दशकों से जिस 'ड्रग लॉर्ड' के आतंक से अमेरिका परेशान था, जिसे मारने के लिए 15 मिलियन डॉलर का ईनाम घोषित किया था, उसे एक सैन्य ऑपरेशन में मेक्सिको ने मार गिराया है। ड्रग लॉर्ड के तौर पर कुख्यात नेमेसियो रुबेन ओसेगुएरा सर्वांटेस उर्फ 'अल मेंचो' एक एनकाउंट में ढेर हुआ है। हमेशा की तरह, इस बार भी उसके मारे जाने का क्रेडिट, अमेरिका ने ले लिया है। सच्चाई यह है कि मेक्सिको के ड्रग सिंडिकेट, हमेशा से अमेरिका और कनाडा के लिए चुनौती रहे हैं। करोड़ों डॉलर के इनाम, हर बार अमेरिका घोषित करता है लेकिन ये ड्रग सिंडिकेट, अमेरिका के लिए नासूर बने रहते हैं।
अल मेंचो के मारे जाने से सबसे ज्यादा खुश अमेरिका है। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने बताया है कि अमेरिका ने मैक्सिको की सरकार को खुफिया जानकारी देकर मदद की। इस मदद से मैक्सिको के जलिस्को राज्य के ताल्पा इलाके में एक ऑपरेशन हुआ, जिसमें जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल (CJNG) के सरगना नेमेसियो 'एल मेंचो' को मार गिराया गया।
यह भी पढ़ें: 'घर से ना निकलें, भीड़ से बचें', मेक्सिको में मौजूद भारतीयों के लिए अडवाइजरी
एल मेंचो की मौत से अमेरिका खुश क्यों?
एल मेंचो अमेरिका और मैक्सिको दोनों के लिए बहुत बड़ा टारगेट था। वह अमेरिका में फेंटेनिल जैसी खतरनाक ड्रग्स भेजने वाला सबसे बड़ा तस्कर माना जाता था। पिछले साल अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने इस कार्टेल को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किया था। गैंग के काम करने का तरीका, ठीक वैसे ही है, जैसे कोई आतंकी संगठन काम करता है।
कैरोलिन लेविट, व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी:-
राष्ट्रपति ट्रंप साफ कह चुके हैं, जो नार्को टेररिस्ट अमेरिका में जानलेवा ड्रग्स भेजते हैं, उन्हें अब सख्त सजा मिलेगी। अमेरिका ने मैक्सिको की सेना का शुक्रिया अदा किया है। उनकी सफलता की तारीफ की है। यह ऑपरेशन ड्रग तस्करी के खिलाफ अमेरिका-मैक्सिको की मिली-जुली लड़ाई में बड़ा कदम माना जा रहा है।
नार्को टेररिस्ट हैं अमेरिका के लिए नासूर
अमेरिका और मेक्सिको के बीच की सीमा करीब 3,145 किलोमीटर लंबी है। कैलिफोर्निया से टेक्सास तक फैली सीमा पर का हर इलाका संवेदनशील है। मेक्सिको में सैकड़ों छोटे-छोटे ड्रग सिंडिंकेट हैं, जिन्हें वहां की सरकार ट्रेस नहीं कर पाती है। कई इलाके ऐसे हैं, जहां माफिया समानांतर सरकार चलाते हैं, पुलिस और सेनाएं, उनके सामने बेबस रहती हैं।
मेक्सिको और अमेरिका की सीमाएं कई जगहों पर केवल कुछ फीट तक सिमटीं हैं। कई जगहों पर बाड़ और बाउंड्री से इन्हें विभाजित किया गया है। ड्रग तस्करी, रियो ग्रांडे नदी के तटीय हिस्सों में भी होती है। यही नदी मेक्सिको और अमेरिका के एक बड़े हिस्से को विभाजित भी करती है। अमेरिका, सख्त विजिलेंस के बाद भी कभी पूरी तरह से मेक्सिको से आने वाले ड्रग को कंट्रोल नहीं कर पाया।
यह भी पढ़ें: मेक्सिको का खूंखार ड्रग लॉर्ड El Mencho खत्म, थर्राते थे कनाडा और USA
मेक्सिको अमेरिका की टेंशन कैसे बढ़ाता है?
