क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड की कहानी, US ने क्यों लगाया बैन; यह कितना प्रभावशाली?
मुस्लिम ब्रदरहुड दुनिया का सबसे प्रभावशाली इस्लामी आंदोलन है। 70 से अधिक देशों में इसकी मौजूदगी। मिस्र और ट्यूनीशिया में सरकार बनाई। लीबिया और जॉर्डन की संसद तक पहुंचा और एक प्रधानमंत्री की हत्या में शामिल रहे इस संगठन की क्या कहानी है?

सांकेतिक फोटो। (AI Generated Image)
साल 1928 में मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना हुई। यह संगठन मिस्र से निकला और मध्य पूर्व के कई देशों तक फैल गया। करीब 97 साल बाद अमेरिका ने मिस्र, लेबनान और जॉर्डन में मौजूद मुस्लिम ब्रदरहुड की कई शाखाओं पर प्रतिबंध लगा दिया है और उन्हें आतंकवादी घोषित कर दिया गया। मुस्लिम ब्रदरहुड पर प्रतिबंध लगाने वाला अमेरिका इकलौता देश नहीं है। उससे पहले करीब 7 अन्य देश भी बैन लगा चुके हैं। 1940 के दशक में मुस्लिम ब्रदरहुड का मिस्र के शासकों से टकराव चलता रहा है।
अमेरिका ने क्यों लगाया बैन?
अमेरिका के मुताबिक मुस्लिम ब्रदरहुड मध्य पूर्व में इजरायली हितों के खिलाफ काम कर रहा था। यहां तक कि उसने इजरायल के खिलाफ हमास का समर्थन भी किया। अपने बयान में अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने कहा, 'मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं खुद को वैध नागरिक संगठन होने का दावा करती हैं। मगर पर्दे के पीछे वे हमास जैसे आतंकवादी समूहों का खुलकर समर्थन करते हैं।'
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कहां-कहां बैन है मुस्लिम ब्रदरहुड
- मिस्र
- सऊदी अरब
- संयुक्त अरब अमीरात
- रूस
- सीरिया
- बहरीन
- जॉर्डन
अमेरिकी एक्शन पर मुस्लिम ब्रदरहुड ने क्या कहा?
मुस्लिम ब्रदरहुड ने अमेरिका के कदम की निंदा की। उसका कहना है कि अमेरिका ने संयुक्त अरब अमीरात और इजरायल के दबाव में यह फैसला लिया है। मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड के कार्यवाहक जनरल गाइड सलाह अब्देल हक का कहना है कि संगठन अमेरिकी कदम को खारिज करता है। सभी कानूनी रास्ते अपना कर इस फैसले को चुनौती दी जाएगी। इसे दुनिया भर के लाखों मुसलमान प्रभावित होंगे।
अमेरिका अब क्या कदम उठा सकता?
नए प्रतिबंधों के बाद मुस्लिम ब्रदरहुड को सहायता पहुंचाना गैर-कानूनी होगा। अमेरिका अब इससे जुड़े संगठनों पर आर्थिक प्रतिबंध लगा पाएगा, ताकि आय को स्रोतों को बंद किया जा सके। वहीं मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े लोग अमेरिका की यात्री भी नहीं कर पाएंगे। अमेरिका के दो राज्य काउंसिल ऑन अमेरिकन-इस्लामिक रिलेशन्स (सीएआईआर) और मुस्लिम ब्रदरहुड को आतंकी संगठन घोषित कर चुके हैं।
पिछले साल जॉर्डन ने लिया था एक्शन
पिछले साल अप्रैल में जॉर्डन ने मुस्लिम ब्रदरहुड पर बैन लगाया था। जॉर्डन की इस्लामिक एक्शन फ्रंट पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ी है। एक दशक पहले भी जॉर्डन ने मुस्लिम ब्रदरहुड पर प्रतिबंध लगाया था। बाद में कुछ गतिविधियों में छूट दी थी। जॉर्डन ने संगठन पर देश की सुरक्षा से छेड़छाड़ और घातक हथियार रखने और लोगों को ट्रेनिंग देने का आरोप लगाया था। संगठन की सभी संपत्तियां को जब्त कर लिया गया था।
कब और किसने की मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना?
ओटोमन साम्राज्य के पतन के बाद साल 1928 में मिस्र के हसन अल-बन्ना ने मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना की थी। मध्य-पूर्व में इसके कई सियासी और सामाजिक संगठन है। यह संगठन सूडान, मिस्र, सीरिया, फिलिस्तीन, लेबनान और उत्तरी अफ्रीका तक फैला है। मिस्र के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद मुर्सी भी मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य थे। 2012 के राष्ट्रपति चुनाव में उनकी अगुवाई में संगठन को जीत मिली थी। हालांकि सैन्य तख्तापलट के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। मुस्लिम ब्रदरहुड के नेता मोहम्मद बदी 2017 से मिस्र की जेल में बंद है।
मुस्लिम ब्रदरहुड पर कौन से आरोप लगते?
