केरल के त्रिशूर जिले में विधानसभा की कुल 13 सीटें हैं। ये 13 सीटें त्रिशूर के अलावा अलातुर और चलाक्कुडी लोकसभा क्षेत्र में भी फैली हुई हैं। समुद्र तट पर बसा यह जिला अपने आखिरी पूर्वी छोर पर तमिलनाडु की सीमा से भी लगता है। केरल की सांस्कृतिक राजधानी वाले इस शहर पर सभी राजनीतिक दलों का जोर है और अपनी जगह बनाने में लगी भारतीय जनता पार्टी (BJP) को इसी जिले से बहुत उम्मीदें भी हैं। धर्म और कला से जुड़े अनेक आयोजनों, त्योहारों और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए मशहूर यह जिला हर साल लाखों सैलानियों को भी आकर्षित करता है।
त्रिशूर पोरम, पुलीकल्ली, कोडुनगल्लूर भरनी और बुओन नैटल में हर साल लाखों केरलवासी जुटते हैं और इन आयोजनों को देखने के लिए देश-विदेश से भी लोग जुटते हैं। कला संगीत नाटक अकादमी और केरल साहित्य अकादमी जैसे संस्थानों का केंद्र यह शहर देश की सांस्कृतिक धरोहरों को संजोने और उन्हें हर साल और बेहतर करने के लिए जाना जाता है। हर धर्म के लोगों को समायोजित करने वाला यह जिला ऐतिहासिक रूप से राजा राम वर्मा के शासन और उनकी ताजपोशी की वजह भी बना।
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पूर्व में यही जिला नंबूदरी समुदाय के लोगों के विरोध का कारण और जरिया बना। जमोरिन के खिलाफ कोचीन साम्राज्य के युद्ध का विरोध नंबूदरी ने किया। इसका नतीजा यह हुआ कि जमोरिन की सत्ता का अंत होते ही कोचीन राजघराने ने नंबूदरी का दमन करने की शुरुआत की। तब योगियात्रिपाद संस्था को खत्म कर दिया और त्रिचूर और पेरुमनम देवासम का कंट्रोल सरकार के कब्जे में हो गया। नंबूदरी योगम का अस्तित्व लगभग खत्म कर दिया। कोचीन राजघराने से जुड़ा हुआ शक्तन तंपुरन पैलेस त्रिशूर शहर में आज भी मौजूद है और इसे वडाक्करा पैलेस के नाम से जाना जाता है। साल 2005 में इसे म्यूजियम में बदल दिया गया।
लंबे समय से लेफ्ट के गढ़ रहे त्रिशूर में बीजेपी ने 2024 में बड़ा खेल कर दिया। सुरेश गोपी के यहां से लोकसभा चुनाव जीतने से बीजेपी की आंखें चमक उठीं और बाकी दलों के कैंप में खलबली मच गई है। यही वजह है कि यहां लेफ्ट के अलावा विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट (UDF) को भी जमकर पसीना बहा रहा है। वहीं, कई दलबदल के सहारे बीजेपी की कोशिश यह है कि वह इस जिले में कुछ सीटें जीतकर केरल में अपने पैर और मजबूत कर सके।
2021 में क्या हुआ था?
