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BJP, लेफ्ट, कांग्रेस नहीं, TMC के ही पीछे क्यों पड़े ओवैसी? प्लान सझिए

जिन सीटों को तृणमूल कांग्रेस अपना गढ़ समझती है, उन्हीं सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी ने AIMIM के लिए पूरा दमखम झोंक दिया है।

Asaduddin Owaisi

AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी। Photo Credit: PTI

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पश्चिम बंगाल में असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायुं कबीर की जन उन्नयन पार्टी के साथ गठबंधन तोड़ लिया है। अब ऑल इंडिया इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM), राज्य की 12 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। AIMIM की ज्यादातर सीटें मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जिलों में हैं, जहां हाल में वोटर लिस्ट की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान बहुत सारे वोटरों के नाम काटे गए थे।

AIMIM इन सीटों पर इसलिए लड़ रही है क्योंकि ये सीटें तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बहुत मजबूत गढ़ हैं। 2021 के चुनाव में TMC ने इनमें से ज्यादातर सीटों पर बड़ी जीत हासिल की थी। औसतन TMC की जीत का अंतर करीब 55 हजार वोट था। कुछ सीटों पर तो यह मार्जिन 1 लाख से भी ज्यादा था।

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सबको छोड़ TMC के पीछे क्यों पड़े हैं ओवैसी?

असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी पर अक्सर आरोप लगते हैं कि वह BJP की 'B-टीम' की तरह काम करती है। मुस्लिम वोट बांटकर TMC या विपक्ष को नुकसान पहुंचाती है। इन आरोपों का जवाब देने के लिए AIMIM ने जानबूझकर TMC के सबसे मजबूत इलाकों में उम्मीदवार उतारे हैं। राज्य में वह बीजेपी को चुनावी ताकत ही नहीं मानते। असली लड़ाई, टीएमसी से है। कांग्रेस और लेफ्ट ने अपना जनाधार, साल 2021 से ही खो दिया है। ओवैसी के लिए विपक्ष मतलब टीएमसी है। 

AIMIM का कहना है कि पार्टी का जोर, अल्पसंख्यकों पर है। M टीम बनाकर, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्गों की हालत, AIMIM बेहतर करतना चाहती है। पार्टी ने इन सीटों को चुनने की वजह बताते हुए कहा कि ये इलाके बिहार के सीमांचल क्षेत्र के करीब हैं, जहां AIMIM की अच्छी पकड़ है। मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी का संगठन भी पहले से बेहतर है। 

इंडियन एक्सप्रेस के साथ बातचीत में AIMIM के पश्चिम बंगाल प्रभारी आदिल हसन ने कहा कि ये सीटें हिंदू-मुस्लिम मिश्रित आबादी वाली हैं और पार्टी यहां अल्पसंख्यकों और गरीबों की नुमाइंदगी करना चाहती है।

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क्या हुमायूं कबीर से अलग होकर कमजोर पड़े ओवैसी?

AIMIM ने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन तोड़ दिया है। हुमायूं कबीर का एक वीडियो सामने आया था, जिनमें उन पर पैसे लेकर टीएमसी के मुस्लिम वोट में सेंध लगाने का दावा किया गया था। साल 2021 में AIMIM ने बंगाल में 6 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसे बहुत कम वोट मिले थे और सभी उम्मीदवार जमानत जब्त हो गई थी। 

क्यों खुद को मजबूत मान रहे हैं ओवैसी?

AIMIM बीते 2 चुनाव से बिहार के सीमांचल में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। साल 2011 की जनगणना के मुताबिक पश्चिम बंगाल में मुस्लिम आबादी 24 फीसदी से ज्यादा है। ओवैसी मुसलमानों के बड़े नेता हैं। उन्हें मुस्लिम वर्ग पसंद करता है, वह लोकप्रिय हैं और अल्पसंख्यकों के नायक के तौर पर वह खुद को पेश करते हैं। इसी वजह से ओवैसी उन सीटों पर जोर दे रहीं हैं, जहां टीएमसी मजबूत है। 

AIMIM इन इलाकों में मुस्लिम वोटरों का ध्रुवीकरण कर सकती है। AIMIM का यह कदम वोट कटवा के आरोपों से बचने और मुस्लिम बहुल इलाकों में ही जोर देने पर सीमित है। ओवैसी ने केवल  उन सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की है, जिन पर वह स्वाभाविक रूप से मजबूत हैं।

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कब हैं पश्चिम बंगाल में चुनाव 

असदुद्दीन ओवैसी जिन सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं, उन पर दो चरणों में वोटिंग है। 9 सीटों पर 23 अप्रैल को पहले चरण में और बाकी 3 सीटों पर 29 अप्रैल को दूसरे चरण में वोटिंग होगी।

 


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