logo

ट्रेंडिंग:

अमेरिकी टैरिफ और घरेलू मांग के बावजूद चीन की ग्रोथ तेज क्यों है?

घरेलू मांग कम होने और अमेरिकी टैरिफ के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। इसके कई कारण हैं।

news image

प्रतीकात्मक तस्वीर । Photo Credit: AI Generated

शेयर करें

संबंधित खबरें

Reporter

जब वैश्विक अर्थव्यवस्था सुस्ती, ऊंची ब्याज दरों और भू-राजनीतिक तनावों से जूझ रही है, तब चीन की लगभग 5% GDP ग्रोथ ने दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा है। अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ, रियल एस्टेट संकट और घरेलू उपभोक्ता मांग की कमजोरी के बावजूद चीन की अर्थव्यवस्था अपेक्षा से बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

 

हालांकि, सवाल यह नहीं है कि चीन बढ़ क्यों रहा है? असली सवाल यह है कि क्या 5% की ग्रोथ वाकई 'अच्छी' है? और जब भारत इससे तेज़, अमेरिका इससे धीमा और रूस अलग रास्ते पर चल रहा है, तो इस ग्रोथ को कैसे समझा जाए?

 

यह भी पढ़ेंः ट्रंप ने लीक कर दी मैक्रों की चैट; ग्रीनलैंड-ईरान के बारे में थी टॉप सीक्रेट बात

घरेलू मांग कमजोर, फिर भी GDP मजबूत

चीन की मौजूदा आर्थिक स्थिति एक विरोधाभास जैसी दिखती है क्योंकि घरेलू स्तर पर मांग की कमी दिखती है। वजह है-

  • रियल एस्टेट सेक्टर कई वर्षों से संकट में है
  • घरों की कीमतें गिरने से उपभोक्ताओं का भरोसा टूटा
  • युवाओं में बेरोज़गारी ऊंची बनी हुई है
  • डिफ्लेशन का डर लोगों को खर्च टालने पर मजबूर कर रहा है

सामान्य तौर पर इतनी कमजोर घरेलू मांग किसी भी अर्थव्यवस्था की ग्रोथ को नीचे खींच लेती।

टैरिफ का असर सीमित क्यों रहा?

चीन की ग्रोथ का सबसे बड़ा सहारा है निर्यात। ऐसे में माना जा रहा था कि अमेरिकी टैरिफ का चीन के निर्यात पर काफी असर पड़ेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अमेरिकी टैरिफ के बावजूद चीन के निर्यात पर असर अपेक्षाकृत सीमित इसलिए रहा क्योंकि उसने समय रहते अपनी निर्यात रणनीति को एक ही बाजार पर निर्भर रहने के बजाय बहु-आयामी बना लिया है। बीते कुछ वर्षों में चीन ने अमेरिका पर निर्भरता घटाकर ASEAN देशों, अफ्रीका, मध्य-पूर्व और लैटिन अमेरिका जैसे उभरते बाजारों की ओर तेज़ी से रुख किया। इन क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और उपभोक्ता वस्तुओं की मांग लगातार बढ़ रही है, जिसका फायदा चीनी निर्यातकों को मिला। नतीजतन, अमेरिका में टैरिफ बढ़ने से भले ही वहां शिपमेंट प्रभावित हुए हों, लेकिन कुल निर्यात में बड़ी गिरावट नहीं आई।

 

इसके साथ ही चीन के निर्यात का फोकस अब पारंपरिक लो-वैल्यू मैन्युफैक्चरिंग से हटकर ग्रीन और हाई-टेक उत्पादों की ओर शिफ्ट हो गया है। इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर पैनल, बैटरियां और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे सेक्टरों में चीन ने लागत, स्केल और सप्लाई-चेन इंटीग्रेशन का ऐसा फायदा बनाया है, जिसकी बराबरी करना बाकी देशों के लिए आसान नहीं है। इन उत्पादों की वैश्विक मांग तेजी से बढ़ रही है और कई देशों के पास घरेलू उत्पादन की पर्याप्त क्षमता नहीं है, जिससे चीनी कंपनियों को नए बाजार मिलते रहे।

 

इस रणनीति को मजबूत करने में चीन की सरकार का समर्थन और लो-मार्जिन बिज़नेस मॉडल की भी अहम भूमिका रही है। सरकारी सब्सिडी, सस्ता और आसान क्रेडिट तथा नीतिगत संरक्षण के चलते चीनी कंपनियां कम मुनाफे पर भी लंबे समय तक बाजार में टिके रहने और हिस्सेदारी बनाए रखने में सक्षम रहीं। वे कीमतों के ज़रिए प्रतिस्पर्धियों पर दबाव डालती रहीं, जिससे टैरिफ का बोझ आंशिक रूप से खुद वहन कर लिया गया।

निवेश-आधारित ग्रोथ

जहां एक ओर चीन में घरेलू खपत अपेक्षाकृत कमजोर बनी रही, वहीं दूसरी ओर निवेश-आधारित ग्रोथ ने इस कमी को काफी हद तक पूरा कर दिया। उपभोक्ता मांग सुस्त होने के बावजूद अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार ने इन्वेस्टमेंट को मुख्य ड्राइवर के रूप में इस्तेमाल किया, ताकि विकास की रफ्तार बनी रहे और रोजगार तथा औद्योगिक गतिविधियां ठप न पड़ें।