केरल में पांव जमाने में जुटी बीजेपी ने अपने कई बड़े नेताओं को त्रिशूर की विधानसभा सीटों से ही उतारा था। 2024 में त्रिशूर के सांसद बने सुरेश गोपी यहीं से विधानसभा चुनाव लड़े थे लेकिन उन्हें तब जीत हासिल नहीं हुई थी। जिले की कुल 13 विधानसभा सीटों में से 12 पर LDF ने जीत हासिल की थी और सिर्फ एक ही सीट पर यहां UDF को जीत मिली थी। इस बार यह जिला कई बड़े नेताओं की दलबदल का गवाह बना है, ऐसे में यह माना जा रहा है कि अबकी बार समीकरण अलग तरीके से बने हैं। अब तक यहां खाता न खोल पाई बीजेपी को भी उम्मीद है कि उसे त्रिशूर में जरूर खाता खोलने का मौका मिला है।
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विधानसभा सीटों का इतिहास
चेलक्करा- त्रिशूर जिले की यह विधानसभा सीट अलातुर लोकसभा क्षेत्र में आती है। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। साल 19996 से ही यहां मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) जीतती आ रही है। 2021 में के राधाकृष्णन यहां से चुनाव जीते थे। 2024 में वह अलातुर से सांसद बन गए और उपचुनाव हुए तो यू आर प्रदीप ने यहां से चुनाव जीता। इस बार फिर से वही यहां से उम्मीदवार हैं।
कुन्नमकुलम- त्रिशूर जिले की यह सीट भी अलातुर लोकसभा क्षेत्र में ही आती है। यहां लेफ्ट और कांग्रेस का मुकाबला होता आया है लेकिन पिछले चार चुनाव से सीपीएम ही यहां से चुनाव जीत रही है। केरल की पिनराई विजयन सरकार में मंत्री रहे ए सी मोइद्दीन यहां से लगातार दो बार चुनाव जीत चुके हैं और तीसरी बार भी मैदान में हैं।
गुरुवयूर- यह विधानसभा सीट त्रिशूर लोकसभा क्षेत्र में आती है। 2024 के लोकसभा चुनाव में त्रिशूर ही इकलौती ऐसी लोकसभा सीट थी जहां बीजेपी ने जीत हासिल कर ली थी। यही वजह है कि बीजेपी को इस क्षेत्र की विधानसभा सीटों से भी बहुत उम्मीद है। हालांकि, साल 2006 से ही यहां CPI जीतती आ रही है। यहां सीपीआई का मुकाबला इंडियन यूनियम मुस्लिम लीग से होता रहा है। 2021 में जीते एन के अकबर को ही लेफ्ट ने फिर से उतारा है। वहीं, IUML ने अपना उम्मीदवार बदल दिया है और सी एच रशीद को टिकट दे दिया है।
मनलूर- इस सीट पर लंबे समय से कांग्रेस का दबदबा रहा था लेकिन पिछले कुछ चुनावों से लेफ्ट ने यहां भी जीत हासिल करना शुरू कर दिया है। पिछले दो चुनाव से यहां सीपीएम के मारुलि पेरुनेल्ली ने जीत हासिल की है। हालांकि, लेफ्ट की ओर से इस बार सी रवींद्रनाथ को उतारा गया है। कांग्रेस ने भी अपना उम्मीदवार बदलकर टी एन प्रतापन को उतारा है।
वडक्कनचेरी- त्रिशूर जिले की यह सीट भी अलातुर लोकसभा क्षेत्र में ही आती है। यहां भी कांग्रेस और लेफ्ट के बीच जोरदार टक्कर होती आ रही है। 2011 और 206 में यहां से जीतने वाली कांग्रेस पार्टी को सीपीएम के जेवियर चित्तिलापिल्ली ने 2021 में हरा दिया था। सीपीएम ने एक बार फिर से उन्हीं को यहां से मौका दिया है।
ओल्लूर- यह सीट भी वैसी रही है जहां एक बार लेफ्ट और एक बार कांग्रेस को जीत मिला करती थी। हालांकि, पिछले दो चुनाव से सीपीआई नेता के राजन यहां से जीत हासिल कर रही है। इसी का नतीजा है कि सीपीआई ने तीसरी बार भी उन्हीं को यहां से उम्मीदवार बना दिया है।
