अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के लिए युद्ध विराम लग गया है। अब इस युद्ध पर स्थायी रोक के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में वॉशिंगटन और तेहरान समाधान के लिए बातचीत करेंगे। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अपने ट्रुथ सोशल प्लेटफॉर्म पर जंग में इस्तेमाल की गई टेक्नोलॉजीज की तारीफ की।
उन्होंने 'पैलंटिर टेक्नोलॉजीज' की तारीफ करते हुए कहा, 'सॉफ्टवेयर कंपनी ने साबित कर दिया है कि उसके पास जंग लड़ने की बेहतरीन क्षमताएं और हथियार हैं। बस हमारे दुश्मनों से पूछो।'
कैसे काम करती है पैलंटिर टेक्नोलॉजीज?
पैलंटिर टेक्नोलॉजीज कंपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए ईमेल लिखने से लेकर युद्ध के दौरान कई तरीके से काम करती है। ईरान युद्ध दुनिया का पहला ऐसा बड़ा युद्ध माना जा रहा है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने रियल टाइम में मिलिट्री ऑपरेशन को सीधे प्रभावित किया।
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इसके केंद्र में वह सॉफ्टवेयर कंपनी है जिसके बारे में बहुत कम लोगों ने सुना है। 28 फरवरी को ईरान पर बम गिरने से पहले अमेरिका के इशारों पर एक सॉफ्टवेयर ने अमेरिकी सेना के लिए एक हजार से ज्यादा हमले के तरीके तैयार करने के लिए सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन फुटेज के पहाड़ों को छान मारा था।
अमेरिकी सेना की मदद की
यह ऐसा काम था, जिसे अमेरिकी सेना को करने में कई दिन लग सकते थे। इस काम को कंपनी मिनटों में कर दिया। इस काम के पीछे पैलंटिर टेक्नोलॉजीज का मेवेन स्मार्ट सिस्टम (MSS) था, जो एंथ्रोपिक के बनाए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म क्लाउड पर चलता है। मेवेन स्मार्ट सिस्टम अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का AI-पावर्ड, AI-इनेबल्ड कमांड और कंट्रोल सिस्टम है। इससे युद्ध के दौरान सैन्य-तंत्र और टारगेटिंग के लिए बहुत सारे सेंसर, वीडियो और इमेजरी डेटा को सेना को दिया जा सकता है।
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पहली बार हुआ बड़े वॉर में इस्तेमाल
इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अमेरिका ने हाल ही में वेनेज़ुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को किडनैप करने के लिए किया। इससे पहले इसका इस्तेमाल काउंटर-टेररिज्म के लिया किया जाता रहा है। मगर, वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहली बार है जब इसका इस्तेमाल बड़े वॉर ऑपरेशन में किया गया है। इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल अमेरिकी सेना अब रोजाना करती है।
यह AI सॉफ्टवेयर सेना के अधिकारियों को सेकंडों में बहुत सारी जानकारी दे देता है, जो उनके लिए बढ़त बनना में मदद करता है। इससे अमेरिका को दुश्मन के खिलाफ तेजी से स्मार्ट फैसले लेने में मदद मिलती है।
