यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का कहना है कि सिर्फ सर्दी के तीन महीने में रूस ने 14,670 से ज्यादा गाइडेड बम, 738 मिसाइलें और करीब 19,000 अटैक ड्रोन से हमला किया। एक अनुमान के मुताबिक यूक्रेन को रोजाना 200 ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा। 

 

इस बीच यूक्रेन ने लगभग 700 पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का उपयोग किया। वहीं ईरान युद्ध के सिर्फ तीन दिन में खाड़ी देशों ने 800 से अधिक PAC-3 पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जबकि लॉकहीड मार्टिन ने पिछले साल 600 मिसाइलों का ही उत्पादन किया था। 

 

आकंड़ा यह साबित करता है कि यूक्रेन अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम पर कम निर्भर है, जबकि खाड़ी देशों की निर्भरता अधिक है। ईरान के शाहेद ड्रोन का इलाज यूक्रेन ने घरेलू स्तर पर ही निकाला था। 

 

चार साल के युद्ध ने यूक्रेन को इतना सीखा दिया है कि वह आज न केवल रूस के अटैक ड्रोन से निपट रहा है, बल्कि उसने इस क्षेत्र में काफी हद तक महारथ भी हासिल कर ली है। आज यूक्रेन दुनिया के अन्य देशों को अपनी ड्रोन रोधी तकनीक बेचने लगा है। 

 

कितना ताकतवर शाहेद 136 ड्रोन

यूक्रेन के सैन्य विशेषज्ञों को पता है कि ईरानी शाहेद ड्रोन से कैसे निपटना है। दरअसल, 2022 से ही रूस की सेना यूक्रेन पर शाहेद-136 ड्रोन से हमला कर रही है। यह ड्रोन उसे ईरान से मिले थे। ईरानी सेना ने रूस को ड्रोन लॉन्च करने के अलावा बनाने की तकनीक भी दी थी। ईरान का शाहेद 136 ड्रोन आठ फुट चौड़ा और 11.5 फुट लंबा होता है। अधिकतम 185 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। 40 किमी गोला बारूद के साथ 1800 से 2400 किमी तक उड़ान भरने में सक्षम है।

 

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खाड़ी देश क्या उठा पाएंगे आर्थिक बोझ

अमेरिका-इजरायल हमले के बाद से ईरान संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, कुवैत, कतर, बहरीन, ओमान, जॉर्डन और इराक पर सैकड़ों मिसाइल और शाहेद-136 ड्रोन से हमला कर चुका है। इन ड्रोनों को रोकने में खाड़ी देश बेबस हैं। एक सस्ते ड्रोन को रोकने में 27 करोड़ रुपये कीमत की मिसाइल दागनी पड़ती है। कई बार निशाना चुकने पर जमीन पर बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। यही कारण है कि अब खाड़ी देशों ने यूक्रेन से मदद मांगी है। 

200 से अधिक सैन्य विशेषज्ञ तैनात

जेलेंस्की के मुताबिक 201 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन विशेषज्ञ मध्य पूर्व में तैनात हैं। यह सभी ईरानी ड्रोन को रोकने में स्थानीय सरकारों की सहायता करने में जुटे हैं। जल्द ही 34 नए विशेषज्ञों को तैनात करने की योजना है। इन विशेषज्ञों की तैनाती कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और जॉर्डन में की गई। सभी देशों ने यूक्रेन के साथ समझौता किया है। 

हालात से यूक्रेन ने क्या सीखा?

खाड़ी के सभी देश के मुख्य रूप से अमेरिकी डिफेंस पर निर्भर थे। इन देशों ने ड्रोन और मिसाइलों से निपटने की खातिर अपना कोई तंत्र विकसित नहीं किया, जबकि चार साल की जंग में यूक्रेन ने परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाला। ईरानी और रूसी ड्रोन की न केवल काट निकाली, बल्कि सस्ते फर्स्ट-पर्सन व्यू (एफपीवी) ड्रोन से रूस के भीतर हजारों किमी दूर भारी तबाही भी मचाई। यूक्रेन ने खुद समुद्री ड्रोनों को विकसित किया। काला सागर में आज यूक्रेन ड्रोन रूसी टैंकरों के सबसे बड़े काल बने हैं। इस बीच यूक्रेन ने खुद का ड्रोन इंटरसेप्टर विकसित किया। जेलेंस्की का दावा है कि यूक्रेन के पास रोजाना 2000 इंटरसेप्टर के उत्पादन की क्षमता है। 

 

