पश्चिम बंगाल का साउथ 24 परगना जिला राज्य के सबसे बड़े, जटिल और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों में गिना जाता है। यह जिला सिर्फ प्रशासनिक इकाई नहीं, बल्कि भूगोल, पर्यावरण, राजनीति और समाज का एक अनोखा संगम है। एक तरफ यहां दुनिया का सबसे बड़ा मैंग्रोव वन क्षेत्र, सुंदरबन, स्थित है, तो दूसरी तरफ तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ते इलाके भी हैं जो कोलकाता महानगर से सीधे जुड़े हुए हैं।
यह जिला बंगाल की खाड़ी के किनारे बसा हुआ है और इसकी पहचान एक 'फ्रंटलाइन क्लाइमेट ज़ोन' के रूप में भी बन चुकी है, क्योंकि यहां चक्रवात, समुद्री जलस्तर वृद्धि और तटीय कटाव जैसे खतरे लगातार बने रहते हैं। इस लिहाज से साउथ 24 परगना न सिर्फ पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे भारत के लिए पर्यावरण और आपदा प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण केस स्टडी है।
भौगोलिक और रणनीतिक दृष्टि से यह जिला बेहद संवेदनशील है। यह बांग्लादेश की सीमा के पास स्थित है और समुद्री मार्गों के करीब होने के कारण सुरक्षा और सीमा प्रबंधन के लिहाज से भी अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा, कोलकाता के लिए खाद्य आपूर्ति, मछली उत्पादन और श्रमबल का बड़ा हिस्सा इसी जिले से आता है।
इतिहास की बात करें तो साउथ 24 परगना का विकास औपनिवेशिक काल में हुआ, जब ब्रिटिश शासन के दौरान इसे प्रशासनिक रूप से व्यवस्थित किया गया। यह पहले '24 परगना' नामक बड़े जिले का हिस्सा था, जिसे बाद में उत्तर और दक्षिण में बांटा गया। इस क्षेत्र में जमींदारी व्यवस्था और नदी-आधारित अर्थव्यवस्था का गहरा प्रभाव रहा है।
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सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह जिला विविधता से भरा हुआ है। यहां बंगाली संस्कृति का गहरा प्रभाव है, लेकिन इसके साथ ही मुस्लिम समुदाय, मछुआरा समुदाय और आदिवासी समूह भी बड़ी संख्या में रहते हैं। यहां के लोगों की जीवनशैली प्रकृति के बेहद करीब है, खासकर सुंदरबन क्षेत्र में, जहां लोग जंगल, नदी और समुद्र पर निर्भर रहते हैं।
यहां कई धार्मिक और पर्यटन स्थल भी मौजूद हैं। गंगासागर का तीर्थ स्थल देशभर में प्रसिद्ध है, जहां हर साल मकर संक्रांति पर लाखों श्रद्धालु आते हैं। इसके अलावा सुंदरबन टाइगर रिजर्व भी एक प्रमुख आकर्षण है, जहां रॉयल बंगाल टाइगर पाया जाता है।
भौगोलिक तानाबाना कैसा है?
साउथ 24 परगना का भूगोल बेहद जटिल और विविध है। जिले का एक बड़ा हिस्सा डेल्टा क्षेत्र में आता है, जहां गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी प्रणाली की कई धाराएं मिलती हैं। यह इलाका नदियों, खाड़ियों, दलदलों और द्वीपों से भरा हुआ है।
सुंदरबन क्षेत्र में घने मैंग्रोव वन हैं, जो प्राकृतिक ढाल की तरह काम करते हैं और चक्रवातों से तटीय क्षेत्रों की रक्षा करते हैं। हालांकि, जलवायु परिवर्तन के कारण इन वनों पर भी खतरा बढ़ रहा है।
यहां की जलवायु आर्द्र और गर्मी वाली है, जिसमें भारी बारिश, उच्च आर्द्रता और गर्मी का असर रहता है। मानसून के दौरान बाढ़ और चक्रवात आम समस्या हैं।
एक नजर, साउथ 24 परगना जिले पर
साउथ 24 परगना जिला प्रशासनिक रूप से काफी बड़ा है और इसमें शहरी तथा ग्रामीण दोनों क्षेत्र शामिल हैं। यहां कई सब-डिवीजन, ब्लॉक और ग्राम पंचायतें हैं। जिले में नगर निगम, नगर पालिकाएं और ग्रामीण प्रशासनिक ढांचे का मिश्रण देखने को मिलता है।
राजनीतिक दृष्टि से यह जिला बेहद महत्वपूर्ण है। यहां 4 लोकसभा सीटें जादवपुर, डायमंड हार्बर, मथुरापुर और जयनगर आती हैं। इसके अलावा यहां लगभग 31 विधानसभा सीटें हैं, जो इसे पश्चिम बंगाल के सबसे राजनीतिक रूप से प्रभावशाली जिलों में से एक बनाती हैं।
कैसे हैं जातीय और धार्मिक समीकरण?
