भारत के करीब चागोस द्वीप समूह कितना अहम, ट्रंप यहां कब्जा क्यों चाहते?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चागोस द्वीप डील पर ब्रिटेन से खफा हैं। भारत से करीब 1,600 किमी दूर हिंद महासागर पर स्थित इस द्वीप समूह पर ट्रंप की निगाह है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम द्वीप अमेरिका और ब्रिटेन के बीच टेंशन की वजह न सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। ( AI Generated Image)
अमेरिका को ग्रीनलैंड क्यों चाहिए? इसके पीछे डोनाल्ड ट्रंप रूस-चीन, राष्ट्रीय सुरक्षा और रेयर अर्थ मिनरल्स समेत तमाम वजह गिना चुके हैं। अब ट्रंप ने एक नई वजह बताई है। उन्होंने चागोस द्वीप का नाम लिया और बताया कि क्यों ग्रीनलैंड हासिल करना जरूरी है। उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर पर निशाना साधा और पिछले साल मॉरीशस और ब्रिटेन के बीच हो चुके समझौते की आलोचना की। समझौते के मुताबिक ब्रिटेन चागोस द्वीप का पूर्ण नियंत्रण मॉरीशस के हाथों में देगा। ऐसे में आइये जानते हैं चागोस द्वीप के बारे में, यह कहां स्थित है, इसका रणनीतिक महत्व क्या है और अमेरिका के क्या हित छिपे हैं?
चागोस द्वीप समूह हिंद महासागर में स्थित हैं। अगर लोकेशन की बात करें तो मॉरीशस से करीब 1000 मील दूर उत्तर-पूर्व में कुल 60 द्वीप हैं। 1814 में ब्रिटेन ने मॉरीशस के साथ चागोस द्वीप पर भी कब्जा कर लिया था। शीत युद्ध के दौरान अमेरिका और ब्रिटेन के बीच एक समझौता हुआ। इसके तहत 1965 में चागोस द्वीप समूह को मॉरीशस से तोड़ दिया गया। ब्रिटेन की सरकार ने इसका नाम भी बदलकर ब्रिटिश हिंद महासागर क्षेत्र रख दिया। हालांकि द्वीप के बदल में ब्रिटेन ने 3 मिलियन पाउंड की रकम चुकाई थी।
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1966 में अमेरिका और ब्रिटेन के बीच यहां सैन्य अड्डा बनाने का समझौता हुआ। बड़ी संख्या में यहां के लोगों (चागोसियन) को मॉरीशस और सेशेल्स में शरण लेनी पड़ी। कुछ लोगों को ब्रिटेन ने अपने यहां वेस्ट ससेक्स के क्रॉली में बसाया। मिलिट्री बेस बनने के आठ साल बाद 1968 में मॉरीशस को ब्रिटेन से आजादी मिली। मगर 2025 तक चागोस द्वीप समूह ब्रिटेन के चंगुल से नहीं छूटा।
ब्रिटेन क्यों छोड़ रहा चागोस द्वीप?
मॉरीशस ने अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में ब्रिटेन के खिलाफ केस दाखिल किया। आरोप लगाया कि आजादी के बदले चागोस द्वीप देने पर मजबूर किया गया। साल 2019 में संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च अदालत और अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने ब्रिटेन को चागोस द्वीप समूह तुरंत मॉरीशस को लौटाने का आदेश दिया। हालांकि यह आदेश बाध्यकारी नहीं था। बावजूद इसके ब्रिटेन की सरकार ने मॉरीशस के साथ पिछले साल एक समझौता किया।
क्या छोड़ना पड़ेगा डिएगो गार्सिया?
