तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन मुस्लिम जगत में अपना प्रभाव बढ़ाना चाहते हैं। उनकी मंशा दोबारा ऑटोमन साम्राज्य की स्थापना करना है। मगर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू खुलकर कह चुके हैं कि उनका सपना कभी पूरा नहीं होगा। गाजा युद्ध के बाद से ही तुर्की और इजरायल के बीच तनाव काफी हद तक बढ़ चुका है। हमास, हिज्बुल्लाह, हूती और ईरान के बाद इजरायल ने तुर्की को घेरने की रणनीति शुरू कर दी है।

 

पिछले साल 22 दिसंबर को दो अहम बैठकों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। पहली बैठक इजरायल में हुई और दूसरी सीरिया की राजधानी दमिश्क में। इजरायल के प्रधानमंत्री बेजामिन नेतन्याहू ने बैठक में तुर्की के खिलाफ ग्रीस और साइप्रस के साथ मिलकर एक सैन्य गठबंधन का ऐलान किया। दूसरी तरफ तुर्की के नेताओं ने दमिश्क में सीरियाई सरकार के अधिकारियों के मुलाकात की। 

 

तुर्की की पूरी कोशिश है कि सीरिया को स्थिर किया जा सके। वहीं उत्तर-पूर्व सीरिया में कुर्द बलों की धार को कुंद किया जाए, ताकि तुर्की में कथित आतंकवाद को रोकने की लहर को मंद करने में मदद मिले। मगर मीटिंग से दो दिन पहले इजरायल ने सीरिया पर एयर स्ट्राइक करके एर्दोआन को साफ संदेश दे दिया कि इलाके का असली बॉस वही है।जनवरी के पहले ही सप्ताह में सीरिया के अलेप्पो शहर में सीरिया की सेना और कुर्द बलों के बीच छिड़ी जंग तुर्की के लिए अच्छे संकेत नहीं हैं। इजरायल तुर्की के खिलाफ कुर्द बलों को अवसर के तौर पर देखता है।

 

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गाजा युद्ध के बाद इजरायल आज भी मध्य पूर्व में एक महाशक्ति है। वह भूमध्य सागर से अदन की खाड़ी तक अपना वर्चस्व जमाना चाहता है। वह चाहता है कि इराक, ईरान, सीरिया और लेबनान में उन गुटों को खाद पानी दिया जाए, जिनका बाद में अपने हिसाब से इस्तेमाल किया जा सके, लेकिन इजरायल के सामने तुर्की एक नई चुनौती बनकर उभर रहा है, जो न केवल कूटनीतिक बल्कि आर्थिक और सैन्य क्षेत्र में भी बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है। अब इजरायल तुर्की के प्रभाव को किसी भी हाल में काम करना चाहता है। 


समुद्र में घेरने की रणनीति: इजरायल की रणनीति तुर्की को भूमध्य सागर, काला सागर और एजियन सागर में घेरने की है, ताकि तेल अवीव अपने हितों की रक्षा कर सके। ग्रीस-साइप्रस और इजरायल का मौजूदा समझौता तुर्की को हाशिए पर डालने वाले है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भूमध्य सागर में आपसी हितों की खातिर टकराव होंगे। रेसेप तैयप एर्दोगन खुद ही कह चुके हैं कि तुर्की एजियन और भूमध्य सागर में अपने अधिकारों के उल्लंघन की अनुमति नहीं देगा। समझौते के मुताबिक इजरायल, ग्रीस और साइप्रस साझा सैन्य गठबंधन तैयार करेंगे। इसका काम तुर्की से निपटना का होगा।

 

तुर्की के खिलाफ खुल रहा नया मोर्चा: भूमध्य सागर में इजरायल लगातार ग्रीस को मजबूत बना रहा है। उसके साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। ग्रीस और तुर्की के बीच विवाद जगजाहिर है। हाल ही में ग्रीस ने 760 मिलियन डॉलर में इजरायल से 36 पल्स रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम खरीदे हैं। इसके अलावा दोनों देशों की 3.5 अरब डॉलर के रक्षा समझौते पर भी बातचीत चल रही है। समझौते के मुताबिक इजरायल की डिफेंस कंपनियां ग्रीस को एयर डिफेंस सिस्टम देंगी, ताकि तुर्की के साथ युद्ध की स्थिति में ग्रीस की रक्षा की जा सके। 

 

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लाल सागर नया रणक्षेत्र: तुर्की लाल सागर के आसपास अपना प्रभाव जमाने की जुगाड़ में है। उसका लक्ष्य अदन की खाड़ी से गुजरने वाले दुनिया के सबसे अहम ट्रेड रूट पर अपनी उपस्थिति को मजबूत करने की है। मगर इजरायल ने अचानक सोमालीलैंड को मान्यता देकर तुर्की को बड़ा झटका दिया। तुर्की आधिकारिक तौर पर सोमालीलैंड को सोमालिया का हिस्सा मानता है, लेकिन भौगोलिक लिहाज से सोमालीलैंड का ही भूभाग लाल सागर से जुड़ा है। ऐसे में यहां तुर्की की पकड़ कमजोर और इजरायल मजबूत होगा।

 

आर्थिक चोट: गाजा युद्ध के कारण इजरायल और तुर्की के बीच व्यापार ठप है। 2024 में तुर्की ने इजरायली निर्यात पर रोक लगाई। जवाब में इजरायल ने भी मुक्त व्यापार समझौता से किनारा कर लिया। इसके अलावा तुर्की को आर्थिक चोट पहुंचाने के उद्देश्य से 100 फीसद टैरिफ का भी ऐलान कर दिया।  

 

कूटनीतिक अखाड़ा बना सीरिया: इजरायल और तुर्की की कूटनीतिक जंग का एक और अखाड़ा सीरिया है। तुर्की चाहता है कि सीरिया स्थिर हो। पूरे भूभाग में एक ही सरकार का नियंत्रण हो। उत्तर-पूर्व सीरिया में मजबूत कुर्द बलों को सीरियाई सेना में शामिल किया जाए। तुर्की को इसका फायदा यह होगा कि सीरिया की सीमा से लगे उसके क्षेत्र में आतंकवाद पर लगाम लगेगी, क्योंकि उसका आरोप है कि यहां कुर्द आतंकवाद के पीछे हैं। इजरायल सीरिया में कुर्द बलों का समर्थक है। उसकी रणनीति कुर्दों के सहारे तुर्की को नियंत्रित करने की है।