अमेरिका के 'ऑफिस ऑफ पब्लिक अफेयर' ने 21 जनवरी 2026 को एक डोजियर तैयार किया था। इसमें कहा कहा गया था कि मेक्सिको को 37 ड्रग माफिया ऐसे हैं, जिन्हें अमेरिका ने पकड़ लिया है। फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI), ड्रग एनफोर्समेंट एडमिनिस्ट्रेशन (DEA) और सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (CIA) मिलकर भी इन अपराधियों का बाल बांका नहीं कर पाते हैं। इन्हें अमेरिका माफिया संरक्षण देते हैं, लेकिन इन्हें मेक्सिको से ही ऑपरेट किया जाता है।
अमेरिका की कैद में मेक्सिको के कई कुख्यात अपराधी हैं, जिनकी नार्को टेररिज्म, टेरर फंडिंग, हथियार तस्करी, मानव तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, मेथमफेटामाइन, फेंटेनिल और कोकीन की ड्रग तस्करी में संलिप्तता रही है।
अमेरिका में तांडव मचाने वाले ड्रग सिंडिकेट का सबसे बड़ा नाम कार्टेल दे जलिस्को नुएवा जेनेरेशन (CJNG) है। इसी का मुखिया अल मेंचो मारा गया है। फरारी सिनालोआ कार्टेल, कार्टेल डेल नोरेस्टे और गल्फ कार्टेल सहित कई खतरनाक ड्रग कार्टेल अमेरिका की मुश्किलें बढ़ाते हैं।
यह भी पढ़ें: अमेरिका के बाद मेक्सिको ने भारत पर लगाया 50% टैरिफ, कितना होगा असर?
मेक्सिको, ड्रग कार्टेल का सेंटर बनाने वाले संगठन कौन से हैं?
- जलिस्को न्यू जनरेशन कार्टेल: अल मेंचो, इस गिरोह का सरगना था। यह मैक्सिको का सबसे बड़ा नार्को टेररिस्ट संगठन है। रविवार को ही अल मेंचो मारा जा चुका है। साल 2009 में इस गिरोह की शुरुआत हुई थी। यह 'सिनालोआ कार्टेल' का हिस्सा था। CJNG के पास अपनी सेना है। हथियार हैं, बख्तरबंद गाड़ियां हैं। रॉकेट लॉन्चर और मिसाइल भी हैं। नई झड़प में भी ड्रोन और रॉकेट लॉन्चर से कई हमले हुए लेकिन मैक्सिकन आर्मी ने इन्हें मार गिराया है। अमेरिका को इस संगठन ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाता है। यही संगठन है, जिसकी वजह से अमेरिका और कनाडा में फेंटानिल, मेथामफेटामाइन, कोकीन और हेरोइन की तस्करी अपने चरम पर है। जबरन वसूली, तेल चोरी, और मानव तस्करी जैसे अपराध इस संगठन के लिए आम है।
- गल्फ कार्टेल: एक जमाने में यह मैक्सिको का सबसे शक्तिशाली संगठन रहा है। गल्फ कार्टेल अब अपने अस्तित्व को बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। यह मटामोरोस से संचालित होता है। 1970 के दशक में इसकी नींव पड़ी थी। 'लॉस जेटास' ने साल 2009 में इससे अलग होकर अपना स्वतंत्र गुट बनाया था। इसका सरगना जॉर्ज एडुआर्डो कोस्टिला सांचेज है। दुनिया के लोग इसे एल कॉस के नाम से जानते हैं। इसके पास बुलेटप्रूफ स्टील प्लेटों वाली ट्रकें हैं, जिन्हें केवल एंटी-टैंक ग्रेनेड से ही तोड़ा जा सकता है। अभी यह ड्रग आंतकी जेल में है।
- लॉस जेटास: इस नार्को टेररिस्ट संगठन का गठन, मैक्सिकन सेना के रिटायर कमांडो के एक समूह ने की थी। ज्यादातर लड़ाके, 'द ग्रुप एरोमोविलेस डे फ्युरजास स्पेशियालिज' से आए हैं। यह अपनी क्रूरता के लिए बदनाम है। यह संगठन गल्फ कार्टेल से अलग होकर अब खुद एक बड़ा ड्रग सिंडिकेट बन चुका है। कई देशों में इसके तार फैले हैं। इसके कई कमांडर गिरफ्तार हैं। इन्हें बनाने वाले हेरीबर्टो लाजकानो और ट्रेविनो मोरालेस अभी भी कानून की पहुंच से बाहर हैं।
