बॉलीवुड एक्ट्रेस दीपिका पादुकोण ने मां बनने के बाद फिल्मों में काम करने के लिए 8 घंटे की शिफ्ट की मांग रखी थी। दीपिका का मानना है कि वर्क-लाइफ बैलेंस बनाए रखने के लिए यह जरूरी है। इसी मुद्दे पर हाल ही में कुणाल खेमू ने अपनी राय शेयर की जिसके बाद इंटरनेट पर उन्हें काफी ट्रोल किया जा रहा है और लोग उन्हें 'मिसॉजनिस्ट'(Misogynist) कह रहे हैं।
सोहा अली खान के पॉडकास्ट पर बातचीत करते हुए कुणाल ने कहा कि कोई भी व्यक्ति कम काम करके ज्यादा पैसों की उम्मीद नहीं कर सकता। उन्होंने तर्क दिया कि अगर किसी को काम के घंटों पर इतना ही कंट्रोल चाहिए तो उसे खुद प्रोड्यूसर बनकर अपना पैसा लगाना चाहिए। कुणाल ने आगे कहा कि प्रेग्नेंसी का 9 महीने का समय एक 'इनक्यूबेशन पीरियड' की तरह होता है। जिसे सही तरीके से प्लान किया जा सकता है। उनके मुताबिक अगर कोई मां बनने का फैसला करता है, तो उसे अपनी करियर प्लानिंग इस तरह करनी चाहिए कि उससे दुनिया या इंडस्ट्री का काम प्रभावित न हो। उन्होंने इसे केवल महिला या पुरुष का मुद्दा न मानकर एक 'माइंडसेट' की बात बताया।
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सोशल मीडिया पर कुणाल का विरोध
जैसे ही कुणाल का यह बयान रेडिट (Reddit) और बाकी प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हुआ तो लोगों ने उन्हें जमकर ट्रोल करना शुरू कर दिया। यूजर्स का कहना है कि प्रेग्नेंसी को 'ग्रुप प्रोजेक्ट' की तरह प्लान नहीं किया जा सकता और एक पिता होने के नाते उन्हें ऐसी बात नहीं करनी चाहिए थी। कुछ लोगों ने अजय देवगन और अक्षय कुमार जैसे सितारों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब पुरुष एक्टर्स अपनी शर्तों पर 8 घंटे काम करते हैं यह संडे को छुट्टी लेते हैं, तब कोई सवाल नहीं उठाता लेकिन जब एक महिला मां बनने के बाद यही मांग करती है। तब लोग उसे 'अनप्रोफेशनल' कहा जाता है।
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इस विवाद की जड़ें दीपिका के उन फैसलों से जुड़ी हैं जहां उन्होंने अपनी शर्तों की वजह से कुछ बड़े प्रोजेक्ट्स छोड़ दिए। रिपोर्टर्स के अनुसार दीपिका ने संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म 'स्पिरिट' और 'कल्कि 2898 AD' के सीक्वल से इसलिए हाथ खींच लिए क्योंकि वह दिन में 8 घंटे से ज्यादा काम नहीं करना चाहती थीं। उन्होंने अपनी फीस में बढ़ोतरी और प्रॉफिट शेयरिंग की भी मांग की थी। मेकर्स के साथ इन शर्तों पर सहमति न बन पाने के कारण उन्हें इन फिल्मों से बाहर होना पड़ा जिसके बाद इंडस्ट्री में वर्क कल्चर को लेकर यह बहस तेज हो गई।
