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क्या है डीप स्टेट, कैसे करता है काम; ट्रंप अब क्या उसके कब्जे में

कहा जाता है कि अमेरिका में सरकार चाहे जिसकी हो, लेकिन असली सिक्का डीप स्टेट का चलता है। दुनियाभर में विरोध प्रदर्शन को हवा देना और तख्तापलट करवाने में यह गुप्त संगठन माहिर है। आज इसी के बारे में जानते हैं।

American Deep State

अमेरिकी डीप स्टेट। (AI Generated Image)

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अमेरिका में एक साथ दो सरकारें चलती हैं। एक सरकार पर्दे के बाहर तो दूसरी पर्दे के पीछे होती है। मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर्दे के आगे वाली सरकार के मुखिया है, जबकि पर्दे के पीछे वाली सरकार को दुनिया 'डीप स्टेट' कहती है। माना जाता है कि अमेरिका की असल सरकार यही डीप स्टेट है और यह दुनिया को दिखने वाली अमेरिकी सरकार से अधिक खतरनाक है। कहां सरकारें बनानी हैं और कहां बिगाड़नी हैं... यह सब डीप स्टेट तय करता है। अमेरिका में राष्ट्रपति बदलते रहते हैं, लेकिन डीप स्टेट स्थायी रहता है। आज जानेंगे इसी डीप स्टेट के बारे में... यह क्या है और कैसे काम करता है, क्या डोनाल्ड ट्रंप को डीप स्टेट ने काबू कर लिया है।

 

डीप स्टेट को समझने से पहले यह समझते हैं कि ये शब्द आया कहां से? माना जाता है कि डीप स्टेट शब्द तुर्की से आया है। यह तुर्किश शब्द Derin Devlet से लिया गया है। जिसका अर्थ अंग्रेजी में deep state होता है। दरअसल, तु्र्की में लोकतंत्र तो था लेकिन पर्दे के पीछे असल सरकार वहां की सेना और खुफिया एजेंसी चलाती थी।

 

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अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर की चेतावनी के बाद साल 1961 में डीप स्टेट शब्द खूब चर्चा में आया। अपनी चेतावनी में उन्होंने कहा था कि मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स लोकतंत्र की खातिर सबसे बड़ा खतरा बन सकते हैं। कहा जाता है कि उनकी इस चेतावनी के बाद भी अमेरिका डीप स्टेट से अपना पीछा नहीं छुड़ा पाया। अपने दशकों के इतिहास में डीप स्टेट कई देशों में सरकारें गिरा चुका हैं। कई युद्धों में अमेरिका को झोंक चुका है। मगर अमेरिका की सरकार कभी आधिकारिक तौर पर डीप स्टेट की मौजूदगी को स्वीकार नहीं करती है।

क्या होता है डीप स्टेट?

अमेरिका में डीप स्टेट को सिर्फ एक सियासी शब्द माना जाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ यह बताने की खातिर किया जाता है कि सरकार के पीछे भी सरकार है। इसमें कुछ शक्तिशाली लोग हैं, जो देश में सरकार बदलने के बावजूद बने होते हैं। हालांकि अमेरिका में संवैधानिक तौर पर डीप स्टेट जैसी संस्था नहीं है, लेकिन इसकी मौजूदगी को सभी मानते हैं। अमेरिका सरकार में एक तरफ चुने हुए लोग और दूसरी तरफ शक्तिशाली लोग होते हैं। डीप स्टेट के यही शक्तिशाली लोग सरकार की नीतियों और फैसलों को प्रभावित करते हैं। 

कौन-कौन होता है डीप स्टेट का हिस्सा?

अमेरिकी डीप स्टेट में कई विभाग और संस्था शामिल होते हैं। इनका मुख्य काम सरकार बदलने के बावजूद मूल नीति पर काम जारी रखना है। आपने भारत में अक्सर देखा होगा कि सरकार बदलने के बाद अक्सर नीतियां बदल जाती हैं, जबकि अमेरिका में ऐसा नहीं होता है। इसकी वजह यही डीप स्टेट है। इसमें अमेरिका का रक्षा मंत्रालय, खुफिया एजेंसियां, विदेश मंत्रालय, मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स, थिंक टैंक, बड़े बैंक, बिग टेक कंपनियां और पावर लॉबी ग्रुप शामिल होते हैं।

डीप स्टेट है या नहीं... किसका क्या तर्क है?

