अमेरिका, ईरान के साथ युद्ध में है लेकिन अपने ही घर में अमेरिकी राष्ट्रपति के इस फैसले की जमकर आलोचना हो रही है। कई लोगों की राय है कि अमेरिका एक ऐसे युद्ध में फंस गया है जिसकी उन्हें जरूरत नहीं थी। अब राष्ट्रपति ट्रंप के प्रशासन में अहम भूमिका निभाने वाले जोसेफ केंट ने उनका साथ छोड़ दिया है। जोसेफ केंट ने अमेरिका के नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर (एनसीटीसी) के प्रमुख के पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में दावा किया कि ईरान युद्ध के फैसले को गलत बताते हुए ट्रंप को अपने फैसले पर फिर से सोचने के लिए कहा है।
जोसेफ केंट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट कर अपना इस्तीफा शेयर किया। इसमें उन्होंने बताया है कि ईरान से अमेरिका को तत्काल कोई खतरा नहीं था। उन्होंने जोर देकर कहा,'हमने (अमेरिका ने) यह युद्ध इजरायल और अमेरिका में इजरायल की शक्तिशाली लॉबी के दबाव में आकर शुरू किया है।' जोसेफ कैंट का इस्तीफा और ईरान युद्ध से दूरी बना लेना अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप के लिए एक बड़ा झटका है।
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इस्तीफे पर क्या बोले ट्रंप?
जोसेफ केंट ने अपने इस्तीफे में ईरान युद्ध के फैसले को गलत बताया। उन्होंने बताया कि अमेरिका ने यह फैसला इजरायल के दबाव में आकर लिया है। उन्होंने अपने इस्तीफे में कई अहम बातों पर जोर दिया है। जोसेफ केंट पहला ऐसा बड़ा नाम है जिन्होंने ईरान युद्ध के कारण ट्रंप प्रशासन से इस्तीफा देने का फैसला किया है। उनके इस्तीफे पर ट्रंप ने कहा कि यह अच्छा हुआ कि वह चले गए हैं क्योंकि उन्होंने कहा था कि ईरान कोई खतरा नहीं था। ट्रंप ने जोसेफ केंट को एक अच्छा व्यक्ति बताया जो सुरक्षा पर कमजरो पड़ गया।
ईरान युद्ध का विरोध क्यों?
जोसेफ केंट ने ईरान युद्ध के विरोध में अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसके पीछे उन्होंने कई कारण बताए हैं कि वह अमेरिका-ईरान युद्ध के खिलाफ क्यों हैं।
- ईरान से अमेरिका को तत्काल कोई खतरना नहीं था।
- ईरान से जंग के लिए इजरायल और अमेरिका में इजरायल लॉबी ने ट्रंप पर दबाव बनाया।
- युद्ध से अमेरिका को कुछ भी लाभ नहीं होने वाला है तो ऐसे युद्ध में अमेरिकी सैनिकों को क्यों भेजना।
- मीडिया के प्रभावशाली चेहरों और इजरायली अधिकारियों पर गलत जानकारी फैलाकर युद्ध के लिए उत्साहित करने का दावा।
ट्रंप के लिए झटका क्यों?
जोसेफ सेंट को दक्षिण पंथी यानी राइट विंग का माना जाता है। नेशनल काउंटरटेररिज्म सेंटर के डायरेक्टर के तौर पर ट्रंप प्रशासन में जिम्मेदारी संभालने से पहले उनकी गिनती धुर-दक्षिणपंथी हस्तियों में होती थी। उन्हें इसके लिए कई बार आलोचना का सामना भी करना पड़ा है। इसके अलावा 6 जनवरी के दंगों का बचाव करने के लिए भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा है। एक बार तो उन्होंने हिटलर की भी तारीफ कर दी थी। इसके साथ ही उन्होंने सीनेट की सुनवाई में एक ऐसी कैंपन में शामिल होने की बात स्वीकार की जिसमें कट्टर दक्षिणपंथी हस्ती निक फुएंटेस शामिल था।
पिछले साल जुलाई में जब उन्हें एनसीटीसी का प्रमुख बनाया गया था तब उनकी नियुक्ति पर डेमोक्रेट्स ने विरोध किया था। विरोध का कारण उनके दक्षिणपंथी चरमपंथियों के साथ संबंध ही थे। इस तरह एक बड़ी दक्षिणपंथी हस्ती के रूप में उन्होंने अपनी पहचान बनाई थी और युद्ध के समय में उनका ट्रंप को छोड़कर चले जाना ट्रंप के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
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क्या 2003 वाली गलती कर रहे ट्रंप?
जोसेफ केंट ने ईरान यु्द्ध की तुलना 2003 के इराक युद्ध से की। उन्होंने इजरायल पर आरोप लगाया कि इजरायल ने उस समय भी गलत जानकारी फैलाकर अणेरिका को इराक युद्ध में खींचा था और अब वही तरीका ईरान के साथ इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने ट्रंप से अपील की है कि वह ईरान युद्ध के फैसले पर दोबारा सोचें।
उन्होंने कहा, 'मैं प्रार्थना करता हूं कि आप ईरान में जो हो रहा है, उस पर विचार करेंगे और यह सोचेंगे कि हम किसके लिए यह कर रहे हैं। अब बहादुरी से फैसला लेने का समय है। आप रास्ता बदल सकते हैं और देश के लिए नया रास्ता बना सकते हैं, या हमें और अराजकता की ओर धकेल सकते हैं। फैसला आपके हाथ में है।'
