मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य बलों की भारी तैनाती हो चुकी है। बड़ी संख्या में फाइटर प्लेन और युद्धपोत हमले की तैयारी में खड़े हैं। जॉर्डन, कतर, सऊदी अरब और यूएई के आसमान पर अमेरिका सेना के जहाजों की आवाजाही देखने को मिल रही है। उधर, यूरोपीय यूनियन भी ईरान के खिलाफ सख्त है। उसने आईआरजीसी को आतंकी सूची में डालने की बात कही है। इस बीच ब्रिटेन अमेरिका के साथ मध्य-पूर्व में अपने लड़ाकू विमानों की तैनाती कर रहा है। आशंका जताई जा रही है कि अमेरिका के साथ ब्रिटेन में भी संघर्ष में कूद सकता है?
इजरायली मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया कि ईरान पर हमला होने पर ब्रिटेन, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ मिलकर अमेरिकी सेना को रसद और खुफिया मदद पहुंचाई जाएगी। हालांकि अभी तक ब्रिटिश ने खुलकर यह बात नहीं स्वीकार की है कि वह संघर्ष में हिस्सा लेगा या नहीं।
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मगर तनाव के बीच ब्रिटेन ने कतर की राजधानी दोहा में अपने टाइफून फाइटर जेट विमानों को तैनात कर दिया है। पिछले हफ्ते कतर सरकार के कहने पर ही इन विमानों के एक स्क्वाड्रन को दोहा के अल उदैद एयरबेस पर तैनात किया गया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने भी इस बात की पुष्टि की है।
इसी अल उदैद में अमेरिका का भी मध्य पूर्व में सबसे बड़ा एयर बेस है। पिछले साल जब अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था तो उसके जवाब में तेहरान ने इसी एयरबेस को निशाना बनाया था।
मध्य पूर्व में ब्रिटेन कितनी बड़ी ताकत?
मध्य पूर्व में ब्रिटेन के कई सैन्य अड्डे हैं। ओमान में ब्रिटिश खुफिया एजेंसी का गुप्त ठिकाना भी है। यह ठिकाना ईरान की सीमा के बेहद करीब है। इसके अलावा कतर, यूएई, ओमान और साइप्रस में हवाई अड्डे हैं। बहरीन में एक नौसैनिक सहायता सुविधा भी है।
डिएगो गार्सिया का एंगल समझिए
हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया में ब्रिटेन-अमेरिका का साझा सैन्य एयर और नेवल बेस हैं। अगर अमेरिका हमला करता है तो इस बेस की भूमिका बेहद अहम होगी, लेकिन उससे पहले अमेरिका को ब्रिटिश सरकार से इसकी अनुमति लेनी होगी। डिएगो गार्सिया बेस के इस्तेमाल की अंतिम मंजूरी ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर के हाथों में होगी। दुनियाभर का मानना है कि अमेरिकी दबाव के आगे ब्रिटेन का झुकना तय हैं। हालांकि डिएगो गार्सिया ईरानी शाहेद-136बी आत्मघाती ड्रोन की जद में है।
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ब्रिटेन ने टाइफून ही क्यों किए तैनात?
अब सवाल उठता है कि ब्रिटेन ने अपने टाइफून विमानों की ही तैनाती क्यों की है? इसका जवाब यह है कि यह विमान ईरान के शाहेद-136 ड्रोन को मार गिराने की ताकत रखता है। इस कारण इसकी अहमियत अधिक बढ़ जाती है।
हालांकि यह कोई पहली बार नहीं होगा जब ब्रिटिश खुलकर इजरायल और अमेरिका के समर्थन में आएगा। पिछले साल अक्टूबर में जब इजरायल पर ईरान ने करीब 200 बैलेस्टिक मिसाइलों से हमला किया था तो उस वक्त भी ब्रिटेन ने इजरायल को मदद पहुंचाई थी। वहीं इराक के खिलाफ युद्ध में ब्रिटेन ने अमेरिका का साथ दिया था।
बिगड़ रहे ब्रिटेन और ईरान के संबंध
ईरान और ब्रिटेन के बीच कई मुद्दों पर तनाव बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों की हत्या के आरोप में ब्रिटेन ने ईरान पर कई प्रतिबंधों की घोषणा की। इसके अलावा ईरान के व्यवसायी अली अंसारी पर भी बैन लगाया गया है। 150 मिलियन पाउंड से ज्यादा की संपत्ति भी जब्त की है। अंसारी पर आईआरजीसी को फंडिंग करने का आरोप है। इससे पहले ब्रिटेन तेहरान स्थित अपना दूतावास भी खाली कर चुका है।
तो इस वजह से जंग में कूद सकता ब्रिटेन
गाजा युद्ध के कारण ब्रिटेन ने इजरायल पर सीधे विमान के पुर्जों के निर्यात पर रोक लगा रही है। बावजूद इसके तीन एफ-35 फाइटर प्लेन को ब्रिटेन से इजरायल पहुंचाया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरएएफ मिल्डेनहॉल से इन विमानों को भेजा गया था। हाल ही में ईरान ने खुली धमकी दी है कि जो भी देश अमेरिका और इजरायल का साथ देगा, बदले में ईरान उसको भी निशाना बनाएगा। ऐसे में आशंका जताई जा रही है कि ब्रिटेन के इन कदमों के बाद ईरान मध्य पूर्व में स्थित उसके ठिकानों पर हमला कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो इस संघर्ष में ब्रिटेन का कूदना लाजिम होगा।
क्यों टेंशन में UAE?
अमेरिका और ईरान के साथ तनाव पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) बेहद चिंतित है। ईरान के साथ उसके बेहद गहरे संबंध है। ईरान के बंदर अब्बास से यूएई के शरजाह की दूरी महज 260 किमी है। यही कारण है कि यूएई को सबसे अधिक चिंता सता रही है। सोमवार को ही यूएई के विदेश मंत्रालय ने साफ कर दिया कि वह अपने हवाई क्षेत्र, भूभाग या जल क्षेत्र को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं देगा।
अमेरिका ने भेजा एक और पोत, ईरान करेगा फायरिंग अभ्यास
मध्य पूर्व में अमेरिका के छह विध्वंसक पोतों की तैनाती हो चुकी है। इस बीच अमेरिका ने यूएसएस डेलबर्ट डी. ब्लैक को भी भेजा है। सेंटकॉम के मुताबिक विमानवाहक पोत अब्राहम लिंकन मध्य पूर्व पहुंच चुका है। इसमें एफ-35 और एफ/ए-18 फाइटर विमानों की तैनाती है। इस बीच खबर आ रही है कि 1 और 2 फरवरी को ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड नौसेना बल होर्मुज जलडमरूमध्य में लाइव फायरिंग अभ्यास करेगी। रणनीतिक रूप से यह जलडमरूमध्य बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया का अधिकांश तेल निर्यात इसी रूट से होता है।
