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कितना बड़ा है ईरान का व्यापार साम्राज्य, दुनिया को क्या बेचता और खरीदता है?

अमेरिकी हमले की आशंका के बीच ईरान के व्यापार पर भी संकट के बादल छाए हैं। अमेरिका की टैरिफ धमकी के बाद कई देश तेहरान से दूरी बना सकते हैं। आइये समझते हैं तेहरान के व्यापारिक साम्राज्य को।

Iran Trade Partners

सांकेतिक फोटो। (AI Generated Image)

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ईरान इन दिनों अपने इतिहास के सबसे भीषण संकट से गुजर रहा है। एक तरफ बढ़ती महंगाई के बीच जनता सरकार के खिलाफ सड़क पर है। दूसरी तरफ अमेरिका से लगातार हमले की धमकियां मिल रही हैं। अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पहले ही काफी हद तक टूट चुकी है। अब डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने रही सही कसर और निकालने की ठान ली है।

 

हाल ही में अमेरिका ने धमकी दी है कि वह ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसद अतिरिक्त टैरिफ लगाएगा। माना जा रहा है कि इस टैरिफ की जद में भारत भी आ सकता है। वहीं कुछ देश बचने की खातिर ईरान से दूरी बना सकते हैं। हर स्थिति में सबसे अधिक नुकसान ईरान को ही उठाना पड़ेगा। ऐसे में आइये जानते हैं कि ईरान का व्यापार कहां तक फैला है। कौन-कौन देश उससे सामान खरीदते और बेचते हैं?

कितना बड़ा है ईरान का व्यापारिक साम्राज्य?

ईरान के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में चीन, रूस, भारत, संयुक्त अरब अमीरात, जापान, दक्षिण कोरिया, तुर्की और जर्मनी शामिल हैं। ईरान सबसे अधिक ईंधन का निर्यात करता है। वह दुनियाभर के देशों को तेल और पेट्रोकेमिकल्स, प्राकृतिक गैस, कृषि उत्पाद, रसायन, फल-मेवे और मशीनरी बेचता है। ईंधन के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी ईरान का व्यापार बढ़ रहा है। मगर अमेरिकी टैरिफ बड़ी बाधा बनेंगे। ईरान का कुल विदेशी व्यापार 2024 में लगभग 112 से 117 बिलियन डॉलर के आसपास रहा। इसमें निर्यात की हिस्सेदारी 53-60 बिलियन और आयात का शेयर 63-64 बिलियन डॉलर रहा।

 

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दुनिया से क्या खरीदता है तेहरान?

अनाज, मोबाइल उपकरण, तकनीकी सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, औद्योगिक मशीनरी, औषधियाँ और औद्योगिक उपकरण का आयात करता है। निर्यात की तरह चीन ईरान का सबसे बड़ा आयात साझेदार भी है। इसके अलावा इराक और यूएई उसके रणनीतिक व्यापार केंद्र हैं। विनिर्माण और ऊर्जा के क्षेत्र में तुर्की अहम साझेदार है।

 

ईरान के टॉप निर्यात साझेदार

  • चीन
  • यूएई
  • इराक
  • तुर्की
  • पाकिस्तान
  • अफगानिस्तान

ईरान को सामान बेचने वाले प्रमुख देश

  • यूएई
  • चीन
  • तुर्की
  • भारत
  • जर्मनी
  •  रूस

 

चीन: विश्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक 2022 में ईरान ने करीब 22 बिलियन डॉलर का निर्यात चीन को किया। वहीं 15 बिलियन डॉलर का सामान बीजिंग से खरीदा। केप्लर के मुताबिक 2025 में ईरान से चीन के निर्यात में 77 फीसद सिर्फ तेल का हिस्सा था। आज चीन ही ईरान के लिए विदेशी मुद्रा का सबसे बड़ा सोर्स है, क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अधिकांश देशों ने ईरान से दूरी बना रखी है।

 

भारत: 2024-25 में भारत और ईरान के बीच 1.68 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार था। इसमें 1.24 बिलियन डॉलर का भारत ने निर्यात किया और 440 मिलियन डॉलर का सामान आयात किया। दोनों देशों के बीच व्यापार बेहद कम है। यही कारण है कि भारत के टॉप 50 व्यापारिक साझेदारों में ईरान का नाम नहीं आता है। ईरान के कुल आयात में भी भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.3 फीसद है। हालांकि ईरान भारत का सबसे बड़ा बासमती चावल खरीदार है। उसने 2025-26 में अप्रैल से नवंबर तक भारत से 468.1 मिलियन डॉलर मूल्य का 5.99 लाख टन बासमती चावल खरीदा।

 

ईरान के अन्य साझेदार: जापान और ईरान के बीच मामूली व्यापार होता है। 2025 में ईरान ने कपड़े, फल और सब्जियों का निर्यात किया और जापान से गाड़ियों के इंजन और मशीनरी की खरीद की। कोरिया इंटरनेशनल ट्रेड एसोसिएशन के मुताबिक पिछले साल ईरान ने दक्षिण कोरिया से 129 मिलियन डॉलर का आयात किया और वहीं उसका निर्यात 1.6 मिलियन डॉलर रहा है। जर्मनी सरकार के आंकड़ों के मुताबिक 2025 के 11 महीने में जर्मनी ने ईरान को करीब 871 मिलियन यूरो का निर्यात किया और ईरान से 217 मिलियन यूरो का सामान खरीदा। 2025 में तुर्की ने ईरान से 2.2 बिलियन डॉलर का सामान खरीदा और 2.3 बिलियन डॉलर का निर्यात किया।

 

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चीन और दक्षिण कोरिया कैसे फंसे?

 

  • करीब 8 करोड़ की आबादी वाले ईरान से दुनिया के 140 से अधिक देश व्यापार करते हैं। डेटा फर्म केप्लर के मुताबिक चीन उसका सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024 में चीन ने ईरानी तेल निर्यात का 77 फीसद हिस्सा खरीदा। पिछले साल मई में 12 दिन के युद्ध के बाद ट्रंप ने चीन को ईरानी तेल खरीदने की छूट दी थी। मगर अब सवाल यह उठ रहा है कि चीन को यह छूट मिलेगी की नहीं।

 

  • चीन के अलावा दक्षिण कोरिया भी अमेरिकी फेर में फंस चुका है। पिछले साल दक्षिण कोरिया यूएस के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है। इसमें 15 फीसद न्यूनतम टैरिफ की बात तय की गई है। मगर ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों की सूची में उसका भी नाम है। ऐसे में दक्षिण कोरिया पर 40 फीसद टैरिफ लग सकता है।

 


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