अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन 'बोर्ड ऑफ पीस' की नींव रखी है। कहा जा रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप इसे संयुक्त राष्ट्र की जगह स्थापित करना चाहते हैं। ट्रंप काफी मुखर होकर संयुक्त राष्ट्र की आलोचना भी करते रहे हैं और संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने के सवाल पर उन्होंने कहा था कि ऐसा हो भी सकता है। डोनाल्ड ट्रंप की ओर से कई देशों को इसका हिस्सा बनने के लिए न्योता भी दे दिया गया है। अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि उन्होंने इस 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने को मंजूरी दे दी है। वहीं, चीन ने इस न्योते पर आपत्ति जताई है और संयुक्त राष्ट्र के साथ रहने की बात कही है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इसमें शामिल होने का न्योता मिला है।
बेंजामिन नेतन्याहू की इस घोषणा से पहले नेतन्याहू की ओर से गाजा पर निगरानी के लिए इस बोर्ड ऑफ पीस की कार्यकारी समिति के स्ट्रक्चर की आलोचना की थी। ट्रंप की अगुवाई वाले इस ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की परिकल्पना मूल रूप से विश्व के कुछ चुनिंदा नेताओं के एक छोटे ग्रुप के रूप में की गई है, जो गाजा युद्ध विराम योजना की देखरेख करेगा। ट्रंप ने दर्जनों देशों को इसका निमंत्रण भेजा है और संकेत दिया है कि यह जल्द ही वैश्विक संघर्षों में मध्यस्थता करेगा। नेतन्याहू का यह फैसला उनके पहले के रुख के उलट है। इससे पहले उन्होंने कहा था कि गाजा वर्किंग कमेटी बनाने के लिए इजरायल की सरकार से कोई बातचीत नहीं की गई। दरअसल, बोर्ड ऑफ पीस की वर्किंग कमेटी में इजरायल का प्रमुख क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी तुर्किये भी शामिल है।
बाकी देशों ने क्या कहा?
अब इस बोर्ड में शामिल होने का नेतन्याहू का फैसला उनके गठबंधन में शामिल कुछ धुर दक्षिणपंथी सहयोगी दलों के साथ टकराव को बढ़ावा दे सकता है। इजरायल के वित्त मंत्री बेजालिल स्मोतरिक ने भी इस बोर्ड की निंदा की थी और इजरायल से गाजा के भविष्य के बारे में एकपक्षीय तरीके से जिम्मेदारी संभालने का आह्वान किया था। बता दें कि ट्रंप के न्योते पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE), मोरक्को, वियतनाम, कजाकिस्तान, हंगरी, अर्जेंटीना और बेलारूस इस बोर्ड ऑफ पीस में शामिल हो चुके हैं। इनके अलावा ब्रिटेन, कनाडा, मिस्र, रूस, तुर्किये और यूरोपीय संघ की कार्यकारी शाखा समेत अन्य देशों का कहना है कि उन्हें निमंत्रण मिला है लेकिन उन्होंने अभी तक जवाब नहीं दिया है।
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नेतन्याहू की घोषणा ऐसे समय में आई है जब ट्रंप स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक में भाग लेने के लिए रवाना हुए हैं। अभी कई चीजें साफ नहीं हैं। यह भी साफ नहीं है कि और कितने नेताओं को या किन नेताओं को निमंत्रण दिया जाएगा। ट्रंप से मंगलवार को जब एक संवाददाता ने पूछा कि क्या संयुक्त राष्ट्र की जगह इस बोर्ड को लेनी चाहिए तो उन्होंने कहा, ‘ऐसा हो सकता है।’ उन्होंने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र बहुत मददगार नहीं रहा है और अपनी क्षमताओं पर खरा नहीं उतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि लेकिन संयुक्त राष्ट्र को जारी रहना चाहिए क्योंकि उसकी क्षमता बहुत ज्यादा है।
विवाद की वजह क्या है?
इस मुद्दे पर विवाद खड़ा हो गया है और कुछ लोगों का कहना है कि ट्रंप संयुक्त राष्ट्र की जगह लेने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप के निमंत्रण के जवाब में फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बेरोट ने मंगलवार को कहा, ‘अमेरिका के राष्ट्रपति की ओर से पेश किए गए पीस प्लान को लागू करने के लिए हमारी हां है, जिसका हम पूरे दिल से समर्थन करते हैं लेकिन ऐसा संगठन बनाने के लिए हमारी ना है जो संयुक्त राष्ट्र की जगह लेगा।’ फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों के बोर्ड में शामिल नहीं होने की संभावना की बात सुनकर ट्रंप ने सोमवार को कहा, ‘वैसे भी कोई उन्हें नहीं चाहता। वह वैसे भी बहुत जल्द पद से हटने वाले हैं।’
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बता दें कि गाजा वर्किंग कमेटी से अलग संस्थापक कार्यकारी समिति के सदस्यों में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अपोलो ग्लोबल मैनेजमेंट के सीईओ मार्क रोवन, विश्व बैंक अध्यक्ष अजय बंगा और ट्रंप के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल शामिल हैं।
चीन ने क्या कहा?
चीन ने इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई है और संयुक्त राष्ट्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जाहिर की है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि चीन हमेशा सच्चे बहुपक्षवाद के लिए प्रतिबद्ध रहा है और संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की मजबूती से रक्षा करेगा। गुओ ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय हालात कैसे भी हों, चीन संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखकर अंतरराष्ट्रीय प्रणाली, अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र के चार्टर के उद्देश्य और सिद्धांतों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय संबंधों को चलाने वाले बुनियादी नियमों की मजबूती से रक्षा करेगा। चीन ने मंगलवार को इस बात की पुष्टि की कि उसे अमेरिका से शांति बोर्ड में शामिल होने का निमंत्रण मिला है लेकिन उसने इस बारे में कहने से मना कर दिया कि वह शामिल होगा या नहीं।
