SP, कांग्रेस, NCP, महाराष्ट्र में सबको झटका देकर छाई कैसे ओवैसी की AIMIM?
असदुद्दीन ओवैसी अल्पसंख्यक हितों की राजनीति करते हैं। बिहार से महाराष्ट्र तक, उनकी पार्टी AIMIM का विस्तार हो रहा है। नगर निगम चुनावों में भी उन्होंने कमाल किया है, आखिर कैसे, आइए समझते हैं।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। Photo Credit: PTI
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) की कामयाबी अब बिहार के बाद, महाराष्ट्र तक पहुंच गई है। असदुद्दीन ओवैसी की अध्यक्षता वाली पार्टी का जनाधार, अल्पसंख्यक बाहुल सीटों पर लगातार बढ़ रहा है। देश में अल्पसंख्यक राजनीति के सबसे मुखर चेहरों में से एक असदुद्दीन ओवैसी भी हैं, जिसकी वजह से उन सीटों पर उनकी दावेदारी ज्यादा मजबूत हो रही है, जहां मुस्लिम वोटर ज्यादा हैं। महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों में उन्होंने अपनी मजबूती एक बार फिर साबित की है।
असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM नगर निगम चुनावों में बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। इस पार्टी के पार्षद उम्मीदवारों ने अप्रत्याशित जीत दर्ज की है। जिन वार्डों में मुस्लिम आबादी ज्यादा थी, वहां असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी को बड़ी कामयाबी मिली। राज्यभर के नगर निकायों में कुल 114 सीटों पर AIMIM ने जीत हासिल की है। ओवैसी, महाराष्ट्र के लिए चौंकाने वाले फैक्टर साबित हुए हैं। ओवैसी के हिंदू उम्मीदवारों ने भी चुनाव में जीत हासिल की है।
AIMIM नेता शारिक नक्शबंदी ने अपनी पार्टी की जीत पर कहा है कि असदुद्दीन ओवैसी, घर-घर जाकर कैंपेनिंग कर रहे थे। बीते चुनावों में उनके प्रत्याशी कम सीटों से चूके थे। इस बार असदुद्दीन ओवैसी के सक्रिय चुनाव प्रचार ने हालात उनके पक्ष में कर दिए। उन्हें अल्पसंख्यक नेताओं का समर्थन मिला है। आलम यह है कि एक तरफ नेशनिलस्ट कांग्रेस पार्टी और कांग्रेस पार्टी से अल्पसंख्यक वोटर नाराज हो रहे हैं, उन्हें असदुद्दीन ओवैसी में अपना सियासी भविष्य नजर आ रहा है।
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कहां-कहां, किस पर भारी पड़ी असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM?
असदुद्दीन ओवैसी, राज ठाकरे से ज्यादा महाराष्ट्र में लोकप्रिय है। अपने विभाजनकारी बयानों के लिए बदनाम राज ठाकरे की महाराष्ट्र सेना 6 सीट जीत पाई तो उनसे कहीं ज्यादा भारी असदुद्दीन ओवैसी पड़े। बीएमसी में अब AIMIM के 8 पार्षद हैं। AIMIM मुस्लिमों की एक और हिमायती पार्टी कही जाने वाली समाजवादी पार्टी से कहीं बेहतर प्रदर्शन करके 121 सीटें अपने नाम की हैं।। मुंबई में AIMIM 8 सीटें मिलीं, वहीं संभाजी और मालेगांव में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी AIMIM है।
AIMIM ने छत्रपति संभाजी नगर में अपना सबसे अच्छा प्रदर्शन किया किया है। नगर निगम की 113 सीटों में से 33 सीटें AIMIM ने हासिल की है। दूसरी सबसे बड़ी पार्टी ओवैसी की पार्टी है। BJP को 58 सीटें, शिवसेना को 12 और शिवसेना (UBT) को सिर्फ 6 सीटें मिलीं। उद्धव ठाकरे राज्य के मुख्यमंत्री रह चुके हैं और असदुद्दीन ओवैसी कभी मंत्री तक नहीं बन पाए हैं। पिछले चुनाव में AIMIM ने 25 सीटें जीती थीं। साल 2019 में एक लोकसभा सीट पर भी वह कामयाब हुए थे।
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मालेगांव नगर निगम में कुल 84 सीटें हैं, जहां से करीब 20 सीटों पर AIMIM को जीत मिली है। शिवसेना सिर्फ 18 सीट हासिल कर पाई। यह जिला, मुस्लिम बाहुल है। यहां मुस्लिम समुदाय का प्रभुत्व है। यहां से इस्लाम पार्टी ने 35 सीटों पर जीत हासिल की है। इस्लाम पार्टी, मालेगांव में सबसे बड़ी पार्टी है। समाजवादी पार्टी को यहां 6 सीटों पर कामयाबी मिली।
AIMIM ने नांदेड़ में 14 सीटें, अमरावती में 11 और धुले नगर निकाय में 10 से ज्यादा सीटें जीतीं। सोलापुर और मुंबई में पार्टी ने आठ-आठ सीटें, नागपुर में सात, ठाणे में पांच, अकोला में तीन और अहिल्यानगर और जालना में दो-दो सीटें जीतीं। इसने चंद्रपुर में भी एक सीट जीतकर अपना खाता खोला है।
इम्तियाज जलील, प्रदेश अध्यक्ष, इम्तियाज जलील:-
इस बार, हमने अपनी रणनीति बहुत सोच-समझकर बनाई थी। प्रत्याशियों के नाम पर मंथन किया गया था। छत्रपति संभाजी नगर में चुन-चुनकर उन नामों को आगे रखा गया, जिनके जीतने की उम्मीद ज्यादा थी। हमने आम लोगों को चुनावी मैदान में उतारा, जिसका असर भी दिखा।
मुंबई में कैसे कमाल कर गए ओवैसी?
