अमेरिका-इजरायल दोनों संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर रहे हैं। इस जंग में गल्फ देश भी ईरान के खिलाफ हैं। इस बड़े घटनाक्रम की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट में हालात गंभीर बने हुए हैं। इन सबके बीच ईरान अपनी संप्रभुता और पहचान को बचाने के लिए आधा दर्जन देशों से लड़ रहा है। अयातुल्लाह खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने सउदी अरब, कतर, ओमान आदि देशों में अमेरिकी एयर बेस पर मिसाइलें दागी हैं। ऐसे में आरोप लग रहे हैं कि ईरान, चीन में निर्मित मिसाइलों का अमेरिका खिलाफ कर रहा है।

 

मीडिया रिपोर्ट्स में आमने आया है कि ईरान ने अपनी मिसाइलों से कई अमेरिकी लड़ाकू विमानों और नेवी के जहाज को मार गिराया है। इसी को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि ईरान के पास इतनी एडवांस्ड मिसाइलें कहां से आईं? इसमें चीन का नाम आने के बाद ड्रैगन ने अटकलों पर स्थिती साफ कर दी है।

 

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चीन के विदेश मंत्रालय का बयान 

इन अटकलों पर चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है कि ईरान पर अमेरिका-इजरायल के संयुक्त एयरस्ट्राइक शुरू होने से पहले तेहरान के साथ CM-302 सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें बेचने की डील फाइनल की थी। चीन का कहना है कि  यह मिसाइलें अभी तक ईरान को नहीं मिली हैं। मगर, यह मिसाइलें ईरान को समय में मिल जाती तों तेहरान के पास सबसे एडवांस्ड मिसाइलों में से एक होती।

सारी बातें दुष्प्रचार कैंपेन का हिस्सा

चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने कहा कि ऐसी डील की सारी बातें एक दुष्प्रचार कैंपेन का हिस्सा हैं। उन्होंने यह भी कहा, 'एक जिम्मेदार बड़े देश के तौर पर चीन हमेशा अपनी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों को मानता है। चीन गलत इरादे वाले संगठनों और दुष्प्रचार फैलाने का विरोध करता है और उम्मीद करता है कि संबंधित पक्ष टेंशन वाली स्थिति को कम करने के लिए सही कदम उठाएंगे।'

 

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'ऐसा होता तो बात कुछ और होती'

अमेरिका ने ईरान के खिलाफ मौजूदा सैन्य कार्रवाई को आगे बढ़ाने के लिए ईरान की सीमा के पास समुद्र में एयरक्राफ्ट कैरियर समेत नेवल ग्रुप्स का एक बेड़ा उतार दिया है। हालांकि, अगर इस समय ईरान के पास यह चीनी मिसाइलें होती तो यह अमेरिका के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती थीं।

 

बता दें कि चीन के साथ ईरान के हमेशा से करीबी रिश्ते रहे हैं। ईरान ईरान चीन को तेल सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देशों में से एक है। ऐसे में देखना होगा कि क्या सुपरपावर चीन अयातुल्ला खामेनेई की हत्या की बुराई करने तक सीमित रहता है या आगे बढ़कर ईरान की मदद करता है?