पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के दौरान ईरान ने अमेरिका और इजरायल को अपने हमलों का दायरा और बड़ा करने की धमकी दी। ईरान ने अरब खाड़ी देशों ने मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे इस युद्ध के फिलहाल बंद होने की कम संभावना है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अमेरिका और इजरायल के साथ संबंधों को लेकर बात की। दरअसल, इधर खबर फैली कि अमेरिका के रिश्ते इजरायल के साथ खराब हो रहे हैं।

 

उन्होंने कहा कि इजरायल के साथ खराब रिश्ते की खबर यह एक और फेक न्यूज है। ट्रंप ने पूछने के लहजे में कहा कि क्या बेंजामिन नेतन्याहू के साथ मेरी कोई बहस हुई है? उन्होंने कहा, 'नहीं, हम सच में अच्छे से मिलते हैं और वह आपको बताएंगे कि हम पूरे युद्ध को लीड कर रहे हैं। मैं कहूंगा कि नेतन्याहू के साथ मेरा रिश्ता बहुत अच्छा है।'

 

 

 

 

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फेक न्यूज फैला रहा ईरान- ट्रंप

वहीं, ईरान द्वारा सीजफायर की मांग के उनके दावे को खारिज करने की खबरों पर डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, 'वे जनता को नहीं बताएंगे। मैंने बस उनकी गलत जानकारी के बारे में सच सामने रखा है। ईरान ने कहा कि उन्होंने यूएसएस अब्राहम लिंकन पर हमला किया। लिंकन पर कभी हमला नहीं हुआ।'

मीडिया कंपनियों को ट्रंप की धमकी

उन्होंने आगे कहा, 'शुरू करने से पहले मुझे इसका एहसास नहीं था, लेकिन ईरान बहुत सारी फेक न्यूज के लिए जाना जाता है। वे हमारी फेक न्यूज से निपटते हैं और मुझे सच में लगता है कि यह बहुत आपराधिक किस्म की चीज है क्योंकि हमारी मीडिया कंपनियां, जिनकी कोई साख नहीं है, ऐसी जानकारी दे रही हैं जिसके बारे में उन्हें पता है कि वह झूठी है। यह देश के लिए बहुत खतरनाक बात है। मुझे लगता है कि वे गंभीर खतरे में पड़ सकते हैं।'

 

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युद्ध में फेक न्यूज का सहारा

बता दें कि इस समय ईरान, इजरायल और अमेरिका फेक न्यूज का सहारा ले रहे हैं। पिछले दिनों खबर आई कि बेंजामिन नेतन्याहू हमले में मारे गए हैं लेकिन रविवार को नेतन्याहू ने अपने सोशल मीडिया पर अपनी एक कॉफी पीते हुए वीडियो डाली। यह फेक खबर ईरान ने फैलाई थी। इसी तरह से अमेरिका भी ईरान को लेकर कई भ्रामक दावे कर रहा है।

 

इजरायल और अमेरिका ने 28 फरवरी को यह कहते हुए ईरान पर हमला किया था कि वे ईरान के परमाणु व सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं और ईरान के लोगों से भी अपने नेताओं के खिलाफ खड़े होने का आह्वान किया था। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और फारस की खाड़ी के आसपास के पड़ोसी देशों पर हमले किए। इस संघर्ष के कारण वैश्विक विमानन सेवाएं अस्त-व्यस्त हो गई हैं, तेल निर्यात बाधित हुआ है और दुनियाभर में ईंधन की कीमतों में बढोतरी हुई है।