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एर्नाकुलम में UDF मजबूत रहेगा या LDF पलट देगा बाजी?

केरल का एर्नाकुलम जिला विधानसभा सीटों के लिहाज से काफी बड़ा है। इस जिले में कांग्रेस और UDF का दबदबा है लेकिन लेफ्ट भी कुछ सीटें जीतता रहा है।

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एर्नाकुलम जिला, Photo Credit: Khabargaon

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केरल के बाहर के लोग जिस कोच्चि शहर को जानते हैं, वह जिले में आता है उसी का नाम है एर्नाकुलम। पश्चिम से पूरब तक विस्तार लिए यह जिले समुद्र के किनारे से शुरू होता है और इसका आखिरी छोर तमिलनाडु की सीमा से जा लगता है। एक छोर पर समुद्री तट वाला यह जिला दूसरे छोर पर पहाड़ और जंगलों से भरा हुआ है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी वाला यह जिला मुख्य रूप से कोच्चि शहर के लिए मशहूर है। यहां का मरीन ड्राइव देशभर के लोगों के आकर्षण का केंद्र बनता है और लोग इसे देखने के लिए आते रहते हैं।

 

विश्व प्रसिद्ध इंदिरा गांधी बोट रेस हर साल दिसंबर के महीने में कोच्चि सिटी में ही होती है। उसी समय होने वाला कोच्चि कार्निवाल भी इस शहर में लोगों को आकर्षित करता है। एर्नाकुलम का शिव मंदिर, हिल पैलेट, मंगलवनम बर्ड सैंक्चरी और एडापल्ली सेंट जॉर्ज चर्च इस जिले के मुख्य आकर्षण केंद्र हैं।

 

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राजनीति रूप से देखा जाए तो यह जिला कांग्रेस के पक्ष में काफी हद तक रहा है। कुछ विधानसभा सीटों पर केरल कांग्रेस के अलग-अलग धड़े भी अपना प्रभाव रखते हैं और अलग-अलग गठबंधनों में शामिल ये धड़े कुछ सीटों पर जीत भी हासिल करते रहे हैं। कांग्रेस इस जिले में अच्छा करती है रही लेकिन सत्ता में आने के लिए उसे यहां अपना एकतरफा प्रभाव दिखाना होगा। वहीं, लेफ्ट को अघर सत्ता में बने रहना है तो उसे यहां अपनी सीटें बढ़ानी ही होंगी।


2021 में क्या हुआ था?

2021 के विधानसभा चुनाव में एर्नाकुलम जिले में UDF को अच्छी बढ़त मिली थी। जिले की 14 में से 9 सीटों पर UDF तो 5 सीटों पर LDF को जीत मिली थी। कुछ सीटों पर मामला बेहद रोचक रहा था और कम अंतर से UDF को हार मिली थी। ऐसे में अगर इस बार के चुनाव में कांग्रेस अपने पक्ष में माहौल बना पाई तो इस जिले में उसका और उसके सहयोगियों का प्रदर्शन और अच्छा हो सकता है। वहीं, लेफ्ट के पास भी मौका है कि वह खुद को अगर इस जिले में मजबूत कर पाए तो ऐंटी इनकमबेंसी के असर को कुछ हद तक कम कर सकता है।

विधानसभा सीटों का इतिहास

 

कलमासरी- एर्नाकुलम जिले और एर्नाकुलम लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह विधानसभा इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) और लेफ्ट के जोरदार मुकाबले का गवाह बनती है। 2011 और 2016 में IUML की जीत के बाद सीपीआई के पी राजीव ने 2021 में यहां से जीत हासिल कर ली थी। बड़े अंतर से जीतने वाली राजीव को ही एक बार फिर से उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं, IUML ने पिछली बार हारने वाले वी ई अब्दुल गफूर को एक और मौका दिया है। NDA की ओर से BDJS के एम पी बीनू मैदान में हैं।

 

