यूरोपीय संघ ने ईरान के खिलाफ बड़ा एक्शन लिया है। संघ ने प्रदर्शनकारियों की हत्या के जिम्मेदार अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया। यूरोपीय विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने गुरुवार को एक्स पर लिखा 'ईरान के सुरक्षा बल बड़े पैमाने पर हत्याओं के जिम्मेदार हैं। आज हम उन लोगों पर नए प्रतिबंध लगा रहे हैं, जो विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार हैं। प्रदर्शनों में हजारों लोग मारे गए हैं।'
उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) को आतंकवादी सूची में डालने पर भी सहमति बनी है। उन्होंने आगे कहा, 'यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित करने का निर्णायक करेंगे। कोई भी शासन, जो अपने ही हजारों लोगों की हत्या करता है, वह अपने ही पतन की तरफ अग्रसर है।'
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इजरायल ने आईआरजीसी को आतंकी सूची में डालने के कदम का स्वागत किया है। इजरायली विदेश मंत्री गिदोन साआर ने कहा, 'यह एक अहम और ऐतिहासिक निर्णय है। इजराइल वर्षों से इस दिशा में काम कर रहा है। हाल के हफ्तों में तो और भी अधिक तीव्रता के साथ काम किया।' उनका मानना है कि आईआरजीसी को आतंकवाद फैलाने और इलाके को अस्थिर करने वाली नंबर एक ताकत है। इस कदम से यूरोप में इन गतिविधियों को रोका जा सकेगा और अपनी आजादी की लड़ाई लड़ने वाले ईरानी लोगों को अहम संदेश भेजा जा सकेगा।
ईरान में अब तक कितनी मौतें
ईरान में मृतकों की संख्या के मामले में दुनिया कई धड़ों में बंटी है। अलग-अलग रिपोर्ट में मुख्तलिफ दावे हैं। टाइम्स मैगजीन ने ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के दो वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से बताया कि 8 और 9 जनवरी को ईरान की सड़कों पर 30 हजार लोगों की हत्या की गई। एंबुलेंस कम पड़ गईं। शवों को ट्रकों में भरकर लाया गया।
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यहां तक कि शवों को ढकने वाली पॉलीथिन भी कम पड़ गई। ईरान सरकार का कहना है कि प्रदर्शन में 3117 लोगों की जान गई है। वहीं अमेरिका स्थित मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी ने दावा किया कि 5,459 मौतों की पुष्टि हुई है। 17 हजार से अधिक मामलों की जांच चल रही है।
