रणवीर सिंह की फिल्म धुरंधर ने दुनिया भर में 1,300 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई कर ली है। ब्लॉकबस्टर का असर सिर्फ बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं रहा है। मल्टीप्लेक्स कंपनियों की बैलेंस शीट, फूड कोर्ट और पॉपकॉर्न काउंटर को इससे सबसे ज्यादा मुनाफा हुआ है। दिसंबर में पीवीआर का मुनाफा दोगुने से अधिक बढ़ गया है।

 

दिसंबर में पीवीआर इनॉक्स बढ़कर 95.4 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पिछले साल यह 35.5 करोड़ रुपये था। पीवीआर इनबॉक्स 9.46 प्रतिशत से बढ़कर 1,879.8 करोड़ रुपये पहुंच गया है। ‘धुरंधर’ 5 दिसंबर को रिलीज हुई थी। इसके बावजूद फुटफॉल 8.6 प्रतिशत से बढ़कर 4.05 करोड़ दर्शकों तक पहुंच गया है। 

सामान्य तौर पर टिकट बिक्री से होने वाली आय का बड़ा हिस्सा प्रोडूसर और डिस्ट्रीब्यूटर के साथ शेयर किया जाता है। फूड एंड बेवरेज (F&B) से होने वाली कमाई का अधिकांश भाग थिएटर मालिकों के पास ही रहता है। मल्टीप्लेक्स की टोटल इनकम  में 25–35 प्रतिशत हिस्सा F&B का होता है और मार्जिन टिकट की तुलना में काफी अधिक होता है।

 

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टिकट से ज्यादा फूड एंड बेवरेज की कमाई

‘धुरंधर’ के दौरान पीवीआर इनॉक्स का स्पेंड पर हेड (SPH) तेजी से बढ़ा है। कुछ महीनो में यह 146 रुपये रहा जो पिछले साल 140 रुपये था। पीक शोज के दौरान SPH 190 से 200 रुपये तक पहुंच गया है। कंपनी के सीईओ गौतम दत्ता ने बताया कि फिल्म की चार घंटे की अवधि के कारण इंटरवल में दर्शक ज्यादा भूखे महसूस कर रहे थे, जिससे स्नैक्स की बिक्री बढ़ी है।

दूसरे मल्टीप्लेक्स पर भी असर

सफलता सिर्फ पीवीआर इनॉक्स तक सीमित नहीं है। दूसरे मल्टीप्लेक्स चेन ने भी फूड और बेवरेज बिक्री में बहुत कमाई की है। मिराज सिनेमा ने दिसंबर में 13 करोड़ रुपये की F&B दर्ज की है। रूंगटा सिनेमा ने अपने चार प्रॉपर्टीज से लगभग 65 लाख रुपये कमाए है। रूंगटा सिनेमा के सीईओ संजय बरजात्या के अनुसार, ‘धुरंधर’ में फुटफॉल और स्नैक बिक्री शुरुआत से ही मजबूत रहा है। 

 

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ओपनिंग वीकेंड और वीकडे ट्रैफिक

मास एंटरटेनर फिल्मों के ओपनिंग वीकेंड पर कंसेशन रेवेन्यू वीकेंड की तुलना में 25–40 प्रतिशत तक बढ़ जाता है। ‘धुरंधर’ ने भी यही ट्रेंड दोहराया है। हाउसफुल शोज के कारण प्री-मूवी डाइनिंग, पोस्ट-मूवी ग्रुप डिनर और मॉल फूड कोर्ट में भीड़ बढ़ी है। टियर-2 और टियर-3 शहरों में रिपीट व्यूइंग ने वीकडे ट्रैफिक को भी बनाए रखा है। जिससे कैफे, क्यूएसआर चेन और सिंगल स्क्रीन के आसपास के स्ट्रीट वेंडर्स को फायदा हुआ है।

पॉपकॉर्न की अहम भूमिका

सिनेमा अर्थव्यवस्था में पॉपकॉर्न केंद्रीय भूमिका निभाता है। इसे तैयार करना सस्ता है, स्टोरेज करना आसान है और हाई प्रॉफिट मार्जिन पर बेचा जाता है। 31 दिसंबर तक ‘धुरंधर’ ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 844 करोड़ रुपये कमाए है, जिसमें अकेले पीवीआर इनॉक्स का योगदान 328 करोड़ है। हाई रिटेल होने से पॉपकॉर्न और स्नैक्स की बिक्री लगातार बढ़ रही है। 

 

भारत में पॉपकॉर्न बाजार 2024 में 366.6 मिलियन डॉलर था। बताया जा रहा है 2030 तक 12.57 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़कर 662.7 मिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

 

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आगे की उम्मीदें

‘धुरंधर’ ने दिखाया कि एक ब्लॉकबस्टर फिल्म सिर्फ प्रोडूसर्स या कलाकारों को नहीं, बल्कि पूरे वीकेंड इकोनॉमी को अच्छा करती है। 2026 में ‘धुरंधर 2’, ‘किंग’, ‘रामायण पार्ट 1’ और ‘दृश्यम 3’ जैसी बड़ी फिल्मों रिलीज होगी। मल्टीप्लेक्स इंडस्ट्री को उम्मीद है कि आने वाला साल भी ऐसा हो सकता है, जहां कहानी जितनी मजबूत होगी, पॉपकॉर्न की बिक्री उतनी ही अहम साबित होगी।