मुस्लिम ब्रदरहुड पर हिंसा फैलाने के आरोप लगते हैं। मगर यह संगठन इन्हें खारिज करता है। उसका कहना है कि उसने हिंसा का रास्ता दशकों पहले छोड़ दिया था। मगर मध्य पूर्व के तमाम मुस्लिम बहुल देशों को ही इस पर भरोसा नहीं है। सऊदी अरब से यूएई तक मुस्लिम ब्रदरहुड को न केवल खतरा, बल्कि आतंकी संगठन मानते हैं। मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखाएं लीवा अल-थवरा और हास्म आतंकी घटनाओं में शामिल रहीं है। 2017 में टांटा शहर के पुलिस प्रशिक्षण केंद्र और काहिरा स्थित म्यांमार दूतावास पर हमले को अंजाम दिया था।
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शुरुआत में कैसा रहा ब्रदरहुड?
अपने स्थापना के शुरुआती वर्षों में मुस्लिम ब्रदरहुड धार्मिक और शिक्षा से जुड़े कामों पर लगा रहा। बाद में सामाजिक कार्यों में हिस्सा लिया तो लोगों तक इसकी ख्याति पहुंची। मगर बाद में यह संगठन सियासत में कूद पड़ा और मिस्र की सत्ता पर काबिज वफद पार्टी का घोर विरोध किया। जब दुनिया दूसरे विश्वयुद्ध में लगी थी, तभी इस संगठन ने मिस्र की सरकार के खिलाफ जनता को भड़काया और आंदोलन की खातिर एकजुट किया। 1940 के दशक के बाद संगठन ने अपनी सशस्त्र सेना का गठन किया। इस सशस्त्र शाखा पर बम धमाके, आतंकी हमले और राजनीतिक हत्याओं को अंजाम देने का आरोप है। हालांकि संगठन का कहना है कि वह शांतिपूर्ण तरीके से इस्लाम का प्रचार करता है।
कहां-कहां इस संगठन का दखल?
लेबनान में मुस्लिम ब्रदरहुड की शाखा को अल-जमा अल-इस्लामिया के तौर पर जाना जाता है। इसके सदस्य वहां की संसद में भी हैं। वहीं जॉर्डन में 2024 के प्रतिनिधि सभा के चुनाव में मुस्लिम ब्रदरहुड की सियासी इकाई इस्लामिक एक्शन फ्रंट ने 31 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि पिछले साल अप्रैल में यह संगठन प्रतिबंधिति किया जा चुका है। 2011 में ट्यूनीशिया की इस्लामी पार्टी एनाहदा पार्टी ने वहां के राष्ट्रपति जीएन एल आबिदीन बेन अली को सत्ता से बेदखल किया और बाद में संसदीय चुनाव में जीत हासिल की। यह पार्टी मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़ी थी।
मुस्लिम ब्रदरहुड के संगठन
- गाजा में हमास मुस्लिम ब्रदरहुड का संगठन
- अमेरिका का होली लैंड फाउंडेशन भी इससे जुड़ा
- मिस्र में हस्म और लीवा अल-थवरा इसी की शाखा
- लेबनान का अल-जमा अल-इस्लामिया
- जॉर्डन की इस्लामिक एक्शन फ्रंट
संगठन प्रधानमंत्री की हत्या में रहा शामिल
1948 में मिस्र के प्रधानमंत्री की हत्या में यह संगठन शामिल रहा है। अमेरिका इसे जिहादी विचारधारा वाला संगठन मानता है। मिस्र में चर्चों पर हमले के पीछे मुस्लिम ब्रदरहुड का हाथ था। इसके अलावा ईसाइयों के खिलाफ हिंसा को भी भड़काया। मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े रहे धर्मगरु यूसुफ अल-करदावी ने इराक में अमेरिकी सैनिकों पर हमले को जायज ठहराने वाला फतवा जारी किया था। इसके अलावा होलोकॉस्ट को यहूदियों के लिए एक सजा करार दिया था। इतना ही नहीं, यह भी धमकी दी थी कि उनका एक और होलोकॉस्ट बाकी है। ओसामा बिन लादेन की मौत पर शोक भी जताया। अमेरिका का कहना है कि मुस्लिम ब्रदरहुड आज भी जिहादी विचारधारा को बढ़ाव दे रहा है।
शरिया कानून लगाना लक्ष्य
अमेरिकी कांग्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम ब्रदरहुड के सर्वोच्च नेता मोहम्मद बदी का लक्ष्य एक नया इस्लामी खिलाफत स्थापित करना है और दुनिया में शरिया कानून लागू करना था। जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के स्वतंत्र कार्यक्रम के मुताबिक 1928 में मिस्र में स्थापित मुस्लिम ब्रदरहुड दुनिया का सबसे पुराना और संभवतः सबसे प्रभावशाली समकालीन इस्लामी आंदोलन है। मुस्लिम ब्रदरहुड मध्य पूर्व और अफ्रीका तक फैला है। दक्षिण पूर्व एशिया और पश्चिम में भी इसका असर है। दुनियाभर के 70 से अधिक देशों में इसके संगठन फैले हैं।
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