ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब तक जारी हैं। दो हफ्ते से ज्यादा समय से ईरान के 100 से ज्यादा शहरों में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों में अब तक 2,500 से ज्यादा मौतों का दावा किया जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ सलाह-मशविरा कर रहे हैं, ताकि ईरान पर कार्रवाई को लेकर फैसला लिया जा सके।
बताया जा रहा है कि ट्रंप अपनी नेशनल सिक्योरिटी टीम के साथ बातचीत कर रहे हैं, ताकि ईरान में मरने वाले और गिरफ्तार हुए प्रदर्शनकारियों की असली संख्या सामने आ सके। ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि बहुत ज्यादा 'हत्याएं' हुई हैं और उनकी सरकार उसी के हिसाब से कार्रवाई करेगी।
ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि ईरानी सरकार प्रदर्शनकारियों के साथ 'बहुत बुरा बर्ताव' कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें अभी तक विरोध प्रदर्शनों में मारे गए ईरानियों की पक्की संख्या नहीं मिली है। उनका कहना है कि उन्होंने मरने वालों की संख्या के बारे में 5 अलग-अलग तरह के आंकड़े सुने हैं।
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अब तक कितनी मौतें?
अमेरिका की ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट न्यूज एजेंसी (HRANA) ने दावा किया है कि इन प्रदर्शनों में अब तक 2,571 लोगों की मौत हो चुकी है। मरने वालों में 2,403 प्रदर्शनकारी हैं। बाकी 147 या तो सुरक्षाबल हैं या सरकार के समर्थक।
एक्टिविस्ट ग्रुप ने बताया कि इन विरोध प्रदर्शनों में 9 बच्चे भी मारे गए हैं। एजेंसी ने ये भी बताया कि 9 ऐसे लोग भी मारे गए हैं, जो इन विरोध प्रदर्शनों में शामिल नहीं थे। एजेंसी ने बताया कि अब तक 18,100 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।
ईरान में इंटरनेट बंद होने के कारण विरोध प्रदर्शनों का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो रहा है। ईरान की सरकार ने मरने वालों की कुल संख्या नहीं बताई है।
हालांकि, अलग-अलग ग्रुप्स ने विरोध प्रदर्शनों में हजारों लोगों के मारे जाने का दावा किया है। ये ईरान में अब तक हुए विरोध प्रदर्शनों में सबसे ज्यादा है। ताजा विरोध प्रदर्शनों ने 1979 की इस्लामिक क्रांतिं के दौरान हुई हिंसा की यादों को ताजा कर दिया है।
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क्या अमेरिका उतारेगा सेना?
ईरान के हालातों पर अमेरिका करीब से नजर रख रहा है। ट्रंप कई बार ईरान के खिलाफ सख्त कार्रवाई की बात कह चुके हैं। उन्होंने कई बार धमकी भी दी है कि अगर ईरान में प्रदर्शनकारियों को मारा जाता है तो अमेरिका उनकी मदद करेगा।
इसके बाद ट्रंप ने एक दिन पहले ही ईरान के प्रदर्शनकारियों से कहा था कि वे अपना विरोध जारी रखें और संस्थानों पर कब्जा कर लें, क्योंकि मदद रास्ते में है। इससे पहले ट्रंप ने ईरानी अधिकारियों के साथ होने वालीं मीटिंग्स भी रद्द कर दी थी। ट्रंप ने कहा था कि जब तक ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्या बंद नहीं होती, तब तक कोई मीटिंग नहीं होगी।
मंगलवार को ट्रंप ने मिशिगन में एक कार्यक्रम में कहा था, 'ईरानी देशभक्तों, विरोध कते रहो और हो सके तो अपने संस्थानों पर कब्जा कर लो। उन हत्यारों और बुरा बर्ताव करने वालों के नाम याद रखो जो तुम्हारे साथ बुरा बर्ताव कर रहे हैं। तुम्हारे साथ बहुत बुरा बर्ताव हो रहा है।'
ट्रंप कई बार ईरान को सैन्य कार्रवाई करने की धमकी भी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें लगता है कि ईरान उस लाइन को पार करना शुरू कर रहा है और इसेस उन्हें और उनकी नेशनल सिक्योरिटी टीम को बहुत मजबूत विकल्पों पर काम करना पड़ा रहा है।
ईरान को लेकर उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और व्हाइट हाउस की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के अधिकारियों ने ट्रंप के लिए विकल्प तैयार करने के लिए बैठकें शुरू कीं। बताया जा रहा है कि इन विकल्पों में डिप्लोमैटिक तरीके से लेकर सैन्य हमलों तक के विकल्प शामिल हैं।
वहीं, ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कलीबाफ ने हाल ही में कहा था कि अगर अमेरिका सैन्य हमला करता है तो ईरान अमेरिका सेना और इजरायल पर जवाबी हमले किए जाएंगे। इस पर ट्रंप का कहना है कि वह ईरान की जवाबी कार्रवाई की धमकियों से डरने वाले नहीं हैं।