कुछ लोगों का मानना है कि अमेरिका में डीप स्टेट जैसा कुछ नहीं है। मगर कुछ विशेषज्ञों का तर्क है कि एक छिपी हुई संगठित शक्ति है। इसके पुख्ता सबूत नहीं, लेकिन डीप स्टेट हर राष्ट्रपति को नियंत्रित करता है। इसके जवाब में कुछ लोगों का तर्क है कि डीप स्टेट जैसा कोई गुप्त संगठन नहीं है। यह एक सिस्टमेटिक प्रभाव है, जिसका हर राष्ट्रपति पर असर दिखता है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में डीप स्टेट का जिक्र कर चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया था कि अधिकारी और खुफिया एजेंसियां उनकी नीतियों को कमजोर बना रही हैं। 

कहां तक होता है डीप स्टेट का दखल?

1947 से 1991 तक शीत युद्ध के वक्त डीप स्टेट ने कई अहम अभियान में साथ दिया। चिली में 1973 के तख्तापलट और 1953 के ईरानी तख्तापलट के पीछे डीप स्टेट का ही हाथ था।अमेरिकी सरकार ने डीप स्टेट की मदद से इराक से सीरिया तक कई ऑपरेशनों को अंजाम दिया। यह गुप्त संगठन नीतियों को प्रभावित करता है, ताकि अपने हितों की रक्षा की जा सके। यहां तक कि किसके साथ कौन सी आर्म्स डील करने है। रूस, चीन या भारत में से किस पर प्रतिबंध लगाना है... यह सब डीप स्टेट तय करता है। युद्ध और सैन्य दखल तक डीप स्टेट की मौजूदगी होती है।

 

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कैसे काम करता है यह गुप्त संगठन?

डीप स्टेट न केवल अमेरिका, बल्कि दुनिया के अन्य देशों में नीतियों को प्रभावित करता है। अपने लिहाज से नीतियों की गति को धीमा या तेज कर सकती है। अगर किसी देश की सरकार उनके लिहाज से काम नहीं करती है तो उसके खिलाफ मीडिया में नैरेटिव सेट किया जाता है। सरकारों के खिलाफ रिपोर्ट्स, अज्ञात सोर्स और लीक दस्तावेजों से माहौल बनाया जाता है।

 

अमेरिकी डीप स्टेट अन्य देशों के चुनाव में भी दखल देता है। इसके कई तरीके हैं। कई बार विपक्ष को फंडिंग की जाती है। सरकार के खिलाफ पैसा देकर माहौल बनाया जाता है। किसी कंपनी की छवि फर्जी रिपोर्टों के आधार पर बिगाड़ी जाती है। डीप स्टेट की पकड़ इतनी मजबूत बताई जाती है कि वह लॉबीइंग और फंडिंग से अपने हित में काम करवाने की ताकत रखता है।

डीप स्टेट युद्ध मशीन... ट्रंप उसके कब्जे में: दिग्गज अर्थशास्त्री

हाल ही में रिपब्लिक टीवी से बातचीत में दिग्गज अमेरिकी अर्थशास्त्री जेफरी सैक्स ने अमेरिका में डीप स्टेट की मौजूदगी की बात स्वीकार की। उन्होंने कहा कि यह एक युद्ध मशीन और हर जगह मौजूद है। जेफरी सैक्स के मुताबिक 'हमारे पास एक गुप्त सुरक्षा तंत्र है। यह कोई कल्पना नहीं है। 17 जनवरी 1961 को राष्ट्रपति आइजनहावर ने अपने विदाई भाषण में इस मिलिट्री इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स के बारे में आगाह भी किया था और यह नियंत्रण से बाहर है।

 

जेफरी सैक्स का दावा है कि डीप स्टेट हर राष्ट्रपति से अलग काम करता है। यह लोगों के इच्छा की जगह दान देने वाले और सिलिकॉन वैली के प्रभाव में काम करता है। जब उनसे पूछा गया कि डीप स्टेट पर ट्रंप ने कब्जा कर लिया है या डीप स्टेट के कब्जे में ट्रंप है। जवाब में सैक्स ने कहा कि दूसरा वाला ही है। मतलब साफ है कि ट्रंप डीप स्टेट के कब्जे में है। 

 

दिग्गज अर्थशास्त्री ने कहा कि राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने इस पर लगाम लगाने की कोशिश की। मगर उन्हें इसी कारण मार दिया गया। उनका कहना है कि डीप स्टेट एक ट्रिलियन डॉलर सालाना की युद्ध मशीन है। उन्होंने कहा कि जब कोई राष्ट्रपति अलर्ट होता है तब यह डीप स्टेट सही से काम करता है। सैक्स का दावा है कि दुनियाभर को दी जा रहीं अमेरिकी धमकियों के पीछे डीप स्टेट है।


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