त्रिशूर- इस सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस ने राज किया था और उसके टी रामकृ्णन लगातार पांच पार चुनाव जीते थे। हालांकि, साल 2016 में सत्ता में आए लेफ्ट ने यहां से कांग्रेस को हरा दिया था। तब सीपीआई के वी एस सुनील कुमार ने पद्मजा वेणुगोपाल को हरा दिया था। 2021 में इसी सीट से पद्मजा वेणुगोपाल फिर से उतरीं और सुरेश गोपी भी इसी सीट से चुनाव लड़े। हालांकि, सीपीआई के पी बालाचंद्रन ने यहां से चुनाव जीत लिया। इस बार पद्मजा वेणुगोपाल बीजेपी में शामिल हो गई हैं और इसी सीट से चुनाव उम्मीदवार हैं।
नट्टिका- 2008 के परिसीमन के बाद इस सीट के क्षेत्र में थोड़ा बहुत बदलाव हुआ था। इस बदलाव का फायदा सीपीआई को मिला और कांग्रेस को हराकर उसने जीत हासिल कर ली। दो बार यहां से गीता गोपी ने जीत हासिल की। 2021 में सी सी मुकुंदन को उतारा गया और उन्होंने भी जीत हासिल की। अब यहां के मौजूदा विधायक मुकुंदन बीजेपी में शामिल हो गए हैं और उसके उम्मीदवार हैं। उन्हें हराने के लिए सीपीआई ने फिर से गीता गोपी को यहां से उम्मीदवार बनाया है।
कैपामंगलम- त्रिशूर जिले की यह विधानसभा सीट चलाकुडी लोकसभा क्षेत्र में आती है। 2011 में सीपीआई के वी एस सुनील कुमार ने जीत हासिल की थी। उसके बाद दो बार सीपीआई के ही ई टी टायसन ने जीत हासिल की। सीपीआई ने इस बार के के वलसराज को उतारा है। वहीं, कांग्रेस की ओर से टीएम नजर उम्मीदवार हैं।
इरिंजलकुड़ा- इस सीट पर लगातार तीन बार से केरल कांग्रेस के थॉमस उन्नियादन जीत रहे थे लेकिन साल 2016 में सीपीआई के के यू अरुणन ने जीत हासिल कर ली थी। 2021 में सीपीआई ने उम्मीदवार बदलकर आर बिंदू को उतारा और उन्हें भी जीत मिली। आर बिंदू एक बार फिर से मैदान में हैं और यूडीएफ की ओर से केरल कांग्रेस के थॉमस उन्नियादन ही एक बार फिर से मैदान में हैं।
पुदुक्कड़- इस विधानसभा क्षेत्र में पिछले तीन चुनाव से सीपीएम को जीत हासिल हो रही है। दो बार सी रवींद्रन चुनाव जीते थे और 2021 में के के रामचंद्रन ने जीत हासिल की थी। एक बार फिर से सीपीएम ने उन्हीं पर भरोसा जताया है। बीजेपी ने एक बार फिर से एक नागेश पर दांव लगाया है।
चलाकुड़ी- यह विधानसभा क्षेत्र में चलाकुड़ी लोकसभा क्षेत्र में है। इस सीट पर 2021 में कांग्रेस को कामयाबी मिली थी और उसने लगातार तीन बार से जीत रही सीपीआई का विजय रथ रोक दिया था। यह कारनामा करने वाले टी जे सनीष कुमार जोसेफ को ही फिर कांग्रेस ने उम्मीदवार बनाया है। एलडीएफ ने केरल कांग्रेस (M) को यहां से बीजू चिरायत को उतारा है।
कोडुनगल्लूर- पिछले दो चुनाव से यहां से सीपीआई के वी आर सुनील कुमार चुनाव जीत रहे हैं। इस बार भी वह उम्मीदवार बन गए हैं। एनडीए की ओर से ट्वेटी-ट्वेंटी वर्गीज जॉर्ज उम्मीदवरा हैं। कांग्रेस ने यहां से ओ जे जनीश को अपना उम्मीदवार बनाया है।
जिले की स्थिति
क्षेत्रफल- 3032 वर्ग किलोमीटर
साक्षरता दर- 95.32%
ब्लॉक-16
विधानसभा सीटें-13
तालुक-7
पंचायत-85
विधानसभा सीटें- 13
LDF-12
UDF-1