 

इस निवेश का बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर, ग्रीन एनर्जी और सेमीकंडक्टर व एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक सेक्टरों में गया। सड़क, रेल, लॉजिस्टिक्स और शहरी परियोजनाओं के साथ-साथ सोलर, विंड और बैटरी स्टोरेज जैसी ग्रीन एनर्जी परियोजनाओं पर भारी खर्च किया गया। वहीं, टेक्नोलॉजी आत्मनिर्भरता के लक्ष्य के तहत सेमीकंडक्टर और हाई-एंड मैन्युफैक्चरिंग में भी आक्रामक निवेश जारी रहा, ताकि भविष्य की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा में चीन पीछे न रह जाए।

 

यह भी पढ़ेंः 'शांति नहीं सिर्फ अमेरिका के बारे सोचूंगा', नोबेल न मिलने पर बोले ट्रंप

 

इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय सरकारों और स्टेट-ओन्ड बैंकों की भूमिका निर्णायक रही। सरकारी बैंकों के जरिए आसान क्रेडिट उपलब्ध कराया गया और स्थानीय प्रशासन ने कैपेक्स प्रोजेक्ट्स को आगे बढ़ाकर निवेश चक्र को जीवित रखा। इससे यह सुनिश्चित हुआ कि निजी क्षेत्र की सुस्ती के बावजूद कुल निवेश स्तर में तेज गिरावट न आए।

 

दरअसल, चीन की राजनीतिक-आर्थिक संरचना में GDP ग्रोथ को केवल आर्थिक आंकड़े के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि यह राजनीतिक स्थिरता और शासन की क्षमता का भी संकेत मानी जाती है। यही वजह है कि जब घरेलू खपत कमजोर पड़ी, तब निवेश-आधारित ग्रोथ को सहारे के रूप में इस्तेमाल किया गया, ताकि विकास दर एक निश्चित स्तर से नीचे न जाए और आर्थिक व राजनीतिक संतुलन बना रहे।

भारत से कम ग्रोथ फिर अच्छा कैसे?

सवाल यह भी उठता है कि जब चीन की ग्रोथ भारत से कम है तो इसे अच्छा कैसे माना जाए?क्या चीन के लिए 5% GDP ग्रोथ को अच्छा माना जाए—इसका सीधा जवाब नहीं है, क्योंकि यह पूरी तरह संदर्भ पर निर्भर करता है। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और इतने बड़े आर्थिक बेस पर 5% की वृद्धि का मतलब होता है बहुत बड़ा absolute output। यानी भले ही प्रतिशत के लिहाज़ से ग्रोथ मध्यम दिखे, लेकिन वास्तविक उत्पादन और वैश्विक असर के मामले में यह अब भी काफी विशाल होता है।

 

हालांकि, सही मूल्यांकन के लिए तुलना ज़रूरी है, खासकर भारत और चीन के संदर्भ में। भारत जहां लगभग 6.5–7% की दर से बढ़ रहा है, वह एक तेज़ी से उभरती, युवा अर्थव्यवस्था है, जो अभी catch-up growth phase में है। भारत की ग्रोथ को घरेलू खपत, इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश और अनुकूल डेमोग्राफी से मजबूती मिलती है। इसके उलट चीन लगभग 5% की ग्रोथ के साथ एक परिपक्व और बहुत बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है, जहां आबादी तेज़ी से बूढ़ी हो रही है, शहरीकरण लगभग सैचुरेशन पर है और कर्ज व रियल एस्टेट सेक्टर का दबाव बना हुआ है। इसलिए 7% भारत और 5% चीन की तुलना केवल प्रतिशत के आधार पर करना भ्रामक हो सकता है।

 

यह भी पढ़ेंः ग्रीनलैंड-वेनेजुएला-कनाडा को बनाया अमेरिका का हिस्सा! ट्रंप ने जारी किया नया मैप

 

अमेरिका से तुलना करने पर यह बात और स्पष्ट हो जाती है। अमेरिका में GDP ग्रोथ आमतौर पर 2–2.5% के आसपास रहती है, फिर भी उसे एक ‘ठीक’ और स्थिर ग्रोथ माना जाता है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका एक परिपक्व, खपत-आधारित और हाई-इनकम अर्थव्यवस्था है, जहां 2% की वृद्धि भी फुल एम्प्लॉयमेंट और मजबूत उपभोग के साथ आती है। अगर अमेरिका 5% की दर से बढ़े, तो वहां महंगाई और एसेट बबल का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

 

Related Topic:#India GDP

और पढ़ें

design

हमारे बारे में

श्रेणियाँ

Copyright ©️ TIF MULTIMEDIA PRIVATE LIMITED | All Rights Reserved | Developed By TIF Technologies

CONTACT US | PRIVACY POLICY | TERMS OF USE | Sitemap