पिछले साल मई में ब्रिटेन ने एक शर्त के साथ चागोस द्वीप समूह मॉरीशस को देने पर राजी हुआ। समझौते के तहत डिएगो गार्सिया द्वीप 99 साल तक ब्रिटेन के पास पट्टे में रहेगा। बदले में ब्रिटेन हर साल 136 मिलियन डॉलर का भुगतान करेगा। डोनाल्ड ट्रंप भले ही आज समझौते के खिलाफ हैं, लेकिन उस वक्त उनके प्रशासन ने इसका स्वागत किया था।
समझौते के तहत 40 मिलियन पाउंड का एक ट्रस्ट बनाया जाएगा। इसका इस्तेमाल चागोसियन लोगों के कल्याण में किया जाए। वहीं डिएगो गार्सिया पर मॉरीशस का कंट्रोल होगा, लेकिन वह वहां लोगों को नहीं बसा सकेगा। फरवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस डील का समर्थन किया था। मगर एक साल में ही वह अपने बयान से पलटते दिख रहे हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने उस वक्त कहा था कि ट्रंप ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए अपना समर्थन व्यक्त किया है।
क्यों अहम है डिएगो गार्सिया, अमेरिका के कौन से हित?
साल 1971 में अमेरिका और ब्रिटेन ने डिएगो गार्सिया में एक मिलिट्री बेस तैयार किया था। यह अमेरिका और ब्रिटेन का सबसे अहम और गुप्त सैन्य अड्डा है। ब्रिटेन से इसकी दूरी करीब 9932 किमी है। यहां एडवांस्ड सर्विलांस और कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हैं। अमेरिका के कई बम वर्षक विमान तैनात हैं। 9/11 आतंकी हमले के बाद इराक और अफगानिस्तान पर अमेरिका हमलों को अंजाम देने में डिएगो गार्सिया ने अहम भूमिका निभाई थी। हिंद और प्रशांत महासागर क्षेत्र में अमेरिका इसी बेस से निगरानी करता है।
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- अमेरिका और ब्रिटेन पिछले पांच दशक से भी अधिक समय से डिएगो गार्सिया में बेहद सीक्रेट मिलिट्री बेस का संचालन करते हैं। समझौते के मुताबिक अगले 99 साल तक यहां ब्रिटेन की मौजूदगी रहेगी। यहां आम इंसान का जाना प्रतिबंधित है। डिएगो गार्सिया तक कोई कॉमर्शियल फ्लाइट नहीं जाती है। यहां नाव से पहुंचना भी आसान नहीं है, क्योंकि कोई परमिट नहीं जारी होता है। 44 वर्ग किलोमीटर में फैला डिएगो गार्सिया चागोस द्वीप समूह का सबसे बड़ा द्वीप है।
- 1966 में अमेरिका और ब्रिटेन के बीच समझौता हुआ। 50 साल के लिए डिएगो गार्सिया को अमेरिका ने पट्टे पर लिया। 2016 में पट्टा खत्म होना था। मगर उससे पहले ही 20 साल और बढ़ा दिया गया। अब 2036 तक अमेरिका को पट्टा मिल गया है। डिएगो गार्सिया में एयरबेस के अलावा बंदरगाह है। जहां अमेरिका की पनडुब्बियां ठहरती हैं।
- यहां अमेरिका ने बड़ी मात्रा में हथियारों का भंडारण कर रखा है, ताकि आपातकाल में इनका इस्तेमाल किया जा सके। डिएगो गार्सिया में टॉकहॉक मिसाइलों को पनडुब्बी में लोड करने की सुविधा है। यह भी कहा जाता है कि डिएगो गार्सिया में सीईए का एक गुप्त अड्डा है। यहां आतंकियों से पूछताछ की जाती है।
डोनाल्ड ट्रंप ने क्या कहा?
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'चौंकाने वाली बात यह है कि हमारा शानदार नाटो सहयोगी यूनाइटेड किंगडम मौजूदा समय में डिएगो गार्सिया द्वीप, जो एक अहम अमेरिकी सैन्य अड्डे है, को मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है और ऐसा बिना किसी कारण के किया जा रहा है।' उन्होंने आगे लिखा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन और रूस ने कमजोरी के इस कृत्य को भांप लिया है... ब्रिटेन का बेहद महत्वपूर्ण जमीन को सौंप देना घोर मूर्खता का काम है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के उन कई कारणों में से एक है, जिनके चलते ग्रीनलैंड को हासिल करना आवश्यक है।'
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