मुंबई में AIMIM को मुस्लिम बाहुल इलाकों में जीत मिली है। शिवाजी नगर, गोवंडी, मानखुर्द और अनुशक्ति नगर में वार्ड नंबर 134, 136, 137, 138, 139, 140, 143 और 145 में AIMIM ने कामयाबी हासिल की है। इन इलाकों में मुस्लिम वोटर मजबूत स्थिति में हैं और हमेशा से हार जीत तय करते आए हैं।
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ने सिर्फ मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट नहीं दिया। पार्टी ने कई अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी उम्मीदवारों को मौका दिया। खुद इम्तियाज जलील मानते हैं कि उनकी पार्टी की कामयाबी की एक वजह यह भी है।
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इम्तियाज जलील, प्रदेश अध्यक्ष, इम्तियाज जलील:-
जब बीजेपी और शिवसेना खुद को सांप्रदायिक पार्टियां बताने में व्यस्त थीं, हमने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और हिंदू OBC सदस्यों को चुनावी मैदान में उतारने का फैसला किया। हमें कामयाबी मिली।
महाराष्ट्र में कैसे कमाल कर गए ओवैसी?
- आबादी: असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM को उन सीटों पर जीत मिली है, जहां अल्पसंख्यक मुस्लिम वोटर निर्णायक स्थिति में हैं। उन्होंने डोर-टू-डोर कैंपनिंग की है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और एनसीपी से नाराज लोगों ने ओवैसी के साथ जाने का विकल्प चुनाव। शिवसेना के साथ अल्पसंख्यक, इसलिए नहीं गए क्योंकि वह बीजेपी के साथ है, उद्धव ठाकरे के साथ इसलिए नहीं गए क्योंकि राज ठाकरे अपने उग्र हिंदुत्व और क्षेत्रवाद के लिए बदनाम रहे हैं।
- ध्रुवीकरण: असदुद्दीन ओवैसी की भाषण शैली आक्रामक है। वह मुस्लिमों के हितों की बात करते हैं। उनके हिजाब पहनी लड़की का प्रधानमंत्री बनाने वाला बयान सुर्खियों में रहा। अल्पसंख्यकों को उनमें नया मसीहा नजर आ रहा है। अब लोग ओवैसी पर भरोसा कर रहे हैं। ओवैसी के जन संपर्क अभियानों की वजह से पार्टी को फायदा पहुंचा है।
- संगठन: कांग्रेस भी अल्पसंख्यक हितों की बात करती है।
राहुल गांधी
हों या मल्लिकार्जुन खड़गे, अल्पसंख्यकों को इंसाफ दिलाने की मांग में दोनों नेता, ओवैसी से पीछे नहीं रहे हैं। बस कांग्रेस के साथ कैडर नहीं है, ओवैसी के साथ छत्रपति संभाजीनगर, मालेगांव और नांदेड़ जैसे शहरों में मुस्लिम आबादी दिल से जुड़ी है। AIMIM ने यहां जमीनी स्तर पर वार्ड-वार संगठन खड़ा किया है। AIMIM नेताओं ने स्थानीय नागरिक मुद्दों पर ध्यान दिया, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा बेहतर करने का वादा किया, जिस पर लोगों ने यकीन जताया।
- VBA: पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक
अखिलेश यादव
को नहीं भुना पाए, असदुद्दीन ओवैसी भुना ले गए। उन्होंने दलित मुस्लिम गठबंधन पर जोर दिया था। वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA) की मदद से उन्होंने कमाल किया। AIMI ने केवल मुस्लिम ही नहीं, बल्कि दलितों और पिछड़ों को भी जोड़ने की कोशिश की और कामयाब रही।
- मोहभंग: मुस्लिम समुदाय के एक बड़े वर्ग को अब लगने लगा है कि धर्मनिरपेक्ष दल उनका केवल 'वोट बैंक' की तरह इस्तेमाल करने लगा है। असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM ने खुद को ऐसी पार्टी की कवायद शुरू की, जो सत्ता में उन्हें सीधे हिस्सेदारी दे रही है। महाराष्ट्र से लेकर बिहार तक में असदुद्दीन ओवैसी का यह फॉर्मूला सफल रहा है।
किन राज्यों में सफल हैं ओवैसी?
असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM पार्टी के प्रतिनिधि अब देश के कई राज्यों में हैं। बिहार में AIMIM के 5 विधायक हैं। तेलंगाना में AIMIM के 7 विधायक हैं। महाराष्ट्र में 120 से ज्यादा पार्षद हैं। अब असदुद्दीन ओवैसी असम और पश्चिम बंगाल में अपना सियासी भाग्य आजमा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में करीब 30 फीसदी तो असम में 34 फीसदी मुसलमान हैं। ओवैसी इन राज्यों में खुद को प्रबल दावेदार मान रहे हैं।
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