ईरान की सरकार के बाद वहां की जनता भी युद्ध की तैयारी में जुट गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 30 जनवरी को ईरान के कई हिस्सों में हमले की अफवाह फैल गई। मिडिल ईस्ट आई से बातचीत में तेहरान के रहने वाले शोहरे ने बताया कि 31 जनवरी की सुबह पार्क में उसके दोस्तों ने बताया कि आज रात भूकंप आएगा।

 

1 फरवरी की सुबह ही दक्षिणी ईरान में 5.3 तीव्रता का भूकंप आया। UAE ने इसकी पुष्टि की। वहां के राष्ट्रीय मौसम विज्ञान केंद्र (NCM) के राष्ट्रीय भूकंपीय नेटवर्क के मुताबिक सुबह करीब 8:11 बजे भूकंप आया। भूकंप को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह की अफवाहें भी तैर रही हैं।

 

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की जनता में हमले का भय व्यक्त है। हालत यह है कि लोग युद्ध पर बात करने से बचते हैं। तीन हफ्ते बाद ईरान की सरकार ने इंटरनेट पर धीरे-धीरे पाबंदी हटाना शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर इन दिनों सबसे अधिक 'मिसाइल हमले से कैसे बचे' जैसे वीडियो वायरल हैं। लोगों को हमले से बचने की तरह-तरह की सलाह दी जा रही है। 

 

ईरान की 32 वर्षीय सरकारी कर्मचारी आरजू ने मिडिल ईस्ट आई को बताया कि उनके पड़ोसी ने खिड़कियां सील कर दी हैं। उनका मानना है कि बमबारी में सरकार और विपक्ष में कोई अंतर नहीं होगा। अभी तक यह नहीं पता है कि जनता को हमलों से बचने की सलाह कौन दे रहा? इसके पीछे ईरान की सरकार है या कोई और? 

 

फारसी भाषा में हमले की स्थिति में सावधानी बरतने वाले वीडियो की बाढ़ सी आ गई है। इन वीडियो के बाद से ही ईरान की जनता में खौफ है। लोग खाना-पानी और दवाओं को इकट्ठा करने लगे हैं। विदेश में रहने वाले करीब 40 लाख ईरानियों को भी अपने परिवार की चिंता सता रही है।

 

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जनता को क्या सलाह दी जा रही?

  • 10 दिन का खाना-पानी रखें।
  • अपने पास हमेशा मेडिकल किट रखें।
  • इमरजेंसी रास्ते हमेशा खुला रखें।
  • जरूरी कागजात एक बैग में रखें।
  • हमला होने पर जमीन पर लेट जाएं।
  • धमाके की आवाज सुनते ही खुले स्थान पर जाएं।

दो धड़ों में बंटी ईरान की जनता 

भारी महंगाई के मुद्दे पर 28 दिसंबर को पूरे ईरान में हिंसा भड़की। करीब 15 दिनों तक जनता ने सड़क पर मोर्चो खोला। सरकार पर इंटरनेट बंद करने के बाद मानवसंहार के आरोप लगे। तेहरान समेत कई शहरों के अस्पताल शवों से पटे रहे। सरकारी आंकड़ों में 3117 लोगों की मौत की बात कही गई है। वहीं मानवाधिकार समूहों का दावा है कि करीब 30 हजार लोगों को मारा गया है। बड़ी संख्या में लोगों की मौत के बाद ईरान की जनता दो धड़ों में बंटी है। कुछ लोग अमेरिकी हमले के खिलाफ हैं तो वहीं कुछ लोग इस इंतजार में हैं कि ट्रंप कब हमला करेंगे?