एक जमाने में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (AIADMK) की कर्ता-धर्ता रहीं वीके शशिकला ने पार्टी से निकाले जाने के बाद, अब नई सियासी पारी शुरू की है। उन्होंने ऑल इंडिया पुरैची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कझगम (AIPTMMK) नाम से नई पार्टी बनाई है। राजनीति की दूसरी पारी में वह भी जोर आजमाइश करने जा रही हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में एक महीने से भी कम वक्त बचा है, शशिकला ने आखिरी दिनों में AIADMK और द्रविड़ मुनेत्र कझगम (DMK) की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। 


एक जमाने में जयललिता के साए की तरह हमेशा साथ रहने वाली वीके शशिकला की नई सियासी पारी, उनकी राजनीतिक मजबूरी भी है। किसी जमाने में AIADMK की कर्ता-धर्ता रहीं वीके शशिकला, जयललिता की मौत के बाद से ही हाशिए पर हैं। उन्हें अपनी पार्टी से निष्कासन तक झेलना पड़ा था। अब उन्होंने अपनी पार्टी बना ली है। 

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वीके शशिकला की पार्टी क्या है?

वीके शशिकला ने 13 मार्च को अपनी नई राजनीतिक पार्टी के नाम का एलान किया है। पार्टी का नाम ऑल इंडिया पुरैची थलाइवर मक्कल मुनेत्र कझगम  (AIPTMMK) रखा गया है। पार्टी का चुनाव चिन्ह नारियल के पेड़ों का बाग है। वीके शशिकला इसे एकता का प्रतीक बता रही हैं। उनका कहना है कि एक अकेला पेड़ बाग नहीं बनता, बल्कि कई पेड़ मिलकर बाग बनाते हैं। ठीक वैसे ही उनके कार्यकर्ता और लोग मिलकर पार्टी को मजबूत बनाएंगे।

जयललिता के नाम बनाई पार्टी?

वीके शशिकला ने पार्टी के नाम का एलान, तमिलनाडु के रामनाथपुरम जिले में की। उन्होंने जयललिता को याद किया। पार्टी का झंडा भी लहराया। झंडे में काला, सफेद और लाल रंग हैं। बीच में पूर्व मुख्यमंत्री अन्नादुराई, MGR और जयललिता की तस्वीरें बनी हैं। 

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पार्टी का एजेंडा क्या है?

वीके शशिकला का कहना है कि यह नई द्रविड़ पार्टी गरीबों और आम लोगों के लिए काम करेगी। वीके शशिकला का मानना है कि अब DMK और AIADMK दोनों दल, द्रविड़ राजनीति को भूल गए हैं, जनता के साथ विश्वासघात कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर अब चुप रहे तो यह जनता के साथ धोखा होगा। AIADMK के मौजूदा नेता एडाप्पादी के पलानीस्वामी पर शशिकला भड़की हैं। उन्होंने उन पर विश्वासघात का आरोप लगाया है। जो AIADMK ने नहीं किया, वह वीके शशिकला करेंगी।

वीके शशिकला की पार्टी के ध्वज में जयललिता को प्रमुखता से जगह मिली है।

रणनीति क्या है?

वीके शशिकला, अब न केवल तमिलनाडु, बल्कि पुडुचेरी में भी अपने उम्मीदवार उतारेंगी। वह पार्टी को मजबूत करने के लिए गठबंधन में चुनाव लड़ सकती हैं। यह कदम 2026 के तमिलनाडु चुनावों से पहले सियासी पारा और बढ़ा सकता है। चुनाव में DMK, AIADMK, BJP और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) जैसे दल, चुनावी मैदान में हैं।  

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शशिकला किस आधार पर वोट मांगेंगी?

शशिकला ने अपनी पार्टी के झंडे में जयललिता और एमजीआर की तस्वीरों का इस्तेमाल किया है। वह खुद को जयललिता की विरासत की असली हकदार मानती हैं। जीवन के अंतिम वर्षों में वह जयललिता के साथ साए की तरह रहीं है। एक तबका यह मानता था कि जयललिता के बाद AIADMK की कमान उन्हें मिलनी चाहिए। 

जयललिता के निधन पर प्रधानमंत्री मोदी, शशिकला के साथ। Photo Credit: PTI

5 दिसंबर 2016 में जब जयललिता का निधन हुआ, तब तक, वह पार्टी में मजबूत स्थिति में रहीं। फिर संयोग से आय से अधिक संपत्ति के मामले में वह दोषी पाईं गईं और 15 फरवरी, 2017 को उन्हें जेल हो गई। वह 2021 तक जेल में ही रहीं। तब तक उनके हाथ से पार्टी खिसक चुकी थी। अब इन घटनाओं को आधार बनाकर वह सियासी मैदान में आ रही हैं। 

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कितनी मजबूत है शशिकला की दावेदारी?

