बांग्लादेश में अब तारिक रहमान का दौर शुरू होने वाला है। 12 फरवरी 2026 को हुए आम चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने भारी बहुमत हासिल की है। यह चुनाव पिछले साल 2024 में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद बेहद अहम माना जा रहा था। देशव्यापी आंदोलनों के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटा दिया था। प्रदर्शनों में सैकड़ों लोग मारे गए थे और महीनों तक अशांति रही।

BNP ने 300 सदस्यीय संसद में 209 सीटें जीत ली हैं। यह दो-तिहाई बहुमत है। पार्टी अकेले ही सरकार बना सकती है। BNP के नेता तारिक रहमान, खालिदा जिया के बेटे हैं। अब वह बांग्लादेश के नए प्रधानमंत्री बनने वाले हैं। तारिक रहमान 17 साल के निर्वासन के बाद हाल ही में देश लौटे थे। तारिक रहमान की मां खालिदा जिया की मौत हो चुकी है। बीते साल दिसंबर में लंबी बीमारी के बाद उनका निधन हो गया। 

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जमात-ए-इस्लामी का क्या हुआ?

BNP की मुख्य प्रतिद्वंद्वी जमात-ए-इस्लामी और उसके गठबंधन को सिर्फ 68 सीटें मिली हैं। शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया था। उनकी पार्टी, चुनाव में हिस्सा नहीं ले सकी। युवाओं की नई पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) ने साल 2024 के विरोध प्रदर्शन में अहम भूमिका निभाई थी लेकिन इस पार्टी को 30 में से सिर्फ 5 सीटों पर जीत मिली है। 

 

NCP खुद को दक्षिणपंथी और सुधारवादी बताती थी, लेकिन उसे ज्यादा वोट नहीं मिले। बाद में उसने जमात-ए-इस्लामी के साथ गठबंधन किया, जिससे कई लोगों को निराशा हुई। चुनाव के साथ ही एक संवैधानिक जनमत संग्रह भी हुआ। इसमें संविधान में बड़े बदलावों लोगों ने वोट किया।

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रेफरेंडम में किन मुद्दों पर वोट हुआ?

  • चुनाव के समय तटस्थ अंतरिम सरकार बनाना
  • संसद को दो सदनों में बदलना
  • प्रधानमंत्री के लिए दो कार्यकाल की सीमा
  • महिलाओं की ज्यादा भागीदारी
  • न्यायपालिका को मजबूत और स्वतंत्र बनाना

जनमत संग्रह भी आसानी से पास होने की उम्मीद है। शुरुआती रिपोर्ट्स में यह जानकारी सामने आई है कि 20 लाख से ज्यादा लोगों ने जनमत संग्रह पर  हां कहा है। 

जीत के बाद कोई रैली नहीं होगी 

BNP ने जीत की घोषणा कर दी है और कहा है कि कोई विजय रैली नहीं होगी। इसके बजाय शुक्रवार की विशेष नमाज पढ़ने की अपील की गई है। तारिक रहमान ने अभी तक सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहा है। पार्टी ने सोशल मीडिया पर जीत का ऐलान किया है। यह चुनाव बांग्लादेश के लिए ऐतिहासिक है, क्योंकि 17 साल बाद ऐसे चुनाव हुए हैं। 

बांग्लादेश चुनाव पर आपके हर सवाल का जवाब

बांग्लादेश में 299 निर्वाचन क्षेत्रों में 42,779 मतदान केंद्रों पर करीब 12.7 करोड़ मतदाताओं ने वोट किया है। इनमें से 50 लाख पहली बार के मतदाता हैं। कुल 50 राजनीतिक दलों के कुल 1,755 उम्मीदवार और 273 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। बीएनपी ने सबसे अधिक 291 उम्मीदवार उतारे थे। चुनाव में 83 महिला उम्मीदवार थीं। दशकों में यह बांग्लादेश का पहला चुनाव है जिसमें कोई महिला नेता सुर्खियों में नहीं है। शेख हसीना को चुनाव लड़ने से रोक दिया गया और उनकी कट्टर प्रतिद्वंद्वी खालिदा जिया की लंबी बीमारी के बाद दिसंबर में मृत्यु हो गई। दोनों महिलाओं ने करीब चार दशकों तक देश की राजनीति पर दबदबा बनाए रखा।

 

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हिंसा के बीच हुआ था चुनाव

कई जगहों से चुनावी हिंसा की खबरें आईं। गोपालगंज में बम हमले में 13 वर्षीय लड़की सहित तीन लोग घायल हो गए। एक अन्य घटना में मुंशीगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र के एक मतदान केंद्र के बाहर सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए, जिससे मतदान अस्थाई रूप से बाधित हो गया। खुलना में एक मतदान केंद्र के बाहर जमात-ए-इस्लामी कार्यकर्ताओं के साथ झड़प के दौरान एक बीएनपी नेता की मौत हो गई।

चुनाव कैसे कराए गए?

करीब 81 स्थानीय संगठनों के 55,454 पर्यवेक्षकों ने चुनाव की निगरानी की, जबकि विदेशी चुनाव पर्यवेक्षकों की संख्या 394 रही। अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों में से 80 विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संगठनों की तरफ से हैं, जबकि बाकी अलग-अलग देशों से हैं, जिनमें स्वतंत्र यूरोपीय पर्यवेक्षक भी शामिल हैं।

कहीं कैप्चरिंग की कोशिश, कहीं हिंसक झड़प

इत्तेफाक अखबार की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उत्तर पश्चिमी जॉयपुरहाट के कलाई इलाके में एक पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच मतपत्रों की फोटोकॉपी वितरित करने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया। डेली स्टार की एक रिपोर्ट बताती है कि उत्तर पूर्व सिलहट के बालागंज में बैलेट पेपर की हेराफेरी के आरोपों में जमात और बीएनपी कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हुई।

एक स्थानीय जमात नेता और कई अन्य लोग आधी रात के आसपास एक मतदान केंद्र में घुस गए तभी बीएनपी कार्यकर्ताओं ने उन पर धावा बोल दिया। खूब हिंसा हुई। राजधानी ढाका में पुलिस ने वोट खरीदने के आरोप में एक जमात नेता को गिरफ्तार किया, जबकि मतदान से कुछ घंटे पहले दक्षिण-पश्चिमी गोपालगंज में सात मतदान केंद्रों के पास देसी बम विस्फोट हुए।