दुनिया की बड़ी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनियों में शामिल Stryker पर एक बड़े साइबर हमले की खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी के ग्लोबल नेटवर्क को निशाना बनाते हुए ईरान के समर्थन वाले एक हैकर ग्रुप ने यह साइबर हमला किया है। इस हमले से कॉर्क में स्थित प्लांट्स में हजारों कर्मचारी प्रभावित हुए। हमले के कारण हजारों कर्मचारियों का कामकाज अचानक ठप पड़ गया। हैकर्स ने दावा किया कि उन्होंने अमेरिका के हमलों का बदला लेने के लिए यह अटैक किया है। 


मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि हमले के बाद कंपनी के कई सिस्टम बंद हो गए और कर्मचारियों को अपने लैपटॉप पर लॉगिन करने और कंपनी नेटवर्क को एक्सेस करने में दिक्कत हुए। कई कर्मचारियों ने बताया कि उनके डिवाइस की लॉगिन स्क्रीन पर एक हैकर ग्रुप का लोगो दिखाई देने लगा, जिससे साइबर हमले की पुष्टि हुई। इस हमले के दौरान कर्मचारियों की तमाम कोशिशों के बाद उनके अकाउंट ओपन नहीं हुए। कर्मचारियों के अनुसार, उनका डेटा हैकर्स ने मिटा दिया है। 

 

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अमेरिका की कंपनी है Stryker

Stryker अमेरिका की एक बड़ी मेडिकल टेक्नोलॉजी कंपनी है जिसका मुख्यालय मिशिगन में स्थित है। आयरलैंड में इस मल्टी नेशनल कंपनी के 5,000 तक कर्मचारी हैं। यह कंपनी अस्पतालों और डॉक्टरों के लिए सर्जिकल उपकरण, आर्थोपेडिक इम्प्लांट, न्यूरोटेक्नोलॉजी और अन्य मेडिकल डिवाइस बनाती है। कंपनी का कारोबार दुनिया के 60 से ज्यादा देशों में फैला हुआ है और इसमें करीब 56 हजार कर्मचारी काम करते हैं। इस कंपनी के प्रोडक्ट दुनिया भर के अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं में इस्तेमाल होते हैं। इसलिए इस साइबर हमले को वैश्विक स्वास्थ्य तकनीक क्षेत्र के लिए भी चिंता का विषय माना जा रहा है।

 

रिपोर्ट्स के अनुसार, इसे एक साइबर वाइपर अटैक माना जा रहा है। इस तरह के हमले में डेटा मुख्य टारगेट होता है और आईटी सिस्टम से मिटाया गया डेटा फिर से नहीं मिल सकता है। ऐसे अटैक में हैकर सिस्टम का डेटा मिटाने या सिस्टम को काम करने लायक ना छोड़ने की कोशिश करते हैं। आमतौर पर साइबर अटैक पैसा लूटने के लिए किए जाते हैं लेकिन वाइपर अटैक को राजनीतिक मकसद से किया जाता है। 

हजारों कर्मचारियों पर पड़ा असर

रिपोर्ट के मुताबिक इस साइबर हमले का असर कंपनी के कई देशों में फैले कर्मचारियों पर पड़ा। खासतौर पर आयरलैंड के कॉर्क स्थित प्लांट में हजारों कर्मचारियों के सिस्टम पर इस हमले का असर देखा गया। हमले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कर्मचारी अपने लैपटॉप ओपन ही नहीं कर पाए। कई कर्मचारियों को अपने काम के लिए इस्तेमाल होने वाले डिवाइस और अकाउंट का भी एक्सेस नहीं मिल पाया। 

 

कंपनी के इंटरनल नेटवर्क में गड़बड़ी के कारण कई सिस्टम अस्थायी रूप से बंद करने पड़े। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि कर्मचारियों के डिवाइस और कंपनी के कई सर्वर प्रभावित हुए जिससे कामकाज रुक गया।

 

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किसने किया हमला?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक इस हमले के पीछे हंडाला नाम का हैकर ग्रुप हो सकता है। कंपनी के कर्मचारियों ने हमले के दौरान जब अपने लैपटॉप और सिस्टम ओपन करने की कोशिश की तो उन्हें सक्रीन पर हंडाला का ही लॉगो दिखाई दिया। यह ग्रुप पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों और कंपनियों पर साइबर हमलों की जिम्मेदारी लेने का दावा कर चुका है।

हैकर्स ने क्या कहा?

मीडियो रिपोर्ट्स के अनुसार, हैकरों ने सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि यह हमला उन्होंने राजनीतिक कारणों से किया है। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यह हमला मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष और सैन्य टकराव के जवाब में किया गया है। 

 

हैकर्स का कहना है कि उन्होंने ईरान में लड़कियों के स्कूल पर अमेरिका की बमबारी का बदला लेने के लिए कंपनी को टारगेट किया। उनका कहना है कि उन्होंने कंपनी के 2 लाख से ज्यादा सिस्टम, सर्वर और मोबाइल डिवाइस मिटा दिए हैं और 50 टेराबाइट जरूरी डेटा चुरा लिया है, जिससे 79 देशों में Stryker के ऑफिस बंद करने पड़े हैं।