logo

ट्रेंडिंग:

बांग्लादेश में आज हो रहे हैं चुनाव, भारत की नजरें क्यों टिकी हुई हैं?

शेख हसीना के तख्तापलट के बाद बांग्लादेश आज नई दिशा में आगे बढ़ने जा रहा है और अपनी नई सरकार चुनने के लिए वोट डाल रहा है। भारत की नजरें इन चुनावों पर टिकी हुई हैं।

tarique rahman and shafiqur rahman

तारिक रहमान और शफीकुर रहमान, Photo Credit: Social Media

शेयर करें

संबंधित खबरें

Advertisement
Group2

बांग्लादेश में हुए तख्तापलट के लगभग डेढ़ साल बाद आज चुनाव हो रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने भारत में शरण ले रखी है और लंबे समय से दूसरे देश में रह रहे तारिक रहमान (पूर्व पीएम खालिदा जिया के बेटे)  अब प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार हैं। जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन को भी दावेदार माना जा रहा है। इस सबके बीच भारत की नजरें इन चुनावों पर जमी हुई हैं। भारत के इस पड़ोसी देश में बीते कुछ समय में हिंदुओं के खिलाफ हुई हिंसक घटनाओं के चलते भारत की विशेष नजर इस चुनाव पर है। शेख हसीना को शरण देने के चलते दोनों देशों के रिश्तों में तनाव है और चुनाव के बाद बांग्लादेश हसीना को भेजने की मांग फिर से उठा सकता है।

 

बांग्लादेश के 12.7 करोड़ मतदाता न सिर्फ अपने जन प्रतिनिधि और प्रधानमंत्री चुन रहे हैं बल्कि वे 'जुलाई चार्टर' पर अपनी राय भी रखेंगे। इसमें लोगों से यह पूछा जाएगा कि वे देश में संवैधानिक सुधारों के लिए राजी हैं या नहीं। कुल मिलाकर बांग्लादेश में यह कोशिश हो रही है कि नई सरकार चुनने के साथ-साथ शेख हसीना के तख्तापलट को जनता की ओर से सही ठहरा दिया जाए।

भारत की सबसे बड़ी चिंता

 

अगस्त 2024 में जब शेख हसीना के खिलाफ आंदोलन शुरू हुई तो पूरे देश में अराजकता फैल गई। बंग बंधु के नाम से मशहूर बांग्लादेश के संस्थापक कहे जाने वाले शेख मुजीबुर रहमान यानी शेख हसीना के पिता के पुतलों को तोड़ दिया गया और उनका नाम मिटाने की कोशिश की गई। छात्रों की अगुवाई में शुरू हुआ आंदोलन कुछ ही समय में भीषण हिंसा पर उतर आया और ढाका समेत कई शहरों में जमकर आगजनी और तोड़फोड़ हुई। आगे चलकर धर्म आधारित हिंसा भी शुरू हो गई।

 

यह भी पढ़ें: 12.7 करोड़ वोटर, 350 सांसद और एक PM, बांग्लादेश कैसे चुनता है अपना नेता?

 

बांग्लादेश हिंदू बुद्धिस्ट क्रिश्चियन यूनिटी काउंसिल ने कम से कम 2000 हिंसक घटनाएं दर्ज की हैं जो धर्म के आधार पर हुईं और अगस्त से दिसंबर 2024 के बीच हुईं। भारत के विदेश राज्यमंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद को बताया था कि 5 अगस्त 2024 से मार्च 2025 के बीच 2400 से ज्यादा घटनाएं हुईं जिनमें बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया गया। 

 

भारत ने ऐसी घटनाओं की आलोचना की और जब भारत में प्रदर्शन होने लगे तो इंडियन प्रीमियर लीग से बांग्लादेशी खिलाड़ी मुस्तफिजुर रहमान को बाहर कर दिया गया। इस घटना ने आग में घी का काम किया और भारत में होने वाले टी20 वर्ल्ड कप में खेलने से बांग्लादेश ने इनकार कर दिया।

 

अब नई सरकार आने पर भारत की उम्मीद यह होगी कि पहले तो बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं के खिलाफ हिंसक घटनाओं पर रोक लगे। इसके अलावा, पहले जो घटनाएं हुई हैं उनकी जांच करवाई जाए ताकि दोषियों को सजा दी जा सके।

 

यह भी पढ़ें: 'हिंदुओं पर हमले हो रहे', चुनाव से एक दिन पहले बांग्लादेश पर बरसीं तस्लीमा नसरीन

राजनयिक स्तर पर सुलझेगी बात?

 

लगातार 15 साल तक बांग्लादेश की सत्ता पर काबिज रहीं शेख हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में रोष था। भारत की समस्या यह है कि भारत की मौजूदा सत्ता शेख हसीना पर आश्रित जैसी हो गई थी। बाकी के सभी दूसरे दल या तो कमजोर हो गए थे या फिर कानूनी कार्रवाई से घिरे थे। ऐसे में अब जब वे खुद को मजबूत कर रहे हैं और शेख हसीना की अवामी लीग पर बैन लग चुका है तो भारत के सामने बातचीत के नए चैनल तैयार करने की समस्या है। वह भी तब जब शेख हसीना ने भारत में ही शरण ले रखी है।

 

भारत ने अपने स्तर पर प्रयास भी किए हैं कि संबंध सुधारे जाएं। यही वजह है कि जब पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हुआ तो भार के विदेश मंत्री एस जयशंकर बांग्लादेश गए और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता और खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मुलाकात की। यानी भारत ने एक तरफ शेख हसीना को मानवता के आधार पर शरण दे रखी है दूसरी तरफ राजनयिक स्तर पर अपने पड़ोसी देश से संबंध बेहतर करने की कोशिशें जारी हैं।

 

यह भी पढ़ें: 'धर्म के आधार पर नहीं होगा भेदभाव', बांग्लादेश में चुनावपूर्व बदले जमात के सुर

जमात, भारत और अन्य

 

भारत की एक और चिंता है कि अगर तारिक रहमान के बजाय तीसरी शक्तियां सरकार और सत्ता में आती हैं तब क्या होगा। जमात-ए-इस्लामी के मुखिया डॉ. शफीकुर रहमान भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार बताए जा रहे हैं और उनकी पार्टी 11 पार्टियों के गठबंधन के साथ चुनाव लड़ रही है। इस गठबंधन में छात्र आंदोलन से निकले दल हैं जो शेख हसीना और भारत के धुर विरोधी रहे हैं। ऐसे में अगर शफीकुर रहमान सत्ता में आते हैं तब भारत के लिए संबंधों को बेहतर बनाना चुनौती भरा हो सकता है।

 

एक समय पर प्रतिबंधित हो चुकी जमात-ए-इस्लामी का तेजी से उभार हुआ है। हालांकि, उसने अपने मैनिफेस्टो में कहा है कि वह भारत, भूटान, नेपाल, म्यांमार, थाईलैंड, मालदीव और श्रीलंका से बेहतर रिश्ते चाहता है। जमात-ए-इस्लामी ने एक हिंदू उम्मीदवार को टिकट भी दिया है और वह मजबूत भी मानी जा रही है, ऐसे में भारत की नजर जमात के प्रदर्शन पर भी होगी और उसे अपने चैनल सबके लिए खुले रखने होंगे।  

 

Related Topic:#bangladesh news

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap