ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की अमेरिकी और इजरायल के संयुक्त हमलों में मौत हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खामेनेई की मौत का खुद एलान किया और उन्हें इतिहास के सबसे बुरे लोगों में से एक बताया। अली खामेनेई ने पहले ही कहा था कि उन्हें मरना मंजूर है लेकिन घुटने टेकना नहीं। वह सरेंडर नहीं करेंगे। मौत से पहले वह अपना उत्तराधिकारी भी चुनकर गए हैं।

ईरानी मीडिया में भी आयतुल्ला अली खामेनेई मौत की चर्चा है। ईरानी मीडिया के एंकर रोकर बुलेटिन पढ़ रहे हैं। सरकार ने उनके निधन पर 40 दिनों के शोक की घोषणा की है। आयतुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान पर शासन कर रहे थे। उनकी उम्र 86 वर्ष थी। ईरान की सत्ता व्यवस्था उन्हीं के नियंत्रण में थी। ईरान को उनकी मौत से गहरा झटका लगा है। इजरायल और अमेरिका की क्षेत्रीय मुश्किलें, उनकी मौत के बाद भी कम नहीं होने वाली हैं। 

यह भी पढ़ें: सच में तेल महंगा हो जाएगा? ईरान ने बंद कर दिया होर्मुज स्ट्रेट

ईरान ने क्या गंवाया है?

शनिवार सुबह अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों का लक्ष्य ईरान के शीर्ष नेतृत्व था। ईरानी सुरक्षा विभाग से जुड़े 7 बड़े अधिकारी अब तक मारे जा चुके हैं। सैटेलाइट तस्वीरों में तेहरान में खामेनेई के आवास से काला धुआं उठता दिखा और कई इमारतें बुरी तरह क्षतिग्रस्त नजर  आ रहीं हैं। 

ईरान में अब नेतृत्व का बदलना तय माना जा रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान में अब सत्ता व्यवस्था बदेली। उन्होंने ईरानी लोगों से सरकार के खिलाफ उठने की अपील की। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी लॉन्च किया था। ये हमले, इसी ऑपरेशन का हिस्सा हैं।


यह भी पढ़ें: जिनके सहारे जंग लड़ रहा था ईरान, उन्हीं को इजरायल ने खत्म कर दिया

आयतुल्ला अली खामेनेई और ईरान के बुरे दिन क्यों आए?

ईरान पहले से ही कमजोर था। ईरान की करेंसी लगातार गिर रही थी। पश्चिमी प्रतिबंधों से अर्थव्यवस्था तबाह थी। जून 2025 में अमेरिका-इजरायल हमलों ने स्थिति और बिगाड़ी। जनवरी 2026 में आर्थिक समस्याओं से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन राजनीतिक हो गए और पूरे 31 प्रांतों में फैल गए। सरकार ने हजारों प्रदर्शनकारियों को मार डाला। ट्रंप प्रशासन ने हस्तक्षेप की धमकी दी थी। शनिवार को अमेरिका ने हमले शुरू किए और ईरान तबाह हो गया।

कौन संभालेगा ईरान की विरासत?

ईरान के संविधान कहता है कि अगले शीर्ष नेतृत्व का चुनाव, विशेषज्ञों की एक समिति करती है, वही नया नेता चुनती है। जब तक, सुप्रीम लीडर नहीं चुने जाते, तब तक राष्ट्रपति, चीफ जस्टिस और गार्जियन काउंसिल के एक जज की तीन सदस्यीय अंतरिम परिषद जिम्मेदारी संभालेगी। 

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक कोई स्पष्ट उत्तराधिकारी नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दावा किया था कि अब कोई नेता नहीं होगा। उन्होंने कहा था कि कोई नहीं जानता कि खामेनेई के बाद क्या होगा। अब इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का शासन आ सकता है।  IRGC के चीफ मोहम्मद पाकपुर की भी इजरायली हमले में मौत हो गई है।  