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परावूर- पूरे प्रदेश की सबसे चर्चित सीटों में से एक सीट परावूर भी है। इसकी वजह है कि कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदारों में गिने जा रहे वी डी सतीशन साल 2011 से ही यहां से चुनाव जीतते आ रहे हैं। एक बार फिर से इसी सीट से मैदान में उतरे वी डी सतीशन हर बार बड़े अंतर से जीतते आ रहे हैं और लेफ्ट के लिए वह बड़ी चुनौती साबित हुए हैं। अगर केरल में UDF की जीत होती है तो उनकी भूमिका बड़ी हो सकती है।

 

व्यपिन- 2008 के परसीमन के बाद नए नाम से अस्तित्व में आई यह विधानसभा सीट अब लेफ्ट का गढ़ बन गई है। दो बार यहां से सीपीआई के शेखरन शर्मा जीते और 2021 में के एन उन्नीकृष्णन ने जीत हासिल की। इस बार लेफ्ट की ओर से एम बी शाइनी को मौका दिया गया है। कांग्रेस ने टोनी चमनी को उतारा है।

 

कोच्चि- देश के सबसे चर्चित शहरों में एक कोच्चि की विधानसभा अब लेफ्ट के कब्जे में है। 2016 और 2021 में यहां से जीत चुके के जे मैक्सी को ही एक बार फिर से मौका दिया गया है। कांग्रेस ने इस बार टोनी चमनी को बगल की व्यपिन सीट पर भेजा है और यहां से मोहम्मद शियास को मौका दिया है।

 

त्रिपुनितुरा- लंबे समय तक कांग्रेस के कब्जे में रही इस सीट पर के बाबू विधायक बनते आ रहे थे। हालांकि, 2016 के चुनाव में उन्हें लेफ्ट के एम स्वराज से हार मिली थी। 2021 में भी मामला बेहद रोमांचक था लेकिन एम बाबू ने सिर्फ 1232 वोटों के अंतर से चुनाव जीतकर बाजी पलट दी थी और वापसी कर ली थी। इस बार दोनों ही दलों ने अपने उम्मीदवारों को बदल दिया है। लेफ्ट ने व्यपिन सीट से विधायक रहे के एन उन्नीकृष्णन को यहां से उतारा है। वगीं, कांग्रेस ने दीपक जॉय को अपना उम्मीदवार बनाया है। NDA में शामिल टी20 पार्टी ने यहां से मशहूर ऐक्ट्रेस अंजली नायर को उतारकर यहां का मुकाबला रोचक बना दिया है।

 

एर्नाकुलम- जिले के केंद्र की यह सीट मुख्य तौर पर कांग्रेस का मजबूत किला रही है लेकिन एक बार 1987 में और एक बार 1998 में यहां से लेफ्ट समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। एर्नाकुलम के मौजूदा सांसद हिबी ईडेन, कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे के वी थॉमस और जॉर्ज ईडेन जैसे नेता ईस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। 2019 के उपचुनाव और फिर 2021 के चुनाव में इस सीट से जीतने वाले टी जे विनोद को ही कांग्रेस ने एक बार फिर से मौका दिया है। वहीं लेफ्ट गठबंधन में शामिल इंडियन सोशलिस्ट जनता दल ने साबू जॉर्ज को उतारा है। 

 

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त्रिक्कारा- एर्नाकुलम लोकसभा क्षेत्र में आने वाली सातवीं विधानसभा त्रिक्कारा भी अब कांग्रेस का मजबूत किला है। 2016 और 2021 में यहां से चुनाव जीते पी टी थॉमस का दिसंबर 2021 में निधन हो गया था। सीट खाली हुई तो कांग्रेस ने उन्हीं की पत्नी उमा थॉमस को मैदान में उतारा और वह आसानी से यह सीट जीतने में कामयाब रहीं। एक बार फिर से कांग्रेस ने उन्हीं पर भरोसा जताया है। लेफ्ट ने उनके सामने एडवोकेट पुष्पा दास को मौका दिया है।

 

