वायनाड जिले में विधानसभा की सिर्फ तीन सीटें हैं जबकि वायनाड लोकसभा में कुल 7 विधानसभा सीटें हैं। इसमें तीन सीटें मलप्पुरम जिले की और एक सीट कोझिकोड की है। तीनों ही सीटें ऐसी हैं जहां लंबे समय से कांग्रेस और लेफ्ट की लड़ाई चल रही है। कांग्रेस लगातार यहां अपना दावा मजबूत करने में जुटी है तो लेफ्ट की कोशिश है कि वह इस जिले को कांग्रेस के किले में तब्दील न होने दे।

 

साल 1980 में केरल को अपना यह 12वां जिला मिला। मनंतावाड़ी, सुल्तानबाथरी और व्यातिरी तालुके को मिलाकर बने इस जिले का मुख्यालय कलपेट्टा में है। नाम से ही स्पष्ट है कि यह जिला किसलिए मशहूर है। वायनाड शब्द वायल और नाडु से मिलकर बना है जिसका अर्थ है धान के खेतों की जमीन। पश्चिम घाट के पहाड़ों के बीच बसा यह जिला एक तरफ तमिलनाडु और एक तरफ कर्नाटक की सीमा से लगा हुआ है। हर तरफ पहाड़, धान के खेत और शानदार वादियां ही वायनाड की पहचान हैं।

 

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इतिहासकारों का मानना है कि नव पाषाण युग से भी इस जिले का संबंध है क्योंकि इसके पहाड़ों पर आज भी सबूत मिलते हैं। सुल्तान बाथरी और अंबालवायल में मौजूद गुफाओं पेटिंग और गुफा की दीवारें भी कई ऐतिहासिक तथ्य पेश करती हैं। पहले वेदा जनजाति और फिर कोट्टायल के राजघराने के अधीन रहे वायनाड पर बाद में हैदर अली ने भी हमला किया। एक समय पर टीपू सुल्तान ने इसे कोट्टायम राजघराने को लौटा दिया था लेकिन बाद में टीपू सुल्तान ने पूरे मालाबार क्षेत्र को ही अंग्रेजों को सौंप दिया था। इसके बाद अंग्रेजों और कोट्टायम के राजा के बाद भीषण संघर्ष भी हुआ था। बाद में कोट्टायम के राजा की लाश पाई गई थी। 

 

अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर के पर्यटकों को आकर्षित करने वाला वायनाड बीते कुछ साल में प्राकृतिक आपदाओं और गांधी परिवार की घरेलू पिच की तरह उभरा है। 2019 में राहुल गांधी इसी लोकसभा क्षेत्र से सांसद बने थे। 2024 में भी जीते लेकिन उन्होंने रायबरेली को चुन और अपनी बहन प्रियंका गांधी को इस सीट पर भेज दिया। इस क्षेत्र में जितना कुछ प्राकृतिक है, उतनी ही आपदाएं भी हैं। जंगली जानवरों के हमले, भूस्खलन और तेज बारिश के कारण होने वाली समस्याएं आम हैं। यह केरल का ऐसा क्षेत्र है जो संभवत: उन इलाकों में शामिल है जो जलवायु परिवर्तन के असर को सबसे पहले मशहूर कर रहे हैं।

 

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2021 में क्या हुआ था?

साल 2021 में वायनाड की तीन में से दो सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी और एक सीट पर लेफ्ट को जीत मिली थी। पिछले दो चुनावों से गांधी परिवार की लोकसभा सीट बन चुके वायनाड में कांग्रेस अब मजूबत स्थिति में है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी की सक्रियता ने वायनाड के साथ-साथ पूरे केरल में कांग्रेस को अलग माहौल दे दिया है। कांग्रेस की एक चिंता यहां की मनंतावाडी सीट है। इस सीट पर पिछले दो चुनाव से जे के जयलक्ष्मी जैसी नेता चुनाव नहीं जीत पा रही हैं जबकि वह इसी सीट से विधायक और केरल की सरकार में मंत्री रह चुकी हैं।


विधानसभा सीटों का इतिहास

 

 साल 2021 में कलपेट्टा सीट पर कांग्रेस ने 15 साल के बाद वापसी की। इससे पहले कांग्रेस पार्टी इस सीट पर आखिरी चुनाव 2001 में जीती थी और के के रामचंद्रन 2006 तक यहां के विधायक रहे। उसके बाद सोशलिस्ट जनता पार्टी के टिकट पर दो बार एम वी श्रेयसम कुमार चुनाव जीतते रहे। 2016 में सीपीआई के सी के सशींद्रन ने जीत हासिल की थी। 2021 में कांग्रेस के सामने यहां शरद यादव की नई नवेली पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल ने अपना उम्मीदवार उतारा था। बीजेपी ने सुबीश टी एम को टिकट दिया था लेकिन कांग्रेस ने यहां से आसानी से जीत हासिल कर ली और दो बार विधायक रहे एम वी श्रेयमस कुमार फिर से चुनाव हार गए। यहां से कांग्रेस के टी सिद्दीकी मौजूदा विधायक हैं।

 

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अलग-अलग वजहों से चर्चा में रहने वाली सुल्तान बाथरी विधानसभा सीट पिछले तीन चुनाव से कांग्रेस का मजबूत गढ़ बन गई है। 2011 से लगातार आई सी बालाकृष्णन यहां से चुनाव जीत रहे हैं। पिछले तीनों चुनावों में यहां से सीपीएम ने कांग्रेस को चुनौती दी लेकिन उसे यहां कामयाबी नहीं मिली।

 

तीसरी विधानसभा सीट मनंतावाडी है। ज्यादा ST आबादी वाली इस सीट पर 1970 से 2006 तक कांग्रेस का कब्जा था लेकिन 2006 में सीपीआई के के सी कुन्हीरामन ने कांग्रेस को हरा दिया। 2011 में कांग्रेस ने फिर वापसी की लेकिन केरल की सत्ता की तरह ही 2016 और 2021 में सीपीआई ने यहां जीत हासिल की। सीपीआई के ओ आर केलू दो बार से यहां के विधायक हैं। उन्होंने दोनों बार पी के जयलक्ष्मी को हराया है। यही पी के जयलक्ष्मी केरल की सरकार में मंत्री भी रह चुकी हैं।

 

जिले की स्थिति-
क्षेत्रफल-2132 वर्ग किलोमीटर
विधानसभा क्षेत्र-3
ग्राम पंचायत-23
नगर पालिका-3
साक्षरता दर- 89.03%

 

विधानसभा सीटें- 3
UDF-2
LDF-1