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वेंगारा- 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई यह सीट भी मलप्पुरम लोकसभा में ही है और अब तक यहां भी IUML ही जीत रही है। 2021 में यहां से जीते पी के कुनह्लीकुट्टी को इस बार मलप्पुरम सीट से उतारा गया है और उनकी जगह पर के एम शाजी को मौका दिया है। लेफ्ट ने यहां से मोहम्मद साबा को उतारा है।

 

वल्लीक्कुन्नू- मलप्पुरम लोकसभा की बाकी 6 विधानसभा सीटों की तरह ही यहां भी IUML ही जीतती आ रही है। 2008 के परिसीमन के बाद बनी इस सीट पर दो बार के एन ए खादर और दो बार पी अब्दुल हमीद चुनाव जीत चुके हैं। लेफ्ट की ओर से पिछली बार यहां इंडियन नेशनल लीग ने चुनाव लड़ा था लेकिन बड़े अंतर से उसकी हार हुई थी।

 

तिरुरंगडी- यह ऐसी विधानसभा सीट है जो मलप्पुरम जिले में है लेकिन पोन्ननी लोकसभा क्षेत्र में आती है। इस सीट पर एक बार कांग्रेस के एके एंटनी भी चुनाव जीते हैं। उनके अलावा हर बार यहां से IUML ही चुनाव जीतती रही है। 2021 में IUML के वरिष्ठ नेता के पी ए मजीद यहां से चुनाव जीते थे लेकिन इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया गया है। इस बार पीएमए समीर को मैदान में उतारा गया है।

 

तनूर- लंबे समय तक IUML का गढ़ रही तनूर विधानसभा भी पोन्ननी लोकसभा क्षेत्र में आती है। पिछले दो चुनावों से यहां पर पी टी रहीम की नेशनल सेक्युलर कॉन्फ्रेंस (NSC) ने बाजी पलट दी है। दो बार से NSC के वी अब्दुररहीम चुनाव जीत रहे हैं। पिछली बार IUML को इस सीट पर सिर्फ 985 वोटों के अंतर से हार मिली थी। ऐसे में इस बार उसे उम्मीद है कि वह यहां वापसी कर लेगा।

 

तिरूर- पोन्ननी लोकसभा क्षेत्र  की तिरूर विधानसभा में आज तक सिर्फ एक बार सीपीएम को जीत मिली है। बाकी के सारे चुनावों में IUML ही जीतती आ रही है। 2021 में जीते के मोइद्दीन को ही IUML ने इस बार भी मैदान में उतारा है।

 

कोट्टाक्कल- 2008 के परिसीमिन के बाद अस्तित्व में आई यह सीट भी पोन्ननी विधानसभा का ही हिस्सा है। पिछले तीन चुनाव से यहां IUML ने ही जीत हासिल की है। 2021 में लेफ्ट को बड़े अंतर से हराने वाले के के आबिद हुसैन को ही एक बार फिर से IUML ने मौका दिया है।

 

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तवनूर- पोन्ननी लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह सीट लगातार तीन बार से के टी जलील जीत रहे हैं। के टी जलील निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ते हैं लेकिन उन्हें लेफ्ट का समर्थन हासिल होता है। पिछले बार वह कम अंतर से चुनाव जीत पाए थे लेकिन लेफ्ट के समर्थन से वह एक बार फिर से मैदान में हैं। 

 

पोन्ननी-मलप्पुरम जिले में इकलौती सीट पोन्ननी ही है जहां पिछले कई बार से सीपीआई को जीत मिल रही है। साल 1991 से अब तक सिर्फ एक ही बार कांग्रेस पार्टी को यहां जीत मिली है, वरना हर बार सीपीआई ही जीतती आ रही है।

 

विधानसभा सीटें- 16
UDF-13
LDF-2
अन्य-1


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