पाकिस्तान रोजाना नया ख्वाब देखता है। मगर यह हकीकत से काफी दूर होते हैं। ताजा ख्वाब वहां के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने देखा है। ख्वाब यह कि जेएफ-17 फाइटर प्लेन के इतने ऑर्डर मिलने वाले है कि अगले छह महीने में पाकिस्तान आईएमएफ को हाथ जोड़ देगा। पाकिस्तान अब जेएफ-17 फाइटर प्लेन की बिक्री से अपना कर्ज चुकाने का सपना देख रहा है, लेकिन कर्ज की रकम इतनी अधिक है कि सच होते नहीं दिख रहा है। जेएफ-17 को पाकिस्तान और चीन ने मिलकर बनाया है। इस विमान को दुनिया के सबसे सस्ते विमानों में गिना जाता है।
एक अनुमान के मुताबिक जेएफ-17 फाइटर प्लेन के बेस वर्जन की कीमत करीब 15 मिलियन डॉलर के आसपास होती है। भारतीय रुपये में बात करें तो लगभग 120 करोड़। इसका टॉप वर्जन ब्लॉक-III लगभग 25 से 30 मिलियन डॉलर में मिल जाता है। हालांकि देश और समझौता के हिसाब से कीमत कम या ज्यादा हो सकती है।
यह भी पढ़ें: क्या ईरान के बाद तुर्की का नंबर? कैसे एर्दोगन को घेर रहा इजरायल
जेएफ-17 में किसकी कितनी हिस्सेदारी?
जेएफ-17 विमान के निर्माण में पाकिस्तान की 58 और चीन की 42 फीसद की हिस्सेदारी है। पाकिस्तान में विमान का एयरफ्रेम बनाया जाता है। वहीं चीन विमान की टेक्नोलॉजी, मिडिल और विमान के पीछे के पार्ट तैयार करता है। जेएफ-17 विमान में बहुत कम सामग्री पाकिस्तान निर्मित होती है। यही कारण है कि विमान बेचने के बावजूद पाकिस्तान को बेहद कम आमदनी होती है। कमाई का एक बड़ा हिस्सा चीन को जाता है, क्योंकि अधिकांश सामान चीन निर्मित होता है। मतलब साफ है कि अगर पाकिस्तान ने 25 मिलियन डॉलर का एक विमान बेचा तो इसका कुछ ही हिस्सा उसे मिलता है।
अब पाकिस्तानी कर्ज का गणित समझते हैं
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के मुताबिक मार्च 2025 के अंत तक पाकिस्तान में विदेशी कर्ज 130.310 बिलियन डॉलर था। इसमें आईएमएफ समेत निजी क्षेत्र का भी कर्ज शामिल है। अगर घरेलू कर्ज की बात करें तो पाकिस्तान पर करीब 51.5 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये का कर्जा चढ़ा है। कुल कर्जा 287 बिलियन डॉलर का है। पाकिस्तान की सरकार ने 2024-2025 वित्तीय वर्ष में ब्याज के तौर पर करीब 8,887 अरब पाकिस्तानी रुपये का भुगतान किया। अगर डॉलर में बात करें तो यह धनराशि लगभग 31 बिलियन डॉलर बनती है।
क्या जेएफ-17 की बिक्री से कर्ज चुकाना आसान?
पाकिस्तान की सरकार हर साल 31 बिलियन डॉलर का ब्याज चुकाती है। अगर इसी ब्याज को जेएफ-17 से चुकाना हो तो पाकिस्तान को हर साल 1,240 जहाज बनाने होंगे। अभी की आर्थिक स्थिति और इंफ्रास्ट्रक्चर के लिहाज से पाकिस्तान हर साल इतने जहाज नहीं बना सकता है। मान लीजिए कि बना भी लेता है तो इन जहाजों की बिक्री से होने वाली आमदनी का कुछ ही हिस्सा उसके खाते में आएगा। अधिकांश मुनाफा चीन ले जाएगा। मतलब साफ है कि पाकिस्तान जेएफ-17 की बिक्री से अपना ब्याज तक नहीं चुका पाएगा।
पाकिस्तान पर 130.310 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज है। मान लीजिए पाकिस्तान की सरकार को सपना आता कि जेएफ-17 की बिक्री से यह कर्ज भी चुकाया जा सकता है। मगर इस कर्ज को चुकाने की खातिर पाकिस्तान को कुल 5,212 जेएफ 17 फाइटर प्लेन बनाने होंगे। यह किसी भी तरह संभव नहीं कि पाकिस्तान निकट भविष्य में इतनी बड़ी तादाद में फाइटर प्लेन का उत्पान कर सके।
यह भी पढ़ें: व्लादिमीर पुतिन को अगवा करेगा अमेरिका? ट्रंप का गोलमोल जवाब
तो IMF से मिल जाएगा छुटकारा!
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ का दावा है कि सबकुछ ठीक रहा तो जेएफ-17 की बिक्री से ही पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को हाथ जोड़ देगा, यानी उसका कर्ज उतार देगा। आंकड़ों के मुताबिक पाकिस्तान पर आईएमएफ का अभी 8.96 बिलियन डॉलर का कर्ज है। अगर सिर्फ विमान बेचकर पाकिस्तान कर्ज चुकाना चाहेगा तो एक अनुमान के मुताबिक उसे लगभग 358 विमान बनाने और बेचने होंगे। यह किसी भी लिहाज से छह महीने में करना संभव नहीं है।
सऊदी के साथ डील हुई तो कैसे पूरा करेगा पाकिस्तान?
पाकिस्तान का दावा है कि सऊदी अरब उससे जेएफ-17 विमान खरीदेगा। 2018 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 2 बिलियन डॉलर का कर्ज दिया था। इसी कर्ज के बदले पाकिस्तान सऊदी अरब को फाइटर प्लेन बेचेगा। मतलब साफ है कि पाकिस्तान को प्लेन अपने पैसे पर बनेंगे होंगे, क्योंकि सऊदी अरब तो भुगतान पहले ही कर चुका है। बेसिक गणित के हिसाब से पाकिस्तान को 2 बिलियन डॉलर के कर्ज के बदले 80 (25 मिलियन डॉलर प्रति विमान) जेएफ-17 विमान सऊदी अरब को देने होंगे। अब सवाल यह है कि पाकिस्तान के पास 80 विमान बनाने का पैसा कहां से आएगा? उसे चीन को भी पैसा देना पड़ेगा, क्योंकि कर्ज पाकिस्तान ने लिया है चीन ने नहीं।
कौन-कौन देश खरीदना चाहते हैं जेएफ-17 विमान?
पाकिस्तान ने दावा किया कि बांग्लादेश के साथ उसकी बातचीत चल रही है। बांग्लादेश ने 16 से 24 जेएफ-17 विमान खरीदने में रुचि जाहिर की है। यह डील करीब 700 मिलियन डॉलर तक हो सकती है। पिछले साल पाकिस्तान ने लीबिया के साथ एक रक्षा सौदा किया है। इसके तहत वह लीबिया को 16 जेएफ-17 विमान सौंपेगा। यह डील 4 बिलियन डॉलर की बताई जा रही है। हालांकि इसमें विमान के अलावा अन्य उपकरण शामिल हैं।