- ला फामिलिया: यह संगठन धर्म की आड़ में अपराध को अंजाम देता है। यह नार्को संस्था, मिशोआकान में है और धार्मिक पंथ की तरह काम करता है। इसके संस्थापक नाजारियो मोरेनो गोंजालेज ने सदस्यों के लिए एक 'स्प्रिचुअल मैनुअल' अनिवार्य किया था। संस्था के गुंडे, समाज सेवा के नाम पर उन लोगों को मार देता है, जो इसकी बातें नहीं मानते हैं। अब यह बंट चुका है, 'नाइट्स टेम्पलर' इसी गुट से अलग होकर बना है।
- सिनालोआ कार्टेल: यह सबसे अमीर और ताकतवर संगठन है। इसका नेतृत्व अभी चापो परिवार के पास है। एल चापो की निजी संपत्ति 1 बिलियन से ज्यादा है। दुनियाभर की नजरें इस संगठन पर टिकी हैं, फिर भी यह संगठन अमेरिका में धड़ल्ले से ड्रग तस्करी करता है। पूरी टॉप लीडरशिप या तो मारी जा चुकी है, या अदालों में है, फिर भी सिनालोआ आज भी तस्करी के मुख्य रास्तों पर राज कर रहा है।
- बेल्ट्रान लेयवा ऑर्गेनाइजेशन: यह संगठन कभी सिनालोआ कार्टेल का हिस्सा था, लेकिन साल 2008 में यह अलग हो गया। इसे चार भाइयों ने मिलकर खड़ा किया था। आर्टुरो, कार्लोस, अल्फ्रेडो, तीनों खत्म हो चुके हैं। अभी यह संगठन, हेक्टर चला रहा है।
- जुआरेज कार्टेल: अमेरिका की सीमा पर खूनी खेल, यही संगठन खेलता है। इसे विन्सेंट कैरिलो फ्यूएंट्स चलाता था। इनके पास 'ला लिनिया' नामक एक खतरनाक विंग है, जिसमें भ्रष्ट पुलिस अधिकारी शामिल हैं। हर सप्ताह यह संगठन 200 मिलयन डॉलर से ज्यादा कमाता है।
- तिजुआना कार्टेल: आरेलानो फेलिक्स के परिवार ने कई साल तक, इस कुख्यात सिंडिकेट को चलाया था। अब मैक्सिको के सबसे बड़े गिरोहों में शामिल रहा है। अब इसकी बागडोर, लुइस फर्नांडो सांचेज के हाथ में है। अब सिनालोआ कार्टेल धीरे-धीरे इसका काम छीन रहा है।
वेनेजुएला जैसा मेक्सिको का हाल क्यों नहीं कर पाए ट्रंप?
क्लाउडिया शीनबाम, राष्ट्रपति, मेक्सिको:-
ड्रग कार्टेल के खिलाफ कोई भी अमेरिकी सैन्य कार्रवाई मैक्सिकन सेना के सहयोग से की जाए। मेक्सिको की संप्रभुता से समझौता नहीं किया जा सकता है। हम मेक्सिको में अमेरिकी सैन्य गतिविधियां नहीं चाहते हैं। मेक्सिको का लक्ष्य समन्वय और सहयोग है, आक्रमण या अधीनता नहीं।
क्लाउडिया शीनबाम ने 27 फरवरी 2025 में यह बात खुले मन से कही थी। वह मेक्सिको में विदेशी एजेंटों के काम पर अंकुश लगाने के लिए संविधान में संशोधन भी कर रही हैं। ऐसे में अमेरिका का मेक्सिको में दखल और मुश्किल होने वाला है।
मेक्सिको, लैटिन अमेरिका का अहम देश है, जिससे पंगा लेकर अमेरिका सिर्फ अपनी मुश्किलें बढ़ा सकता है और कई छुटपुट गिरोहों के पैदा करने का मौका दे सकती है। 'ग्लोबल फायर पावर' की लिस्ट में मेक्सिको 36वें पायदान पर है, वेनेजुएला कमजोर देश है, 56वें पायदान पर है। सुरक्षा के लिए पूरी तरह से क्यूबा पर निर्भर है। ऐसे में मेक्सिको से सीधा सैन्य टकराव, ट्रंप नहीं मोल से सकते हैं।
'ग्लोबल फायर पावर' इंडेक्स की रिपोर्ट बताती है कि मेक्सिको में 6 लाख से ज्यादा सैनिक हैं। मेक्सिको के पास सक्रिय वायुसेना, सेना और नौसेना है। बैकअप आर्मी, 98,653 से ज्यादा है। अगर सीधी सैन्य कार्रवाई अमेरिका करता है तो लैटिन अमेरिका के दूसरे देश नाराज हो जाएंगे। चौतरफा टकराव, अमेरिका खुद नहीं झेलना चाहता है।
यह भी पढ़ें: हत्या का बवाल करप्शन और क्राइम तक पहुंचा, मेक्सिको के Gen-Z प्रोटेस्ट की कहानी
कहां कमजोर पड़ जाते हैं डोनाल्ड ट्रंप?