वीके शशिकला, जमीनी नेता कम, पर्दे के पीछे पार्टी को कंट्रोल करने वाली नेता ज्यादा रही हैं। साल 2011 में शशिकला की इसी भूमिका के लिए, उनकी सबसे अच्छी दोस्त रही जयललिता ने परिवार सहित उन्हें बाहर निकाल दिया था। जयललिता को लगने लगा था कि वह पार्टी पर पूरा नियंत्रण कर रहीं हैं। करीब सालभर शशिकला पार्टी से बाहर रहीं थीं, फिर जयललिता के सामने राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को सरेंडर करने के बाद उनकी वापसी हुई थी। 

वह दशकों तक जयललिता के साथ रहीं हैं, इसलिए जमीनी स्तर पर उन्हें पार्टी के प्रबंधन की अच्छी समझ है। वह थेवर समुदाय से आती हैं। साल 2011 की जनगणना के आंकड़े बताते हैं कि यह, तमिलनाडु के सबसे प्रभावी समुदायों में से एक है। थेवर जाति की आबादी करीब 4 फीसीदी है। यह समुदाय पारंपरिक रूप से AIADMK का बड़ा वोट बैंक रहा है। अब शशिकला, इस वर्ग को एक बार फिर से लुभाने की कोशिश कर सकती हैं। उनके पास चुनाव लड़ने और गठबंधन बनाने के लिए सारे दांवपेच हैं। 

 

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चुनौतियां क्या हैं?

शशिकला, सक्रिय राजनीति में साल 2021 से ही नहीं हैं। चुनावी मैदान से दूर रहने और AIADMK से बिखराव, उन्हें सिासी तौर पर कमजोर कर रहा है। शशिकला चुनाव में बहुत मजबूत भले ही न हों लेकिन वह AIADMK को वह नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। 

चुनौतियों से पार पाने के लिए क्या करेंगे शशिकला?

वीके शशिकला, अकेले चुनाव नहीं लड़ रही हैं। वह समान विचारधारा वाले छोटे दलों के साथ गठबंधन करेंगी। वीके शशिकला, सत्तारूढ़ DMK और विपक्षी AIADMK दोनों से खफा हैं। उनका कहना है कि दोनों दलों ने तमिलनाडु के लिए काम नहीं किया है, जनता को धोखा दिया है। अब वह सत्ता विरोधी लहर का लाभ उठाकर खुद को तीसरे विकल्प के तौर पर आजमाना चाहती हैं। 

जयललिता भरोसे सत्ता में वापसी चाहती हैं शशिकला?

AIADM के पुराने कार्यकर्ताओं का शशिकला के प्रति हो सकता है। वह बार-बार 'अम्मा शासन' का वादा कर रही हैं। कानून व्यवस्था, पोषण और महिला सुरक्षा को आधार बनाकर वह चुनाव लड़ना चाहती हैं। तमिलनाडु में जयललिता को प्यार से लोग अम्मा भी बुलाते थे। अब जयललिता के समर्थक ही उनका सियासी बेड़ा पार करा सकते हैं।

AIADMK से क्यों हुई थी शशिकला की विदाई?


जब शशिकला साल 2017 में जेल गईं तो पार्टी में एक शून्य पैदा हुई। वह ई पलानीस्वामी को बड़ी जिम्मेदारी देकर गईं थीं। पार्टी दो गुटों में बंट गई थी। ईके पलानीस्वामी और ओ पनीरसेल्वम में टकराव बढ़ गया। जब दोनों साथ आए तो यह शर्त रखी गई कि शशिकला और दिनाकरण जैसे नेताओं को पार्टी से बाहर किया जाएगा। 
 
AIADMK नेताओं का तर्क था शशिकला को बाहर होना ही होगा। उनके परिवार को कार्यकर्ता, 'मन्नारगुड़ी माफिया' तक बुलाने लगे। उनके परिवार का दबदबा सरकार और पार्टी पर था। जयललिता की विरासत बचाने के नाम पर शशिकला से महासचिव पद छिन गया। अब उनके पास नई पार्टी के अलावा, कोई दूसरा रास्ता बचा नहीं था। 

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दागी चेहरा, प्रतिबंध, किंग मेकर को किंग बनाएगी जनता?

