भारतीय मूल के जोहरान ममदानी ने न्यूयॉर्क के मेयर का चुनाव जीतकर इतिहास तो रचा ही था। अब वह मेयर पद की शपथ लेकर भी इतिहास रचने वाले हैं। जोहरान ममदानी 1 जनवरी की रात को मेयर पद की शपथ लेंगे। वह कुरान पर हाथ रखकर पद की शपथ लेने वाले हैं। यह पहली बार होगा जब कोई मेयर की शपथ लेने के लिए कुरान का इस्तेमाल करेगा। अब तक जितने भी मेयर बने हैं, उन सभी ने बाइबल पर हाथ रखकर शपथ ली थी।
जोहरान ममदानी जब 1 जनवरी की आधी रात को न्यूयॉर्क के सिटी हॉल के नीचे बंद पड़े सबवे स्टेशन में मेयर पद की शपथ लेंगे तो वह इस पद पर पहुंचने वाले पहले मुस्लिम और पहले दक्षिण एशियाई मूल के व्यक्ति बन जाएंगे।
ममदानी ने पिछले साल नवंबर में हुए मेयर चुनाव को 50% से ज्यादा वोट हासिल कर जीत लिया था। न्यूयॉर्क के मेयर बनने वाले ममदानी न सिर्फ पहले भारतवंशी हैं, बल्कि पहले दक्षिण एशियाई और पहले मुस्लिम भी हैं। इतना ही नहीं, ममदानी इस सदी के सबसे युवा मेयर भी हैं। वह अभी सिर्फ 34 साल के हैं।
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दो बार शपथ लेंगे ममदानी
जोहरानी ममदानी दो बार शपथ लेंगे। पहली बार अंडरग्राउंड स्टेशन में और फिर पब्लिक प्रोग्राम में। आधी रात को उनकी पहली शपथ सिटी हॉल के नीचे बंद पड़े सबवे स्टेशन में होगी। यहां न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लिशिया जेम्स उन्हें शपथ दिलवाएंगी।
पुराने सिटी हॉल स्टॉप को शहर की पहली सबवे लाइन के फ्लैगशिप स्टेशन के तौर पर डिज़ाइन किया गया था, लेकिन 1945 में इसे बंद कर दिया गया।
ममदानी के ऑफिस ने बताया है कि यहां शपथ लेने का फैसला जोहरान ममदानी का ही था। ममदानी ने कहा कि यह स्टेशन एक ऐसे दौर को दिखाता है जब न्यूयॉर्क ने लोगों की जिंदगी बेहतर बनाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश किया था।
इसके बाद दोपहर को ममदानी दोबारा शपथ लेंगे। इस बार अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स उन्हें शपथ दिलवाएंगे। दोनों ही बार ममदानी कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेंगे।
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तीन कुरानों पर हाथ रखकर लेंगे शपथ
जोहरान ममदानी तीन अलग-अलग कुरानों पर हाथ रखकर शपथ लेंगे। आधी रात को होने वाले समारोह में ममदानी अपने दादा की कुरान और एक बहुत पुरानी पॉकेट साइज की कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेंगे।
पॉकेट साइज की यह कुरान सदियों पुरानी है। इसे 18वीं या 19वीं सदी की शुरुआत की है। यह न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के शॉम्बर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर के संग्रह का हिस्सा है।
इसके बाद जब ममदानी दोपहर में शपथ लेंगे तो उसमें दादा और दादी, दोनों की कुरान होगी। साथ ही यह पॉकेट साइज की कुरान भी होगी।
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कुरान पर शपथ लेने पर आलोचना
जोहरान ममदानी को अक्सर उनके मजहब के कारण कंजर्वेटिव नेता निशाना साधते रहे हैं। जब ममदानी ने कुरान पर हाथ रखकर शपथ लेने का फैसला लिया है तो कुछ कंजर्वेटिव नेताओं को यह पसंद नहीं आया।
अलबामा के अमेरिकी सीनेटर टॉमी ट्यूबरविल ने मामदानी के शपथ ग्रहण के बारे में एक समाचार लेख के जवाब में सोशल मीडिया पर लिखा, 'दुश्मन दरवाजों के अंदर है।'
वहीं, चुनाव से पहले ममदानी ने भावुक होते हुए कहा था कि वह कभी खुद को नहीं बदलेंगे। उन्होंने कहा था, 'मैं खुद को नहीं बदलूंगा। मैं कौन हूं, मैं कैसे खाता हूं या मेरा मजहब क्या है? मैं नहीं बदलूंगा।'
