अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चागोस द्वीप समूह मॉरीशस को लौटाने वाले ब्रिटेन के समझौते की आलोचना की। उन्होंने इसे मूर्खतापूर्ण बताया। पिछले साल ही अमेरिका के समर्थन के बाद ब्रिटेन चागोस द्वीप समूह मॉरीशस को देने पर राजी हुआ था। समझौते के मुताबिक डिएगो गार्सिया द्वीप को 99 साल के पट्टे पर ब्रिटेन को दिया गया है। बाकी हिस्से पर मॉरीशस का नियंत्रण होगा। डिएगो गार्सिया में अमेरिका का हिंद महासागर में सबसे बड़ा सैन्य अड्डा है। यही कारण है कि डोनाल्ड ट्रंप आज ब्रिटेन के फैसले का विरोध करने में जुटे हैं। इस सैन्य अड्डे ने अफगानिस्तान, वियतनाम और इराक में अमेरिकी सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाई थी।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'चौंकाने वाली बात यह है कि हमारा शानदार नाटो सहयोगी यूनाइटेड किंगडम मौजूदा समय में डिएगो गार्सिया द्वीप, जो एक अहम अमेरिकी सैन्य अड्डे है, को मॉरीशस को देने की योजना बना रहा है और ऐसा बिना किसी कारण के किया जा रहा है।'
उन्होंने आगे लिखा, 'इसमें कोई संदेह नहीं है कि चीन और रूस ने कमजोरी के इस कृत्य को भांप लिया है... ब्रिटेन का बेहद महत्वपूर्ण जमीन को सौंप देना घोर मूर्खता का काम है और यह राष्ट्रीय सुरक्षा के उन कई कारणों में से एक है, जिनके चलते ग्रीनलैंड को हासिल करना आवश्यक है।'
यह भी पढ़ें: अमेरिकी टैरिफ और घरेलू मांग के बावजूद चीन की ग्रोथ तेज क्यों है?
अब कोई विवाद नहीं होना चाहिए: मॉरीशस
डोनाल्ड ट्रंप के बयान पर मॉरीशस ने प्रतिक्रिया दी। वहां के अटॉर्नी जनरल गैविन ग्लोवर ने कहा, 'ब्रिटेन के मॉरीशस समझौते को घोर मूर्खता और पूरी कमजोरी का बताने के बावजूद हमें अब भी समझौते के आगे बढ़ने की उम्मीद है। यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि यह समझौता पूरी तरह से यूनाइटेड किंगडम और मॉरीशस गणराज्य के बीच बातचीत के बाद संपन्न और हस्ताक्षरित किया गया था।'
'जल्द संधि लालू होने की उम्मीद'
मॉरीशस के अटॉर्नी जनरल आगे कहा, 'चागोस द्वीप समूह पर मॉरीशस की संप्रभुता को अंतरराष्ट्रीय कानून से स्पष्ट मान्यता मिली है और इस पर अब कोई विवाद नहीं होना चाहिए। हम उम्मीद करते हैं कि संधि को किए गए वादों के अनुसार जल्द से जल्द लागू किया जाएगा।'
यह भी पढ़ें: बांग्लादेश से और खराब हुए संबंध, वापस आएंगे भारतीय राजनयिकों के बीवी-बच्चे
नाटो देशों में बढ़ी रार
बता दें कि ग्रीनलैंड के मुद्दे पर यूरोप और अमेरिका सामने सामने हैं। एक तरह जहां डोनाल्ड ट्रंप जबरन कब्जे की नीयत रखते हैं तो वहीं यूरोपीय देश ट्रंप की धमकी के खिलाफ एकजुट होने लगे हैं। कई यूरोपीय देशों ने अमेरिका के खिलाफ ग्रीनलैंड में अपनी सेना भेजी है। ट्रंप की बढ़ती आक्राकमता के बीच आशंका जताई जा रही है कि नाटो किसी भी वक्त टूट सकता है। हाल ही में ट्रंप ने कहा, किसी भी एक व्यक्ति या प्रेसिडेंट ने नाटो के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अधिक कुछ नहीं किया। अगर मैं नहीं आता तो अभी नाटो होता ही नहीं! यह इतिहास के कूड़ेदान में चला गया होता। दुख की बात है, लेकिन सच है।