व्हाइट हाउस के भीतर ही मेक्सिको लेकर भ्रम की स्थिति है। सैन्य गुट चाहते है कि अलग-अलग कार्टेल को विदेशी आतंकी संगठन मारकर सैन्य हमले की इजाजत दी जाए। चुनौती यह है कि अगर मेक्सिको पर सैन्य कार्रवाई की जाए तो मैक्सिकन सरकार के साथ सहयोग टूट जाएगा, जिससे दूसरी प्राथमिकताएं खत्म हो जाएंगी। फिर मेक्सिको से अवैध प्रवासन रोकना असंभव हो जाएगा। सैन्य कार्रवाई की ओट में मेक्सिको के रास्ते लोग अमेरिका में दाखिल होंगे।
मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लाउडिया शाइनबाम ने स्पष्ट कर दिया है कि वे अपनी धरती पर अमेरिकी सेना की स्वतंत्र गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं करेंगी। मेक्सिको चाहता है कि केवल खुफिया जानकारी साझा की जाए। अगर अमेरिका बिना अनुमति के कार्रवाई करता है तो मेक्सिको अपने देश में काम कर रहे अमेरिकी एजेंटों को बाहर किया जाएगा। फिर CIA, FBI और DEA जैसी एजेंसियां बेकार हो जाएंगी।
मेक्सिको विदेशी एजेंटों की गतिविधियों को सीमित करने के लिए कानून बदलने की तैयारी में है, जो भविष्य के ऑपरेशन्स को और कठिन बना देगा। टकराव की स्थिति में मेक्सिको इसे अध्यादेश के तौर पर ला सकता है। अमेरिका के लिए ड्रग्स अकेला मुद्दा नहीं है। उसे मेक्सिको की मदद चाहिए, जिसेस लाखों प्रवासियों को अमेरिकी सीमा तक पहुंचने से रोका जा सके। अगर मेक्सिको, मदद न करे को अमेरिका घुसपैठ का अड्डा बन जाएगा। अमेरिकी टैरिफ की वजह से पहले ही मेक्सिको के लोग नाराज हैं।
इतने मजबूत क्यों हैं ड्रग कार्टेल?
मेक्सिको में सरकार कमजोर है, कई इलाकों में नियंत्रण नहीं है। अल मेंचो की मौत के बाद वहां गृह युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। ड्रग कार्टेल केवल अपराधी नहीं हैं, बल्कि उनके पास मजबूत सैन्य क्षमता है, बेशुमार पैसा है, मनी लॉन्ड्रिंग का कारोबार है। अमेरिका और कनाडा में मौजूदा ड्रग स्मगलिंग सिंडिकेट, खुद, मैक्सिकन सिंडिकेट की मदद करते हैं। मेक्सिको की सरकार में शामिल मंत्री भी, इन अपराधों में शामिल रहे हैं। कई पूर्व सैन्य अधिकारी, खुद को ड्रग कार्टेल से जोड़ लेते हैं। विजिलेंस के बाद भी अवैध कारोबार पर न तो मेक्सिको की सरकार का निंयत्रण है, न ही अमेरिका, अपनी सीमा पर नजर रख पाता है।
