अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 40 दिनों तक चली जंग का असर अब दुनिया के अलग-अलग देशों में देखने को मिल रहा है। सूडानी सशस्त्र बलों के अध्यक्ष और राष्ट्राध्यक्ष अब्देल फत्ताह अल-बुरहान ने सऊदी अरब पर ईरानी हमलों की निंदा की। लेकिन यह निंदा बुरहान को भारी पड़ रही है। दरअसल, उनके बयान के बाद से ही सूडानी सेना के गठबंधन में फूट पड़ती दिख रही है।

 

सूडान के तानाशाह उमर अल-बशीर ने 2015 में यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात का साथ दिया था। उन्होंने अर्धसैनिक रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के जवानों को भेजा था। चार साल बाद यानी 2019 में तख्तापलट के माध्यम से साल 1989 से चली आ रही उमर अल-बशीर की सत्ता को छीन लिया गया। संक्रमणकालीन सैन्य परिषद ने सत्ता संभाली। दो साल बाद 2021 में एक और तख्तापलट हुआ। अबकी सत्ता की कमान जनरल अब्देल-फतह अल-बुरहान ने अपने हाथ में ली।

 

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ईरान के मामले में बुरहान ने उमर अल-बशीर की राह पकड़ी। उन्होंने सऊदी अरब पर ईरानी हमलों की निंदा की। वहीं ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अब उनके ही दोस्त ने बगावती सुर अपनाया तो बुरहान को अपने ही करीबी को गिरफ्तार करने का आदेश देना पड़ा।

ईरान ने साथ दिया, मगर सूडान ने नहीं

दरअसल, सूडान में सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज के बीच सत्ता की जंग चल रही है। ईरान ने आरएसएफ के खिलाफ बुरहान के सैन्य संगठन एसएएफ को ड्रोन मुहैया करवाया। ईरानी ड्रोन ने युद्ध के मैदान में बुरहान की सेना को बढ़त हासिल करने में काफी मदद पहुंचाई। मगर युद्ध के समय उन्होंने ईरान के खिलाफ जाकर सऊदी अरब, कतर, ओमान, बहरीन, जॉर्डन और अजरबैजान का साथ देना उचित समझा। 

'अमेरिका के खिलाफ भेजेंगे सेना'

ईरान के खिलाफ जाकर खाड़ी देशों का खुला समर्थन करना अब्देल फत्ताह अल-बुरहान को भारी पड़ रहा है। उनके करीबी और सूडान युद्ध में अहम भूमिका निभाने वाले अल-नाजी अब्दुल्ला ने खुलकर ईरान का समर्थन किया है। अब्दुल्ला पॉपुलर कांग्रेस पार्टी (PCP) से जुड़े हैं। 3 मार्च को रमजान के दौरान अब्दुल्ला ने एक जनसभा को संबोधित किया। 

 

इसमें कहा, 'हम सबके सामने यह कहते हैं कि अगर अमेरिकी और जायोनी ईरान में हमारे भाइयों के खिलाफ अपनी आक्रामकता जारी रखते हैं और वहां जमीनी आक्रमण शुरू करते हैं तो हम उनसे लड़ने के लिए अपनी सेना भेजेंगे।' अब्दुल्ला ने आगे कहा कि गोला-बारूद, ड्रोन और उपकरण तैयार हैं।

 

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बयान के 12 दिन बाद अब्दुल्ला गिरफ्तार

बयान के 12 दिन बाद 15 मार्च को अब्दुल्ला को बुरहान के आदेश के बाद गिरफ्तार कर लिया गया। बुरहान ने यह भी धमकी दी कि अगर कोई शख्स सूडानी सरकार के विदेश मामलों से अलग प्रतिक्रिया देगा तो उसे खत्म कर दिया जाएगा। 

क्या नई जंग की आहट?

बताया जा रहा है कि बुरहान ने सऊदी अरब और मिस्र के दबाव में ईरान के खिलाफ रुख अपनाया। मगर देश के अंतर उनके रुख का विरोध हो रहा है। लगातार उनके खिलाफ आवाज उठ रही है। अब देखना यह है कि कहीं ईरान युद्ध सूडान में एक नई जंग की चिंगारी तो नहीं भड़का देगा।

 

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यूएई से सूडान की दुश्मनी क्या?

बुरहान ने खाड़ी के तमाम देशों पर ईरानी हमले की निंदा की। मगर किसी भी बयान में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का जिक्र नहीं किया। इसकी एक वजह यह है कि बुरहान के खिलाफ यूएई ने आरएसएफ का समर्थन किया। उसे हथियार और अन्य मदद पहुंचाई। मौजूदा समय में राजधानी खार्तूम के अलावा मध्य, उत्तर और पूर्व सूडान पर एसएएफ का कब्जा है। वहीं यूएई समर्थित आरएसएफ का दारफुर और कोरडोफान क्षेत्र के बारा शहर पर नियंत्रण है।