साउथ 24 परगना की आबादी विविध और जटिल सामाजिक संरचना वाली है। यहां हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय बड़ी संख्या में रहते हैं, कई इलाकों में मुस्लिम आबादी 40-50% तक भी पहुंचती है। जातीय समीकरण की बात करें तो यहां अनुसूचित जाति (SC) और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की बड़ी आबादी है, जो चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभाती है। सुंदरबन क्षेत्र में आदिवासी समुदाय भी मौजूद हैं।
यहां की राजनीति में जाति से ज्यादा धर्म, स्थानीय मुद्दे, गरीबी, रोजगार और आपदा प्रबंधन जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होते हैं।
विधानसभाओं पर एक नजर
साउथ 24 परगना की विधानसभा सीटों पर लंबे समय तक वाम दलों का प्रभाव रहा, खासकर सीपीआई (एम) के नेतृत्व में। 1977 से 2011 तक वाम मोर्चा सरकार के दौरान यहां उनका मजबूत आधार था।
लेकिन 2011 के बाद टीएमसी ने इस जिले में जबरदस्त पकड़ बना ली। ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी ने ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में अपना मजबूत वोट बैंक तैयार किया।
हाल के चुनावों में टीएमसी का दबदबा साफ दिखाई देता है, हालांकि बीजेपी ने भी कुछ इलाकों में अपनी पैठ बढ़ाई है।
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क्रमांक |
विधानसभा सीट (नंबर) |
विजेता उम्मीदवार |
पार्टी |
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1 |
गोसाबा (SC) |
जयंता नस्कर |
टीएमसी |
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2 |
बसंती (SC) |
श्यामल मंडल |
टीएमसी |
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3 |
कुलतली (SC) |
गणेश चंद्र मंडल |
टीएमसी |
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4 |
पाथरप्रतिमा |
समीर कुमार जाना |
टीएमसी |
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5 |
काकद्वीप |
मंतुराम पाखिरा |
टीएमसी |
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6 |
सागर |
बंकिम चंद्र हाजरा |
टीएमसी |
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7 |
कुलपी |
जोगारंजन हालदार |
टीएमसी |
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8 |
रायदिघी |
अलोक जलदाता |
टीएमसी |
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9 |
मंदिरबाजार |
जॉयदेब हालदार |
टीएमसी |
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10 |
जयनगर |
बिस्वनाथ दास |
टीएमसी |
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11 |
बारुइपुर पूर्व |
बिवास सरदार (वोबो) |
टीएमसी |
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12 |
कैनिंग पश्चिम |
पारेश राम दास |
टीएमसी |
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13 |
कैनिंग पूर्व |
साओकात मोल्ला |
टीएमसी |
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14 |
बारुइपुर पश्चिम |
बिमान बनर्जी |
टीएमसी |
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15 |
मग्राहाट पूर्व |
नमिता साहा |
टीएमसी |
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16 |
मग्राहाट पश्चिम |
गियास उद्दीन मोल्ला |
टीएमसी |
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17 |
डायमंड हार्बर |
पन्नालाल हालदार |
टीएमसी |
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18 |
फलता |
शंकर कुमार नस्कर |
टीएमसी |
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19 |
सतगछिया |
मोहन चंद्र नस्कर |
टीएमसी |
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20 |
बिशनुपुर |
दिलीप मंडल |
टीएमसी |
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21 |
सोनारपुर दक्षिण |
अरुंधति मैत्रा (लवली) |
टीएमसी |
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22 |
भंगड़ |
नवसाद सिद्दीकी |
आईएसएफ |
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23 |
कस्बा |
जावेद अहमद खान |
टीएमसी |
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24 |
जादवपुर |
देबब्रत मजूमदार (मलय) |
टीएमसी |
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25 |
सोनारपुर उत्तर |
फिरदौसी बेगम |
टीएमसी |
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26 |
टॉलीगंज |
अरूप बिस्वास |
टीएमसी |
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27 |
बेहाला पूर्व |
रत्ना चटर्जी |
टीएमसी |
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28 |
बेहाला पश्चिम |
पार्थ चटर्जी |
टीएमसी |
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29 |
महेशतला |
दुलाल चंद्र दास |
टीएमसी |
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30 |
बज बज |
अशोक कुमार देब |
टीएमसी |
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31 |
मेटियाबुरुज |
अब्दुल खालेक मोल्ला |
टीएमसी |
बीजेपी ने इस जिले में एक भी सीट नहीं जीती। टीएमसी ने भारी बहुमत से 30 सीटें जीतीं, जबकि भंगड़ सीट आईएसएफ के खाते में गई।
लोकसभा चुनाव में क्या हुआ था?
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में साउथ 24 परगना जिले की ज्यादातर सीटों पर टीएमसी ने जीत हासिल की। खासकर डायमंड हार्बर सीट, जहां से ममता बनर्जी के करीबी नेता अभिषेक बनर्जी चुनाव लड़ते हैं, टीएमसी का गढ़ मानी जाती है।
बीजेपी ने कुछ सीटों पर वोट प्रतिशत बढ़ाया, लेकिन उसे सीमित सफलता ही मिली। इससे यह साफ होता है कि जिले में अभी भी क्षेत्रीय राजनीति और स्थानीय नेतृत्व का प्रभाव ज्यादा है।
इकॉनमी का आधार क्या?
साउथ 24 परगना की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, मत्स्य पालन और छोटे उद्योगों पर आधारित है। यह जिला पश्चिम बंगाल में मछली उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है। सुंदरबन क्षेत्र में लोग शहद संग्रह, मछली पकड़ने और जंगल संसाधनों पर निर्भर रहते हैं।
वहीं, कोलकाता के नजदीकी इलाकों में शहरीकरण के कारण रियल एस्टेट, व्यापार और सेवा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। यह जिला कोलकाता के लिए खाद्य और श्रम आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत है, जिससे इसकी आर्थिक भूमिका और भी बढ़ जाती है।
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जिले की स्थिति
क्षेत्रफल – लगभग 9,960 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर – लगभग 77%
विधानसभा सीटें – 31
लोकसभा सीटें – 4
नगर निगम – 1 (राजपुर-सोनारपुर नगर निगम)
ब्लॉक – 29+
