पश्चिम बंगाल के सबसे उत्तरी छोर पर बांग्लादेश की सीमा से सटा उत्तर दिनाजपुर जिला है, जो राज्य में आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक नजरिए से काफी अहम जिला है। यह जिला 1 अप्रैल 1992 को पूर्वी दिनाजपुर को विभाजित करके बनाया गया था। 3142 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस जिले की सीमा पूर्व में पूर्व में बांग्लादेश, पश्चिम में बिहार, उत्तर में दार्जिलिंग–जलपाईगुड़ी जिले और दक्षिण में मालदा जिले से लगती है। इस जिले की जमीन काफी उपजाऊ और महानंदा जैसी नदियों के पानी का इस्तेमाल सिंचाई के लिए होता है। प्राचीन समय में यह क्षेत्र पुंड्र साम्राज्य का हिस्सा था और बाद में मौर्य, गुप्त, पाला, सेना, खिलजी, मुगलों का शासन रहा और उसके बाद अंग्रेजों ने यहां राज किया।
अंग्रेजों के राज में यह जिला कई ऐतिहासिक घटनाओं का केंद्र रहा। साल 1905 में बंगाल विभाजन के खिलाफ यहां जमकर प्रदर्शन हुए थे। हालांकि, आजादी के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए बंटवारे में दिनाजपुर जिले का बंटवारा भी हुआ। इस जिले का पश्चिमी क्षेत्र भारत के पास रहा। मौजूदा उत्तर दिनाजपुर जिला 1 अप्रैल 1992 में बना। उत्तर दिनाजपुर, सड़क और रेलमार्गों के जरिए राज्य के बाकी हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
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सामाजिक सरंचना
साल 2011 की जनगणना के अनुसार, उत्तर दिनाजपुर की आबादी 30,07,134 है। इस जिले की साक्षरता दर 59.1 प्रतिशत है और यहां पर मुख्य रूप से बंगाली भाषा ही बोली जाती है। इसके साथ ही सूरजपुरी, उर्दू, संताली और हिन्दी भी बोली जाती है। धार्मिक रूप से देखें तो इस जिले में हिंदू और मुस्लिम आबादी लगभग एक समान है। मुस्लिम आबादी यहां 49.92 प्रतिशत है और हिंदू आबादी 49.31 प्रतिशत है। इस जिले को मुख्य रूप से इसकी ग्रामीण संस्कृति के लिए जाना जाता है।
धार्मिक-सांस्कृतिक स्थल
उत्तर दिनाजपुर में कई ऐतिहासिक मंदिर-मस्जिद हैं। स्वामीनाथ मंदिर, रायबाड़ी या राजबाड़ी), इटाहर का शिव मंदिर, चंदिग्राम का दानसोरी पीठस्थल, बौआह का मां भवानी देवी थान, महाराजहाट का सिद्धि विनायक मंदिर, बिंदोल का भोइराई मंदिर इत्यादि चर्चित हैं। जिले में कुलिक पक्षी अभ्यारण्य (रायगंज) एशिया का दूसरा सबसे बड़ा पक्षी अभयारण्य है। लगभग 1758 में बनी रागांज के उस इलाके का पीरपुकर दरगाह भी ऐतिहासिक स्थान है।
राजनीतिक स्थिति
उत्तर दिनाजपुर में अभी विधानसभा स्तर पर तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख है, जबकि भाजपा की पकड़ भी बढ़ रही है। इस जिले में तीन लोकसभा सीटें हैं जिनमें से एक पूर्ण रूप से इसी जिले में है और अन्य दो आंशिक रूप से इस जिले को कवर करती हैं। इसके अलावा इस जिले में 9 विधानसभा की सीटें हैं, जिनमें चोपड़ा, इस्लामपुर, गोलपोखर, चाकुलिया, करनदीघी, हेमताबाद (SC), कालियागंज (SC), रायगंज शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर सीटें (कुल 7) रायगंज लोकसभा क्षेत्र में आती हैं। इसके अलावा दार्जिलिंग लोकसभा क्षेत्र में चोपड़ा विधानसभा क्षेत्र और बालुरघाट लोकसभा क्षेत्र में इटाहार विधानसभा आती है।
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विधानसभा सीटों का इतिहास
इस जिले की विधानसभा सीटों पर कुछ सीटों को लगातार पारंपरिक नेता जीतते रहे हैं। जैसे चकुलिया विधानसभा सीट पर 2011 से लगातार मिन्हाजुल अरफिन आजाद का दबदबा रहा है। इसी तरह इस्लामपुर सीट पर अब्दुल करीम चौधरी भी लंबे समय से विधायक हैं। वह 1967 से इस सीट पर सक्रिय हैं और पहले कांग्रेस और अब टीएमसी के टिकट पर जीत दर्ज कर रहे हैं। करंदीघाट और कैलीआगंज (SC) सीटें पहले लेफ्ट के पास थीं लेकिन 2011 के बाद से इन सीटों पर टीएमसी का दबदबा रहा और उसके बाद दोनों सीटें बीजेपी ने जीत लीं। संक्षेप में कहें तो इस जिले में मौजूदा समय में टीएमसी का पलड़ा भारी रहा है लेकिन भारतीय जनता पार्टी भी कड़ी चुनौती दे रही है।
2021 के नतीजे
- गोलपोखर विधानसभा - 2021– मोहम्मद गुलाम रब्बानी (TMC)
- हेमताबाद विधानसभा (SC)- 2021– सत्यजीत बर्मन (TMC)
- इस्लामपुर विधानसभा- 2021– अब्दुल करीम चौधरी (TMC)
- करणदिघी विधानसभा- 2021– गौतम पॉल (TMC)
- चोपरा विधानसभा -2021– हमीदुल रहमान (TMC)
- रायगंज विधानसभा -2021– कृष्णा कल्यानी (BJP)। 2024 में हुए उपचुनाव में कृष्णा कल्याणी ने TMC के टिकट पर जीत दर्ज की।
- ईटाहार विधानसभा -2021– मुसर्रफ हुसैन (TMC)
- चकुलिया विधानसभा-2021– मिन्हाजुल आरफीन आजाद (TMC)
- कालियागंज विधानसभा (SC)-2021– सौमेन रॉय (BJP)
2024 लोकसभा के नतीजे
- रायगंज लोकसभा - कार्तिक चंद्र पॉल (BJP)
- दार्जिलिंग लोकसभा- राजू बिस्टा(BJP)
- बालुरघाट - डॉ. सुकांत मजूमदार (BJP)
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जिले की स्थिति
- क्षेत्रफल- 3142 वर्ग किलोमीटर
- जनसंख्या- 30,07,134
- साक्षरता दर- 59.1 प्रतिशत
- विधानसभा सीटें- 9 (मैजूदा स्थिति 8 TMC, BJP-1)
- लोकसभा क्षेत्र- 3 (दार्जिलिंग, रायगंज, बालुरघाट) TMC-0 और BJP-3
