बांग्लादेश के नौगांव जिले में शनिवार 17 जनवरी को उस समय हड़कंप मच गया जब स्थानीय लोगों ने कालीतला श्मशान घाट के पास बहती नदी में एक युवक का शव देखा। शुरुआत में मृतक की पहचान करना मुश्किल था। सोशल मीडिया पर खबर फैलते ही बोगरा जिले में रहने वाले लड़के के परिवार के लोग घटना स्थल पर पहुंचे। परिजनों ने कपड़ों के आधार पर शव की पहचान अभि के रूप में की जो नौगांव सरकारी कॉलेज में मैनेजमेंट ऑनर्स के अंतिम साल का छात्र था।

 

अभि के पिता रमेश चंद्र ने बताया कि 11 जनवरी को घर में हुए मामूली विवाद के बाद वह लापता हो गया था। परिवार ने हर जगह तलाश की और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई लेकिन सात दिन बाद उसकी मौत की खबर आई।

 

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पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव

अभी फिलहाल नौगांव पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि यह महज एक हादसा था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश है। आपको बता दें कि अभि की मौत की खबर ऐसे माहौल में आई है जब हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज डेढ़ महीने के भीतर देश के विभिन्न जिलों में हुई हिंसक घटनाओं में कम से कम 17 हिंदुओं की जान जा चुकी है। इन मामलों में अब तक 14 केस दर्ज हुए हैं और 21 लोगों की गिरफ्तारी की गई है लेकिन कई मामलों में पुलिस अब तक खाली हाथ है।

भीड़ की हिंसा और पुलिस कस्टडी में मौतें

हालिया रिपोर्टों के अनुसार, मौतों का तरीका बेहद डरावना है। कई जगहों पर भीड़ ने मामूली विवाद या चोरी और लूट के शक में लोगों की जान ले ली। जैसे, जॉय महापात्रा की मोबाइल पेमेंट विवाद में पिटाई के बाद मौत हो गई। अमृत मंडल और शांतो चंद्र दास की लूट के आरोप में हत्या कर दी गई। साथ ही मिथुन सरकार नाम के व्यक्ति की मौत उस वक्त हुई जब वह भीड़ के डर से भागते हुए नहर में गिर गए। इतना ही नहीं, पुलिस कस्टडी और लापरवाही के भी मामले सामने आए हैं। प्रोलॉय चाकी की हिरासत में मौत हुई, जहां परिवार ने समय पर इलाज न मिलने का गंभीर आरोप लगाया।

 

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टारगेट किलिंग

बांग्लादेश में पत्रकारों, व्यापारियों और यहां तक कि स्वतंत्रता सेनानियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। जेसोर में पत्रकार राणा प्रताप बैरागी और नरसिंगडी में व्यापारी शरत मणि चक्रवर्ती की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मैमनसिंह में दीपू चंद्र दास को पीट-पीटकर जिंदा जला देने जैसी बर्बरता भी सामने आई है। इसके अलावा, एक स्वतंत्रता सेनानी योगेश चंद्र रॉय और उनकी पत्नी की उनके ही घर में हत्या कर दी गई, जो अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े करती है।