भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश चुनाव के मुहाने पर खड़ा है। अगस्त 2024 में तख्तापलट के लगभग डेढ़ साल बाद देश में चुनाव होने जा रहे हैं और पूरी उम्मीद जताई जा रही है कि बांग्लादेश के लोग एक नई सरकार चुनने जा रहे हैं। फिलहाल देश की बागडोर मोहम्मद युनुस की अंतरिम सरकार के हाथ में है और शेख हसीना की अवामी लीग के चुनाव लड़ने पर बैन लग चुका है। लंबे समय तक विदेश में रहे खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान देश लौट आए हैं और चुनावी मैदान में हैं।

 

तारिक रहमान के अलावा कई छात्र संगठन, पुराने राजनीतिक दल, इन दलों के गठबंधन और निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं। अगर किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में एक बार फिर से बांग्लादेश में उठापटक देखने को मिल सकती है। ऐसे में लोगों के मन में सवाल उठते हैं कि आखिर बांग्लादेश में चुनाव होते कैसे हैं? जनप्रतिनिधियों और फिर प्रधानमंत्री चुने जानी की प्रक्रिया कैसी होती है? आइए सारे सवालों के जवाब जानते हैं।

कैसा है बांग्लादेश का सिस्टम?

 

बांग्लादेश की मौजूदा जनसंख्या लगभग 17 करोड़ है जिसमें से 12.7 करोड़ लोग वोटर हैं।  इसमें से 90 प्रतिशत मुस्लिम हैं, 8 प्रतिशत हिंदू हैं और बाकी के 2 प्रतिशत में अन्य धर्मों के लोग हैं। बांग्लादेश में भी चुनी हुई सरकार की देश को चलाती है। ठीक भारत की तरह, बांग्लादेश में भी एक संसद है, प्रधानमंत्री चुने जाते हैं, लोग वोट डालते हैं और अपनी सरकार चुनते हैं। बांग्लादेश में राष्ट्रपति की भूमिका औपचारिक ही होती है और उनका चुनाव पांच साल के लिए संसद के सदस्य ही करते हैं।

 

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अब सरकार चुनी जानी है तो तरीका भारत वाला ही है। सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन सरकार बनाएगा और उसका नेता ही सरकार का मुखिया यानी प्रधानमंत्री होगा। यही प्रधानमंत्री अपने मंत्री चुनेगा और उनकी मदद से सरकार चलाएगा। भारत की तरह ही बांग्लादेश में भी 25 साल की उम्र होने पर ही चुनाव लड़ा जा सकता है।

 

अब 12.7 करोड़ लोग सीधे तौर पर अपना प्रतिनिधि चुनने के लिए वोट डालेंगे। वोटिंग के लिए बैलट पेपर का इस्तेमाल किया जाएगा। अलग-अलग चुनाव क्षेत्रों में बंटे बांग्लादेश में जिस पार्टी या गठबंधन को 151 सीटों पर जीत मिलेगी उसी की सरकार बन जाएगी।

 

बांग्लादेश के लोग यह वोट डालने के साथ-साथ नेशनल चार्टर के लिए हो रहे रेफरेंडम पर भी अपनी राय रखेंगे। इसमें लोगों को यह बताना है कि वे संवैधानिक सुधारों पर सहमत हैं या असहमत हैं।

कैसी है बांग्लादेश की संसद?

 

बांग्लादेश की संसद में कुल 350 सदस्य होते हैं। इसमें से 300 के लिए प्रत्यक्ष तौर पर चुनाव होते हैं। बाकी की 50 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। जब 300 सीटों वाले चुनाव के लिए नतीजे आ जाते हैं तो जिस पार्टी को जितनी सीटें मिली होती हैं, उसी के हिसाब से महिलाओं की 50 सीटों का बंटवारा है। मतलब जो सबसे बड़ी पार्टी होगी उसी की महिला सांसद भी सबसे ज्यादा होंगी। इन सबका कार्यकाल 5 साल का होता है।

 

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मौजूदा वक्त में बांग्लादेश में कुल 59 पार्टी रजिस्टर्ड हैं। इस बार 300 सीटों के लिए जो चुनाव हो रहे हैं उनके लिए कुल 1981 उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें 249 उम्मीदवार निर्दलीय हैं। 

कैसे हैं गठबंधन?

 

मुख्य गठबंधनों की बात करें तो तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) 300 में से 292 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। बाकी की सीटों पर उसने कुछ छोटे दलों से गठबंधन किया है। सीधे तौर पर देखें तो यही एक ऐसी पार्टी है जो सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है और सरकार बनाने के प्रबल दावेदारों में से एक है।

 

दूसरा प्रमुख गठबंधन जमात-ए-इस्लामी की अगुवाई वाला है। इसमें 11 पार्टी शामिल हैं। बता दें कि शेख हसीना के समय जमात-ए-इस्लामी पर बैन लगा हुआ था। शेख हसीना के खिलाफ जोरदार आंदोलन करने वाली नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी इसी गठबंधन में शामिल है। जमात-ए-इस्लामी 224 तो NCP 30 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। अगर इस गठबंधन को जीत मिलती है तो जमात के मुखिया शफीकुर रहमान प्रधानमंत्री पद के दावेदार होंगे।

 

2026 में हो रहे चुनाव में लगभग 5.6 करोड़ यानी 44 प्रतिशत के करीब मतदाता ऐसे हैं जिनकी उम्र 18 साल से 37 साल के बीच है। वहीं, 50 लाख मतदाता पहली बार वोट डालने वाले हैं।