वेनेजुएला के बाद ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जिस तरह की धमकियां दी थीं, उसे लेकर अब यूरोप में तनाव बढ़ता जा रहा है। ट्रंप की धमकियों के बीच NATO देश ग्रीनलैंड में अपने सैनिकों को भेज रहे हैं। डेनमार्क के साथ जॉइंट एक्सरसाइज में हिस्सा लेने के लिए ये सैनिक जा रहे हैं।
ट्रंप की धमकियों से NATO पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। वेनेजुएला में सैन्य कार्रवाई के बाद ट्रंप ने धमकी दी थी कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कंट्रोल होना चाहिए। ट्रंप ने यह भी कहा था कि जरूरत पड़ने पर वह मिलिट्री फोर्स का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। इसके बाद यूरोपीय नेताओं ने एक साझा बयान जारी कर कहा था कि ग्रीनलैंड वहां के लोगों का है और उसके बारे में फैसला लेने का अधिकार सिर्फ ग्रीनलैंड और डेनमार्क के पास है।
ट्रंप की धमकियों पर पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा था कि 'किसी भी सदस्य को NATO को दूसरे सदस्य पर न तो हमला करना चाहिए और न ही धमकाना चाहिए, वरना NATO का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।'
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कौन-कौन से देश भेज रहे सैनिक?
वहीं, अब डेनमार्क ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर हमला NATO को खत्म कर देगा और एलान किया कि वह NATO सदस्यों के साथ मिलकर अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। ग्रीनलैंड, डेनमार्क की कॉलोनी है।
इसे लेकर अब NATO मुल्क लामबंद होते जा रहे हैं। जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस और नॉर्वे ने पुष्टि की है कि वे इस हफ्ते डेनमार्क के सैनिकों के साथ जॉइंट एक्सरसाइज के लिए ग्रीनलैंड में सैनिक भेज रहे हैं।
कनाडा और फ्रांस ने ये भी कहा है कि वे आने वाले हफ्तों में ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में दूतावास खोलने की योजना बना रहे हैं।
डेनमार्क के न्योते पर जर्मनी 13 सैनिकों को भेज रहा है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भी बताया कि स्वीडिश सैनिक डेनमार्क में 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' नाम की मिलिट्री एक्सरसाइज में हिस्सा लेंगे।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि फ्रांस भी 'ऑपरेशन आर्कटिक एंड्योरेंस' में हिस्सा लेगा। उन्होंने X पर लिखा, 'पहली फ्रांसीसी मिलिट्री यूनिट पहले ही रास्ते में हैं। बाकी भी आएंगी।'
वैसे तो NATO देशों के लिए दूसरे NATO देशों में ट्रेनिंग या एक्सरसाइज के लिए अपने सैनिकों को भेजना कोई नई बात नहीं है, लेकिन अभी जिन हालातों में ये सब हो रहा है, वह NATO के अंदरूनी तनाव को दिखाता है।
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क्या कुछ होने वाला है?
वेनेजुएला में 3 जनवरी को अमेरिकी सेना ने ऑपरेशन चलाया था और वहां के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया था। इसके बाद ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर भी अपने इरादे जाहिर कर दिए थे।
ट्रंप ने कहा था कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का कंट्रोल होना चाहिए, क्योंकि डेनमार्क उसकी सुरक्षा नहीं कर पा रहा है। ट्रंप ने इसके पीछे तर्क दिया था कि 'ग्रीनलैंड हर जगह रूसी और चीनी जहाजों से भरा हुआ है। हमें राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से ग्रीनलैंड की जरूरत है और डेनमार्क ऐसा नहीं कर पाएगा।'
अब ट्रंप की धमकियों के बाद NATO देश एकजुट हो रहे हैं। NATO एक मिलिट्री अलायंस है। इसमें अमेरिका और कनाडा समेत 30 देश शामिल हैं। इसे इसलिए बनाया गया था कि अगर किसी एक सदस्य पर हमला होता है तो इसे सभी पर हमला माना जाएगा।
हालांकि, डेनमार्क के रक्षा मंत्री टीएल पॉलसेन ने ग्रीनलैंड पर अमेरिकी हमले को 'पूरी तरह से काल्पनिक' बताया। उन्होंने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'यह संभावना नहीं है कि कोई NATO देश किसी दूसरे NATO देश पर हमला करेगा।'