अंगामाली-एर्नाकुलम जिले में आने वाला यह विधानसभा क्षेत्र चलाकुडी लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। 2006 और 2011 में यह सीट हार जाने वाली कांग्रेस ने 10 साल से यहां अपना कब्जा जमा रखा है। दो बार यहां से जीत चुके रोजी एम जॉन पर ही कांग्रेस ने फिर से भरोसा जताया है। वहीं लेफ्ट ने पेरुमबवूर विधानसभा सीट से तीन बार के विधायक रह चुके साजू पॉल को इस विधानसभा सीट पर भेजा है।

 

अलुवा- यह सीट भी चलाकुडी लोकसभा में है। 1980 से लेकर अभी तक यहां लेफ्ट को सिर्फ एक बार जीत मिली है। पिछले तीन चुनावों से कांग्रेस के अनवर सादत यहां से जीतते आ रहे हैं और चौथी बार भी वही मैदान में हैं। उन्हें चुनौती देने के लिए लेफ्ट ने पूर्व विधायक और पूर्व सांसद ए एम आरिफ को यहां से उतारा है।

 

पेरुमबवूर- चलाकुडी लोकसभा क्षेत्र में आने वाली यह विधानसभा सीट भी अब कांग्रेस के ही कब्जे में आ चुकी है। दो बार विधायक ई कुन्नापिल्ली की जगह कांग्रेस ने इस बार मनोज मुतेदन को मौका दिया है। वहीं लेफ्ट की ओर से केरल कांग्रेस (M) के बेजिल पॉल को उतारा गया है।

 

कुन्नतुनाड- यह सीट भी चलाकुडी लोकसभा क्षेत्र में है और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। लगातार दो बार कांग्रेस की जीत के बाद 2021 में यहां से सीपीआई ने जीत हासिल कर ली थी और पी वी श्रीनिजिन ने जीत हासिल कर ली थी। उन्हें ही फिर से मैदान में उतारा गया है। वहीं, कांग्रेस ने यहां से दो बार के विधायक रहे वी पी सजींद्रन को टिकट दिया है। 2021 में वह छोटे अंतर से चुनाव हारे थे।

 

पिरावोम- एर्नाकुलम जिले की यह विधानसभा सीट कोट्टायम लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। केरल कांग्रेस (जैकब) जो कि अब UDF का हिस्सा है, वह यहां से चुनाव जीतती आ रही है। पार्टी के मुखिया अनूप जैकब खुद लगातार तीन बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं। UDF की ओर से अनूप जैकब एक बार फिर से उम्मीदवार हैं और उनका मुकाबला केरल कांग्रेस (M) के साबू जैकब से होना है।

 

मुवात्तुपुझा- यह विधानसभा सीट एर्नाकुलम जिले में है लेकिन इडुक्की लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट पर भी कांग्रेस और लेफ्ट का रोचक मुकाबला देखने को मिलता है। पिछला चार चुनाव से एक बार लेफ्ट तो एक बार कांग्रेस को जीत मिलती आ रही है। 2021 में कांग्रेस के मैथ्यू कुजलंदान ने यहां से जीत हासिल की थी। कांग्रेस ने फिर से उन पर ही भरोसा जताया है। वहीं, लेफ्ट की ओर से एन अरुन मैदान में हैं।


कोठामंगलम- यह विधानसभा क्षेत्र भी इडुक्की लोकसभा क्षेत्र में ही आता है। कांग्रेस पार्टी यहां 2006 से ही हारती आ रही है। पिछले दो चुनावों से सीपीएम के एंटनी जॉन यहां से जीतते आ रहे हैं। इस बार भी लेफ्ट ने उन्हीं पर दांव लगाया है। वहीं यूडीएफ में शामिल केरल कांग्रेस (जोसेफ) ने इस सीट पर शीबू तेक्कुमपुरम को अपना उम्मीदवार बनाया है। पिछली बार वह इसी सीट से लेफ्ट के उम्मीदवार से चुनाव हार गए थे।

 

जिले की स्थिति
क्षेत्रफल-3063 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर-95.89%
तालुका-7
ब्लॉक-14
पंचायत-82
नगरपालिका-13
विधानसभा-14
गांव-124


जिला- एर्नाकुलम
विधानसभा सीटें-14
UDF-9
LDF-5


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