असम में सत्ता में वापसी के लिए पसीना बहा रही है कांग्रेस आखिरकार एक ऐसा गठबंधन करने में सफल हुई है जिसके लिए 5 साल से ज्यादा समय लग गया। असम कांग्रेस के अध्यक्ष गौरव गोगोई ने एलान किया है कि अखिल गोगोई का रायजोर दल अब कांग्रेस के साथ आ गया है। रोचक बात है कि 2021 के चुनाव में भी इन दोनों दलों के बीच बातचीत चल रही थी लेकिन आखिरी वक्त में मामला बिगड़ गया। इस बार भी बात बिगड़ती दिख रही थी लेकिन आखिरी वक्त में सब ठीक होता दिख रहा है। दोनों ही दल एक-दूसरे की अहमियत समझ रहे हैं लेकिन यह फैसला कांग्रेस के लिए बेहद अहम बताया जा रहा है।

 

हाल के दिनों में दो बड़े नेता भूपेन बोरा और प्रद्युत बोरदोलोई कांग्रेस छोड़कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में जा चुके हैं। लगातार दो बार से असम में विधानसभा चुनाव हार रही कांग्रेस को वैसे भी प्रबल दावेदार नहीं माना जा रहा था। ऐसे में इन दोनों नेताओं का जाना पार्टी के लिए बड़ा झटका था। ऐसा लग रहा था कि बिहार जैसा हाल असम में होगा और जिन लोगों से बातचीत हो रही है, उनसे भी गठबंधन नहीं हो पाएगा। हालांकि, लेफ्ट के कुछ दलों के साथ रायजोर दल के भी आने से अब कांग्रेस की स्थिति थोड़ी बेहतर मानी जा रही है और इसके लिए गौरव गोगोई की तारीफ भी की जा रही है।

 

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गौरव गोगोई ने माना 2021 में हुई चूक

 

अब रायजोर दल और कांग्रेस के गठबंधन का एलान करते हुए गौरव गोगोई ने कहा, 'हमने 2021 में सपना देखा था कि असम जातीय परिषद, रायजोर दल और कांग्रेस एक साथ हों। एकसाथ नहीं हुए तो सबका नुकसान हुआ। इस बार लोग हमें एकसाथ देखना चाहते हैं इसलिए हम सबने बहुत त्याग और बलिदान किया है। इस बार हमारे साथ सीपीआई-एम, सीपीआई-एमएल और एपीएचएलसी भी शामिल हो गए हैं। मैं अब भी उन दलों से अनुरोध करता हूं कि आइए एक शांतिपूर्ण असम के लिए साथ आएं और हिमंत बिस्व सरमा की सरकार को विदाई दें।'

 

2021 में क्या हुआ था?

CAA विरोधी लहर के बीच असम में अखिल गोगोई प्रमुख चेहरा बनकर उभरे थे। उनकी जबरदस्त लोकप्रियता थी और इसी के सहारे वह जेल से भी चुनाव जीतने में कामयाब रहे थे। हालांकि, तमाम कोशिशों के बावजूद रायजोर दल, असम जतिया परिषद और कांग्रेस साथ नहीं आ पाए थे। नतीजा यह हुआ था कि बीजेपी ने बंपर बहुमत हासिल किया था और कांग्रेस सिर्फ 29 सीटें ही जीत पाई थी। तब उसके सहयोगी रहे AIUDF को 16 सीटों पर जीत मिली थी। 126 विधानसभा सीटों वाले असम में बीजेपी ने अकेले 60 सीटों पर जीत हासिल की थी और उसके सहयोगी असम गण परिषद को 9 सीटें मिली थीं।

 

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उस चुनाव में 12 सीटें ऐसी थीं जिन पर असम जतिया परिषद (AJP) और रायजोर दर (RD) के वोट मिलाकर बीजेपी गठबंधन के वोट से ज्यादा थे। इसी के चलते चुनाव के बाद कांग्रेस ने इन दलों पर वोट काटने के आरोप लगाए थे। बाद में यही बात हिमंत बिस्व सरमा ने एक इंटरव्यू में कही थी कि वह भी चाहते थे कि AJP और RD का गठबंधन हो ताकि CAA विरोधी लोगों के वोट बंट जाएं।

अब कैसा है कांग्रेस वाला गठबंधन?

 

126 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस खुद 101 सींटो पर लड़ रही है। कांग्रेस अभी तक 87 उम्मीदवारों के नाम का एलान भी कर चुकी है। रायजोर दल को 11, लुरिनजोत गोगोई के असम जतिया परिषद को 10, सीपीएम और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस को 2-2 सीटें दी गई हैं।

कौन हैं अखिल गोगोई?

 

असम की शिवसागर विधानसभा सीट से विधायक अखिल गोगोई जोरहाट के रहने वाले हैं। वही जोरहाट जहां से गौरव गोगोई चुनाव लड़ने जा रहे हैं। गुवाहाटी के कॉटन कॉलेज से पढ़कर निकले अखिल गोगोई छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय रहे हैं। सीपीआई-एमएल से जुड़े यूनाइटेड रेवॉल्यूशनरी मूवमेंट काउंसिल ऑफ असम (URMCA) से जुड़े रहे अखिले गोगोई सबसे ज्यादा चर्चा में तब आए जब वह साल 2020 सिटिजनशिप अमेंडमेंट ऐक्ट (CAA) विरोधी आंदोलन में उतरे। उसी साल उन्होंने अपनी पार्टी रायजोर दल का गठन भी किया।

 

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CAA विरोधी प्रदर्शनों में अहम भूमिका निभाने वाले अखिल गोगोई को दिसंबर 2019 में UAPA के तहत गिरफ्तार कर लिया गया था। जुलाई 2021 में NIA कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और वह जेल से बाहर आए। हालांकि, जेल से बाहर आने से पहले ही वह शिवसागर विधानसभा सीट से चुनाव लड़कर विधायक बन चुके थे। वह निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़े थे।