अमेरिका-ईरान तनाव पर बड़ी खबर आ रही है। एक ईरानी अधिकारी ने दावा किया कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तेहरान पर हमला नहीं करेंगे। उन्होंने ईरान से संयम बरतने को कहा है। इसके बाद ईरान ने अपना एयरस्पेस दोबारा खोल दिया है। अभी तक दुनियाभर में हमले की आशंका जताई जा रही है, लेकिन बुधवार की रात से डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदले-बदले दिख रहे हैं। हालांकि वह अभी तक इतने बयान दे चुके हैं कि वहां से लौटना मुश्किल माना जा रहा है।
पाकिस्तानी अखबार डॉन ने इस्लामाबाद में तैनात ईरान के राजदूत रजा अमीरी मोघदम के हवाले से बताया कि ट्रंप ने ईरान को सूचित किया है कि उनका हमला करने का कोई इरादा नहीं है। ईरानी राजदूत का दावा है कि बुधवार की रात करीब एक बजे यह जानकारी मिली। इससे साफ है कि ट्रंप युद्ध नहीं चाहते हैं। उन्होंने तेहरान से संयम बरतने को कहा है। साथ ही साथ क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों पर हमला न करने की बात भी कही।
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मुद्दे को बातचीत से हल करें: तुर्की
सऊदी अरब के अलावा तुर्की ने मौजूदा संकट को बातचीत से हल करने पर जोर दिया। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा कि समस्याओं का समाधान बातचीत से हो। उम्मीद है कि अमेरिका और ईरान इस मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। हम इन घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहे हैं। उधर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र लिखा और आरोप लगाया कि देश में अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल हैं। विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत आर्थिक आधार पर हुई। आतंकवादी तत्वों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों को बाधित करके इसे दंगों में बदल दिया।
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ट्रंप के बयान से क्या संकेत मिला?
बुधवार की रात अमेरिकी सेना ने मध्य पूर्व के कई सैन्य अड्डों से अपने सैनिकों की निकासी की। इसके बाद दुनियाभर के देशों ने अपने नागरिकों को ईरान छोड़ने की सलाह दी। आशंका जताई जाने लगी कि किसी भी वक्त अमेरिका इजरायल पर हमला कर सकता है। मगर अभी तक यह तय नहीं है कि हमला कब होगा? बुधवार की रात ही ट्रंप ने कहा, 'हमें दूसरी तरफ के बहुत ही अहम सूत्रों से जानकारी मिली है। उन्होंने कहा है कि हत्याएं रुक गई हैं और फांसी नहीं दी जाएगी।' ट्रंप के इस बयान को नरमी के तौर पर देखा जाने लगा। माना जा रहा है कि शायद अमेरिका अपने कदम पीछे खींच सकता है। वहीं कुछ लोग इसे संशय के तौर पर देख रहे हैं।