होर्मुज पर अमेरिकी नाकेबंदी से किन देशों को सबसे ज्यादा नुकसान होगा?
दुनिया के 20 फीसदी पेट्रोलियम उत्पाद, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरते हैं। अमेरिका इसकी नाकेबंदी कर रही है, ईरान ने जहाजों की आवाजाही रोकी है।

अमेरिकी नौसेना। Photo Credit: US Navy
इजरायल, अमेरिका और ईरान की बीच छिड़ी जंग का केंद्र अब खाड़ी के देश, तेहरान और येरुशलम नहीं रहे, असली जंग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में लड़ी जा रही है। ईरान ने पहले होर्मुज को अमेरिका और इजरायल पर दबाव बनाने के लिए बंद किया, अब अमेरिका ने किया है। शुक्रवार को इस्लामाबाद में असफल शांति वार्ता के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अब होर्मुज की नाकेबंदी की जाएगी।
अमेरिका का तर्क है कि इस नाकेबंदी का असर ईरान पर सबसे ज्यादा पड़ेगा। ईरान की सारी कमाई तेल पर निर्भर है। ईरान पर इतने प्रतिबंध लगे हैं कि चीन के अलावा कोई बड़ा आर्थिक भागीदार उसके पास रह नहीं गया है। डोनाल्ड पहले कह चुके हैं कि ईरान के व्यापार को खत्म करना है, जिसके चलते यह देश सरेंडर करे और होर्मुज पर मुक्त आवाजाही हो।
होर्मुज से हर दिन, 150 से 200 जहाजें गुजरती हैं, अब नए संकट की वजह से भीषण तबाही मचने के आसार हैं-
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अमेरिका ने क्या किया है?
अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों और तटीय इलाकों के करीब नौसेना की तैनाती की है। नाकेबंदी सोमवार सुबह से ही जारी है। इसका मकसद ईरान के तेल निर्यात को रोकना है, जिससे ईरान पर दबाव बढ़े और वह शांति वार्ता की शर्तों को मानने के लिए तैयार हो। ट्रंप प्रशासन ने कहा कि ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले सभी जहाजों को रोका जाएगा। दूसरे देशों के बंदरगाहों से गुजरने वाले जहाजों को रास्ता दिया जाएगा।
क्या होर्मुज को पूरी तरह बंद करेगा अमेरिका?
अमेरिकी सेना ने साफ किया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। ईरान ने पहले इस स्ट्रेट पर अपना नियंत्रण रखा था। ईरान केवल अपने जहाजों और कुछ मित्र देशों के जहाजों को गुजरने दे रहा था। ईरान ने कुछ जहाजों से टोल भी वसूला है। अब अमेरिका यहां अपनी दखल बढ़ा रहा है, जिसे ईरान के लिए झटका माना जा रहा है।
क्यों खास है यह होर्मुज?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है। यहां से ही दुनिया का 20 फीसदी पेट्रोलियम गुजरता है। अगर इसे बंद कर दिया जाए तो भारत, चीन, जापान और एशिया के कई देशों में ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा होगी। भारत में सिलेंडर की अचानक किल्लत हुई, बांग्लादेश, नेपाल, पाकिस्तान जैसे देशों में बुरा हाल है। ऐसे में अगर डोनाल्ड ट्रंप की नौसेना, होर्मुज में अस्थिरता बढ़ाती तो और मुश्किलें पैदा होंगी।
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चीन पर असर क्या होगा?
ईरान से गुजरने वाले तेल का करीब 40 प्रतिशत आयात चीन करता है। चीन की तैयारियां दूसरे देशों से ज्यादा हैं। द स्पेक्टेटर की एक रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि 1.4 अरब बैरल तेल का भंडार है, जो कई महीनों तक चल सकता है। चीन ने इलेक्ट्रिक वाहनों ईवी पर जोर दिया है, तेल बच रहा है।
चीन में रूस से पाइपलाइन के जरिए तेल और गैस आती है, नाकेबंदी से चीन पर वैसा असर नहीं होगा, जैसा भारत पर हो रहा है। डोनाल्ड ट्रंप, अलग दावा कर रहे हैं कि चीन का 90 फीसदी तेल, यहीं से गुजरता है। असली आंकड़ा 40 फीसदी है। नाकेबंदी शुरू होने से पहले दो चीनी सुपर टैंकर ईरान से तेल लेकर चीनी नौसेना की सुरक्षा में निकल गए थे।
भारत पर क्या असर होगा?
भारत की ऊर्जा जरूरतें, इसी रूट पर टिकी हैं। देश के कुल आयात का 30 से 40 फीसदी हिस्सा, इसी रूट से आता है। LPG का 85-90 फीसदी हिस्सा का रूट होर्मुज ही है। एक तरफ ईरान ने होर्मुज को ब्लॉक किया है, दूसरी तरफ, अमेरिकी तबाही का खतरा मंडरा रहा है। भारत में यह संकट और गहरा सकता है।
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जापान और दक्षिण कोरिया पर क्या असर होगा?
दोनों देश, ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी के देशों पर निर्भर है। जापान का करीब 80 से 90 फीसदी कच्चा तेल इसी राह से गुजरता है। अस्थिरता की स्थिति है। ईरान ने बदले की कार्रवाई की बात कही है, अमेरिका ने तबाही की धमकी दी है। होर्मुज में आशंका लगातार बढ़ी हुई है।
और किन देशों पर असर पड़ेगा?
सऊदी अरब, इराक, कुवैत, यूएई, कतर को भी इस ब्लॉकेज की वजह से नुकसान झेलना पड़ेगा। भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव जैसे देशों तक इसका असर देखना पड़ सकता है। नेपाल और भूटान की ऊर्जा जरूरतें काफी हद तक भारत पर निर्भर हैं। अगर यह रास्ता बंद रहता है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बेतहाशा बढ़ेंगी।
अमेरिका इस नाकेबंदी को लागू करने के लिए अपनी नौसेना का इस्तेमाल कर रहा है। अब जहाजों को रोका जा सकता है, उनकी तलाशी ली जा सकती है और तय किया जा सकता है कि उन्हें आगे जाने दिया जाए या नहीं। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी युद्धपोत नाकेबंदी के पास आए तो उन्हें नष्ट कर दिया जाएगा।
ईरान ने जवाब में कहा है कि अगर उसके बंदरगाहों पर खतरा हुआ तो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के किसी भी बंदरगाह को सुरक्षित नहीं छोड़ा जाएगा। ईरान के पास मिसाइलें, ड्रोन और समुद्री माइन्स हैं जो जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। यह नई नाकेबंदी दुनिया के लिए संकट पैदा कर रही है।
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नाकेबंदी का क्या असर दिख रहा है?
ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई है। अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। पूरी दुनिया में महंगाई का खतरा बढ़ गया है। खाड़ी के देश भी अब दोहरी नाकेबंदी खत्म करने के लिए अमेरिका पर दबाव डाल रहे हैं। खाड़ी के देशों को डर है कि ईरान बदला ले सकता है और दूसरे रास्तों को भी प्रभावित कर सकता है। ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भी नाकेबंदी का समर्थन नहीं किया है।
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