देश की 37 राज्यसभा सीटों पर चुनावों की घोषणा हो गई है। इन चुनावों के बाद तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव भी होंगे। इन्हीं चुनावों के सिलसिले में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल बीते रविवार तमिलनाडु पहुंचे थे। उन्होंने डीएमके प्रमुख और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन से मुलाकात की। इस बैठक में केसी वेणुगोपाल ने सीएम स्टालिन से विधानसभा चुनावों में सीट बंटवारे और पावर शेयरिंग के बजाय राज्यसभा की सीट को लेकर बातचीत की।
रिपोर्ट्स के अनुसार, कांग्रेस तमिलनाडु से कांग्रेस के उम्मीदवार को राज्यसभा भेजना चाहती है। इंडियन एक्स्प्रेस की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि केसी वेणुगोपाल ने कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के लिए राज्यसभा सीट की मांग की है। यह बातचीत ऐसे समय में हुए है जब कांग्रेस और डीएमके के बीच राज्य में पावर शेयरिंग को लेकर बातचीत चल रही है।
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पवन खेड़ा के लिए मांगी राज्यसभा सीट
पवन खेड़ा कांग्रेस के प्रवक्ता हैं और गांधी परिवार के करीबी भी माने जाते हैं। पार्टी के लिए लगातार पूरी शिद्दत से मेहनत करते हुए नजर आते हैं। ऐसे में पवन खेड़ा को अब पार्टी लंबी तपस्या का इनाम देने का मन बना चुकी है। विधानसभा चुनावों पर बातचीत के लिए कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल तमिलनाडु पहुंचे और सीएम स्टालिन से मिले। इस मीटिंग में उन्होंने पवन खेड़ा के लिए राज्सभा की सीट मांगी है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, डीएमके कांग्रेस नेता के लिए एक राज्यसभा सीट छोड़ सकती है लेकिन सवाल यह है कि क्या डीएमके विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को उसकी मांग के अनुसार सीटें देगी या नहीं।
ज्यादा सीटों की मांग ठुकराई
कांग्रेस के कुछ नेता पिछले दिनों से तमिलनाडु में सत्ता में भागीदारी यानी पावर शेयरिंग की भी बात कर रहे हैं। पिछले महीने कांग्रेस के करीब 40 नेता दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व से मुलाकात करने भी गए थे। इससे पहले कांग्रेस सांसद मणिकम टैगौर और ऑल इंडिया प्रोफेशनल्स कांग्रेस के अध्यक्ष प्रवीण चक्रवर्ती ने ज्यादा सीटें मांगने के साथ-साथ सरकार में हिस्सेदारी भी मांगी खी लेकिन सीएम स्टालिन ने कांग्रेस की पावर शेयरिंग की मांगों को खारिज कर दिया था। पार्टी सूत्रों का कहना है कि डीएमके कांग्रेस की ज्यादा सीटों की मांग को भी गंभीरता से नहीं ले रही है।
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डीएमके ने पावर शेयररिंग से मना किया
पावर शेयरिंग के लिए डीएमके ने साफ मना कर दिया है। डीएमके नेताओं का कहना है कि डीएमके के पास खुद बहुमत है, तो राज्य में गठबंधन की सरकार क्यों चलाई जाए। नेताओं का मानना है कि गठबंधन से कमजोर और अस्थिर सरकार की छवि बनती है, जो तमिलनाडु जैसे राज्य के लिए अच्छा नहीं होगा।
डीएमके नेताओं का कहना है कि पार्टी अगर कांग्रेस को ज्यादा सीटें दे भी दे तो भी कांग्रेस के पास चुनाव लड़वाने के लिए उम्मीदवार नहीं हैं। इसके अलावा पार्टी के पास जरूरी संसाधन भई नहीं हैं। ऐसे में एक तरह से डीएमके ही राज्य में चुनाव लड़ती है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के नेताओं की मांग पर 2-4 सीटें ज्यादा दी जा सकती गैं लेकिन 40 सीटें और पावर शेयरिंग तो संभव नहीं है। डीएमके कांग्रेस को 4-5 सीटें देने पर तभी सोच सकती है यदि राहुल गांधी खुद इस बातचीत का हिस्सा बनें।