जयललिता के साथ शशिकला भी भ्रष्टाचार मामले में जेल गई थीं। वह आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल की सजा काट चुकी हैं। यह दाग, आसानी से मिटने वाला नहीं है। वह डीएमके पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रही हैं, लेकिन खुद जेल से आईं हैं। 

 

शशिकला, सजायाफ्ता हैं, जन प्रतिनिधि अधिनियम की ओर से तय कानूनों के मुताबिक अभी वह 2027 तक, खुद चुनाव नहीं लड़ सकती हैं। उनकी पार्टी की यह सबसे बड़ी कमजोरी भी है। जिस नेता के सहारे पार्टी, चुनावी मैदान में हैं, वही चुनाव नहीं लड़ सकता है। 

 

शशिकला, पर्दे के पीछे वाली नेता रही हैं। जयललिता की तमिलनाडु में व्यापक स्वीकार्यता थी, जो शशिकला के पास नहीं है। वह सहेली की भूमिका तक सीमित रही हैं। वह नई पार्टी बनाकर जयललिता की तरह कवायद तो कर सकती हैं लेकिन उनकी सियासत अभी जयललिता की परछाई की पर ही टिकी है।  
 

अब तक कैसा रहा है शशिकला का सफर?

शशिकला, राजनीति में आने से पहले एक गृहिणी थीं। जब जयललिता ने हाथ थामा तो वह राज्य की सबसे मजबूत शख्सियत भी बनीं। शशिकला का जन्म 18 अगस्त 1954 को तंजौर के तिरुतुरईपुंडी में हुआ था। उन्होंने 10वीं तक की पढ़ाई की है। साल 1973 में उनकी शादी एम नटराजन से हुई। शादी के बाद वह चेन्नई में एक वीडियो पार्लर चलाने लगीं। 

साल 1980 के दशक में एम नटराजन और दक्षिण आरकोट के जिला कलेक्टर वीएस चंद्रलेखा के एक परिचित ने उनकी जयललिता से मुलाकात कराई थी। तब जयललिता AIADMK की प्रेस सचिव थीं। शशिकला देखते ही देखते पार्टी की बैठकों का वीडियो कवरेज कराने लगीं, AIDMK की नीतियों के प्रसार में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। जयललिता के साथ उनकी दोस्ती गहरी हो गई। 

वीके शशिकला और जयललिता। Photo Credit: PTI

 
जब MGR की मौत हुई, वह जयललिता के साथ रहने लगीं। जयललिता ने उन्हें चिन्नम्मा नाम दिया था। वह हर फैसले में उनकी सलाह लेती थीं। साल 1991 में पहली बार जयललिता सीएम बनीं तो शशिकला की संघठन में पकड़ मजबूत हुई। उनके रिश्तेदारों को सरकार में अहम पद मिले। वीएन सुधाकरन, जयललिता की करीबी सहयोगी वीके शशिकला के भतीजे थे। जयललिता उन्हें अपने बेटे की तरह मानती थीं। उन्होंने दत्तक पुत्र तक घोषित कर दिया। उनकी शादी का खर्च भी उठाया लेकिन यही उनके लिए मुसीबत बनी।

 

लोग इस शादी पर इतना भड़के कि साल 1996 के आम चुनावों में AIADMK ने लोकसभा की सभी 39 सीटें गंवा दीं। विधानसभा की केवल चार सीटें जी सकीं। जयललिता ने शशिकला के साथ पारिवारिक रिश्ते तोड़ लिए। 1996 में बेटे को भी त्याग दिया। शशिकला पर इसी दौरान विदेशी फंड लेने के आरोप लगे, वह जेल भी गईं। जब बाहर आईं तो फिर से वह पार्टी में शामिल हो गईं। 

जयलिलता, वीएन सुधाकरन की शादी पर बुरी तरह घिर गईं थीं।

साल 2011 में जयललिता को लगा कि शशिकला पार्टी के खिलाफ साजिश रच रहीं हैं। जयललिता ने उन्हें पार्टी से परिवार सहित निकाल दिया, फिर 2012 में जैसे-तैसे शशिकला की पार्टी में वापसी हुई। शशिकला ने यह भरोसा दिया था कि वह राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं अपने साथ नहीं ला रही हैं। 

साल 2016 में जयललिता की जब मौत हुई, शशिकला ने AIADMK पर कब्जा जमाने की कोशिश की। वह जनरल सेक्रेटरी बनीं, लेकिन 2017 में आय से अधिक संपत्ति केस में उन्हें जेल हो गई। साल 2021 वजह सजा काटकर बाहर आईं और AIADM ने दोबारा उन्हें भाव ही नहीं दिया।