यह भी पढ़ें: क्या अली खामेनेई को इजरायल ने मार दिया? ईरानी विदेश मंत्री ने सबकुछ बता दिया

कहीं जश्न, कहीं हो रहे विरोध प्रदर्शन 

ईरान के कुछ शहरों में उनके खिलाफ प्रदर्शन करने वाले क्रांतिकारियों ने जश्न मनाया है। अली खामेनेई के खिलाफ ही हिंसक प्रदर्शन हुए थे, जिसमें हजारों लोगों के मारे जाने का दावा किया गया था। वहीं कुछ लोग 'डेथ टू इस्लामिक रिपब्लिक' और 'लॉन्ग लिव द शाह' के नारे भी लगाए। 

ईरान अली खामेनेई को कैसे याद करेगा?

अली खामेनेई को उदारपंथी ईरानी पसंद नहीं करते थे। वह इस्लामिक शासन चाहते थे, जिसके खिलाफ नई पीढ़ी ने अपनी आवाज बंद की थी। एक जमाने में ईरान अपनी उदार छवि के लिए जाना जाता था। इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान में कट्टरपंथी ताकतें हावी हो गईं थीं।

जनवरी के विरोध में भी 'डेथ टू खामेनेई' के नारे गूंजे थे। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। सरकार ने इन प्रदर्शनों को सरकार ने बेरहमी से कुचला था। अब हमलों के खिलाफ भी कुछ विरोध हुए लेकिन मौत की खबर का जश्न भी मनाया गया। 

यह भी पढ़ें: ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामेनेई की मौत, इजरायल-ट्रंप का दावा

अली खामेनेई। Photo Credit: PTI

अली खामेनेई के न रहने पर क्या होगा?

अली खामेनेई की मौत मध्य पूर्व में बड़े बदलाव ला सकती है। साल 2023 के हमास हमले के बाद से ही ईरान, इजरायल के निशाने पर था। इजरायल ने ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठन को निशाना बनाया था। यह 1953 के बाद अमेरिकी हस्तक्षेप के बाद ईरान के नेता को हटाने का दूसरा बड़ा मामला है।

ईरान की 9 करोड़ से ज्यादा आबादी एक बार फिर अस्थिरता के मुहाने पर खड़ी है। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ सकता है। तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। मध्य पूर्व का समीकरण बिगड़ सकता है। 

अली खामेनेई, ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को संभाल रहे थे। वह वैश्विक प्रतिबंधों को लेकर उदार थे, लेकिन अब ईरान का अगला नेतृत्व परमाणु कार्यक्रमों को तेज कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया के लिए नया संकट पैदा हो सकता है। उनके न रहने से IRGC को निरंकुश अधिकार मिल सकते हैं, जिसकी वजह से पड़ोसी देशों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।

खामेनेई की मौत के बाद भी खत्म नहीं अमेरिका-इजरायल का डर

ईरान की सत्ता व्यवस्था विलायत-ए-फकीह संभालती है। सत्ता व्यवस्था संभालने में IRGC मदद करती है। ईरान की यह सेना, कई देशों के लिए संकट पैदा कर सकती है। खामेनेई का जो भी उत्तराधिकारी होगा, वह भी कट्टरपंथी ही होगा। अब ईरान परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइलों और प्रॉक्सी ग्रुप को और मजबूत कर सकता है।

हिजबुल्लाह और हूती विद्रोही, गुरिल्ला हमलों से इजरायल और ईरान की नाक में दशकों से दम किए हुए हैं। अब नए हमलों ने यह तनाव और बढ़ा दिया है। अब ईरान ने बदला लेने का एलान किया है। एक तरफ अमेरिका वहां उतार सत्ता व्यवस्था चाहता है, परमाणु कार्यक्रमों को खत्म करना चाहता है, लेकिन अब परमाणु कार्यक्रमों के और तेज होने के आसार जताए जा रहे हैं।