अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तानाशाह जैसा व्यवहार करने में जुटे हैं। अगर कोई नेता उनसे असहमत होता है तो उसे वह खुलेआम धमकी देते हैं। उस देश को नतीजे भुगतने की बात कहते हैं। दुनिया के अधिकांश नेता ट्रंप से बहस की जगह बायपास करने की नीति अपनाने में जुटे हैं। मगर तमाम धमकियों के बावजूद कुछ ऐसे नेता भी हैं, जो ट्रंप के सामने झुकाने को तैयार नहीं हैं। उनके साथ क्या होगा, यह भविष्य ही बताएगा, लेकिन दो बड़े नेताओं के साथ अमेरिका ने क्या किया है, इसे दुनिया देख चुकी है। आइये जानते हैं उन नेताओं के बारे में, जो पिछले एक साल में ट्रंप से भिड़ चुके हैं।
अली खामेनेई: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को 28 फरवरी की सुबह अमेरिका और इजरायल ने मार डाला। अमेरिका ने ईरान को 10 दिन का समय दिया था। दो मार्च को यह समय सीमा खत्म हो रही थी। मगर दो दिन पहले ही एयर स्ट्राइक में अली खामेनेई की जान ले ली गई। अमेरिका उन पर नरसंहार, दमन और आतंक फैलाने का आरोप लगाता है। सबसे बड़ा आरोप परमाणु बम बनाने का है। ईरान कई बार इसका खंडन कर चुका है। तेहरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांति और नागरिक उद्देश्यों के लिए है। अली खामेनेई के सामने अमेरिका से समझौता करने का विकल्प था। मगर उन्होंने दूसरा रास्ता चुना।
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निकोलस मादुरो: पिछले कार्यकाल से ही वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और ट्रंप के बीच तनातनी चल रही थी। दूसरे कार्यकाल में यह चरम पर पहुंच गई। अमेरिका की निगाह वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर है। उसने मादुरो पर चुनाव में धांधली और विरोधियों के दमन का आरोप लगाया। अमेरिका ने कई बार समझौता करने का दबाव बनाया, लेकिन मादुरो झुके नहीं। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने ट्रंप को पकड़ने की धमकी भी दी थी। इसी साल 3 जनवरी की तड़के अमेरिकी सेना ने एक ऑपरेशन में मादुरो को उनकी पत्नी के साथ अगवा करके अमेरिका उठा ले गई।
सिरिल रामफोसा: डोनाल्ड ट्रंप और सिरिल रामफोसा के झगड़े को भी दुनिया जानती हैं। पिछले साल रामफोसा अमेरिका गए थे। ओवल ऑफिस में ट्रंप से मुलाकात की थी। मगर यह मुलाकात झगड़े में बदल गई थी। ट्रंप ने अफ्रीकी सरकार पर फर्जी तरीके से श्वेत लोगों के नरसंहार का आरोप लगाया। जवाब में रामफोसा ने कहा था कि मेरे पास आपको देने के लिए जहाज नहीं है। दरअसल, कुछ दिन पहले ही कतर ने एक लग्जरी जहाज ट्रंप को गिफ्ट किया था। रामफोसा का इशारा इसी तरफ था। दोनों के बीच विवाद जी-20 सम्मेलन के दौरान और बढ़ गया। ट्रंप ने दक्षिण अफ्रीका में आयोजित जी20 सम्मेलन का बहिष्कार किया और इस साल अमेरिका में आयोजित समिट से प्रतिबंधित कर दिया।
गुस्तावो पेट्रो: कोलंबिया के राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो कई मौकों पर ट्रंप से सीधे भिड़ चुके हैं। पिछले साल गुस्तावो पेट्रो ने ट्रंप की आव्रजन नीति का खुलकर विरोध किया था। लोगों को हथकड़ी के साथ अमेरिका से निकालने की खबरों के बाद पेट्रो ने अमेरिकी जहाजों को कोलंबिया के एयरस्पेस में घुसने से मना कर दिया था। ट्रंप ने 30 फीसद टैरिफ की धमकी दी। मगर अमल अभी तक नहीं किया। जब निकोलस मादुरो को अगवा किया गया तो भी पेट्रो ने खुलकर ट्रंप का विरोध किया। उन्होंने गिरफ्तार करने की चुनौती तक दे डाली। जवाब में ट्रंप ने कोलंबिया पर ड्रग्स रॉकेट चलाने का आरोप लगाया। पिछले साल कोलंबियाई राष्ट्रपति ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर हजारों फिलिस्तीन समर्थक की रैली को संबोधित किया। बाद में अमेरिका ने उनका वीजा भी रद्द कर दिया था।
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पेड्रो सांचेज: ट्रंप से साथ ताजा विवाद स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज का हुआ। सांचेज ने ईरान के खिलाफ अपने रोटा और मोरोन एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति अमेरिका को नहीं दी। स्पेन की सरकार ने गाजा, वेनेजुएला, यूक्रेन और ईरान मामले में अमेरिका के खिलाफ रुख अपनाया है। मगर ताजा मामले ने ट्रंप को नाराज कर दिया। बेस पर पाबंदी लगाने की जानकारी मिलने के बाद ट्रंप ने स्पेन के साथ सभी तरह के व्यापार बंद करने की धमकी दी और कहा कि स्पेन का रवैया बेहद खराब है। ट्रंप ने यह भी धमकी दी कि हम चाहें तो अड्डे का इस्तेमाल कर सकते हैं। हमें कोई रोक नहीं सकता है।
