डायरेक्टर नीरज पांडे की फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ के नाम को लेकर विवाद गहरा गया है। दरअसल, ब्राह्मण समाज के लोगों का मानना है कि इस नाम के जरिए उनके समाज को निशाना बनाया जा रहा है, इसी वजह से फिल्म का विरोध किया जा रहा है। इस मामले में उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी बयान देते हुए कहा है कि यह फिल्म यूपी में रिलीज नहीं कराना चाहिए। 

 

पूरे विवाद को देखते हुए फिल्म के मुख्य किरदार निभाने वाले अभिनेता मनोज बाजपेयी ने भी सफाई दी है। उन्होंने अपने एक्स अकाउंट पर कहा कि फिल्म में जल्द से जल्द जरूरी बदलाव किए जाएंगे। ट्वीट में उन्होंने घूसखोर पंडित को लेकर कुछ अहम बातें भी शेयर की हैं।

 

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फिल्म का विरोध

फिल्म को लेकर प्रयागराज, इंदौर और देश के कई राज्यों में विरोध-प्रदर्शन हुए हैं। शुक्रवार को प्रयागराज में लोगों ने फिल्म के विरोध में प्रदर्शन किया, जहां फिल्म निर्माता नीरज पांडे और अभिनेता मनोज बाजपेयी के पुतले जलाए गए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि फिल्म को रिलीज न किया जाए। उनका आरोप है कि इस फिल्म के जरिए हिंदुओं और ब्राह्मण समुदाय को निशाना बनाया जा रहा है।


इसी तरह इंदौर में मनोज बाजपेयी का पुतला जलाया गया। पशुराम सेना ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की और धमकी भी दी। एक प्रदर्शनकारी ने कहा, 'हम इस फिल्म का विरोध करते हैं। इस पर प्रतिबंध लगना चाहिए, वरना मनोज बाजपेयी और नीरज पांडे के चेहरे पर कालिख पोत दी जाएगी। हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सेंसर बोर्ड से इस फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं।'

 

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उपमुख्यमंत्री का बयान

फिल्म विवाद में अब उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पांडे ने कहा, 'फिल्म उद्योग से जुड़े लोग जिस तरह भारतीय संस्कृति और विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय को निशाना बना रहे हैं, वह बेहद निंदनीय है। ऐसी फिल्में जनता के सामने रिलीज नहीं होनी चाहिए। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूं।'

मनोज बाजपेयी की सफाई

फिल्म से जुड़े विवाद को देखते हुए अभिनेता मनोज बाजपेयी ने अपनी ओर से सफाई दी। उन्होंने लोगों की भावनाओं के प्रति सहानुभूति जताते हुए फिल्म में उचित बदलाव की बात कही है। उन्होंने कहा, 'लोगों की भावनाओं और चिंताओं का मैं सम्मान करता हूं और उन्हें गंभीरता से लेता हूं। जब आप किसी ऐसी चीज का हिस्सा होते हैं जिससे कुछ लोगों को ठेस पहुंचती है, तो यह आपको रुककर उनकी बात सुनने के लिए मजबूर करता है। एक अभिनेता के रूप में, मैं किसी फिल्म में अपने किरदार और कहानी के जरिए ही प्रवेश करता हूं। इस फिल्म का उद्देश्य किसी भी समुदाय के बारे में कोई टिप्पणी करना नहीं है।'

 

 

 

 

उन्होंने आगे कहा, 'नीरज पांडे के साथ काम करने के अपने अनुभव में मैंने हमेशा उन्हें गंभीर और सावधान फिल्मकार के रूप में पाया है। जनता की भावनाओं को देखते हुए फिल्म निर्माताओं ने प्रचार सामग्री हटाने का फैसला किया है। यह दर्शाता है कि इन चिंताओं को कितनी गंभीरता से लिया जा रहा है।'