मोबाइल फायर यूनिट: यूक्रेन ने पिकअप ट्रकों पर मशीनगनों से लैस मोबाइल फायर टीमों को तैयार किया है। यह टीमें आसमान में उड़ने वाले ड्रोन और हवाई खतरे को मिसाइल की तुलना में बेहद कम लागत में रोकने में सक्षम हैं। जेलेंस्की के मुताबिक उसकी सेना ने रूस से आने वाले करीब 90 फीसद ड्रोनों को रोकने में सफलता हासिल की है।  

 

सस्ते ड्रोन इंटरसेप्टर: चार साल के युद्ध ने यूक्रेन को ड्रोन से लड़ने की कला सीखा दी। उसने 'लाइव टू किल' इंटरसेप्टर ड्रोन विकसित किए हैं। यह छोटे इंटरसेप्टर होते हैं। जहां एक मिसाइल से एक ड्रोन को मारने में 27 करोड़ रुपये का खर्च आता है। वहीं इंटरसेप्टर ड्रोन महज साढ़े आठ लाख रुपये में ही ड्रोन को तबाह कर सकता है। 

 

अधिक उत्पादन: सबसे कठिन यह है कि PAC-3 पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलों को लॉकहिड मार्टिन जैसी कंपनी साल में 600 ही यूनिट बना सकती है। वहीं यूक्रेन अपने छोटे इंटरसेप्टर ड्रोन का प्रतिदिन 2000 से अधिक का उत्पादन कर सकता है। खास बात यह है कि इनमें से 50 फीसद इंटरसेप्टर को दूसरे देशों को बेचा जा सकता है। 

 

सस्ते अवरोधक: यूक्रेन की वाइल्ड हॉर्नेट्स जैसी निजी कंपनियों ने काम कीमत वाले क्वाडकॉप्टर विकसित किए हैं। इन्हें ऐसे डिजाइन किया गया है कि यह बेहद तेज रफ्तार में आने वाले ड्रोन से जा भिड़ते हैं। इससे हवा में ही दुश्मन का ड्रोन तबाह हो जाता है।

 

सॉफ्टवेयर: यूक्रेन ने कई सॉफ्टवेयर प्रोगाम बनाए हैं। फील्ड कमांडरों को आईपैड के माध्यम से रियल टाइम अटैक को ट्रैक करने का डेटा भेजा जाता है। 

 

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यूक्रेन का सबसे अहम हथियार क्या है?

स्टिंग इंटरसेप्टर यूर्केन का सबसे अहम हथियार है। 2025 में इसने तीन हजार से अधिक रूसी गेरान ड्रोनों को नष्ट किया है। एक ड्रोन की कीमत 2100 डॉलर है। ड्रोन को बुलेट के आकार में डिजाइन किया गया है। ड्रोन 340 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। खास बात यह है कि इसे कोई भी सैनिक एक हाथ से लॉन्च कर सकता है। यह ड्रोन थर्मल इमेजिंग का सहारा लेकर शाहेद 136 ड्रोन का पता लगाता है और उसे तबाह कर देता है।

खाड़ी देशों की मदद क्यों कर रहा यूक्रेन? 

कुछ दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कहा था कि उन्हें ईरानी ड्रोन को रोकने की खातिर यूक्रेनी सहायता की जरूरत नहीं है। बाद में उन्होंने कहा कि अगर कोई देश इच्छुक है तो उसका स्वागत है। अब सवाल उठा रहा है कि यूक्रेन खाड़ी देशों की मदद क्यों कर रहा है? इसके पीछे कई वजह हैं। सबसे पहले यह है कि इस रणनीति से खाड़ी देशों में यूक्रेन का प्रभाव बढ़ेगा और रूस की इमेज को धक्का लगेगा, क्योंकि ईरानी ड्रोन में कई पार्ट्स रूसी हैं। इन ड्रोन को उन्नत बनाने में भी रूस ने मदद की है।

 

अमेरिका ने करीब एक साल से यूक्रेन की आर्थिक मदद रोक रखी है। जेलेंस्की की कोशिश है कि इस सहायता के जरिये खाड़ी देशों से धन जुटाया जा सके, ताकि एयर डिफेंस मिसाइल के अलावा रक्षा क्षेत्र को चलाया जा सके। एक वजह यह भी है कि यूक्रेन के खिलाफ ईरान ने खुलकर रूस की मदद की थी। अब जेलेंस्की चार साल बाद खाड़ी देशों के साथ खड़े होकर तेहरान को साफ संदेश देना चाहते हैं।