नेपाल की नई नवेली बालेन शाह सरकार मुश्किलों में घिरती जा रही है। भारतीय सामानों पर 80 फीसद तक कस्टम ड्यूटी लगाने का भारी विरोध होने लगा है। कई स्थानों पर जनता सड़कों पर उतर आई है। नेपाली कांग्रेस ने सरकार के इस कदम को जन विरोधी और असंवेदनशील बताया। उधर, राष्ट्रीय एकता दल के अध्यक्ष बिनय यादव ने भी इस कदम को 'अघोषित नाकाबंदी' बताया। उन्होंने घरेलू सामानों से सीमा शुल्क को तुरंत हटाने की मांग की। 

 

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में जोगबानी, रक्सौल और छोटे हाटों में कारोबार कम हो गया है। अभी शादी का मौसम है। नेपाल से अक्सर लोग खरीदारी करने बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों के बाजारों में आते हैं। फैसले का असर करीब 50 ग्रामीण छोटे बाजारों पर पड़ा है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि उत्तराखंड के धारचूला और तनकपुर में भी अब लोग महीने की जगह किस्तों पर राशन ले रहे हैं। नेपाल से लगने वाले यूपी के कई बाजारों में नेपाली लोगों का आना जाना कम हो गया है।

नेपाल की जनता परेशान क्यों? 

नेपाल और भारत की करीब 1750 किमी लंबी सीमा लगती है। महंगाई के कारण बड़ी संख्या में नेपाली लोग भारतीय बाजारों में अपनी रोजमर्रा की खरीदारी करते हैं। मगर सरकार की सख्ती के बाद नेपाली नागरिकों ने भारत से खरीदारी कम कर दी है। नतीजा यह है कि नेपाल में लोगों को महंगी दरों पर सामान खरीदना पड़ रहा है। खासकर सीमावर्ती जिलों के गरीब परिवार सबसे अधिक प्रभावित है। यही कारण है कि अब नेपाल के अंदर अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। 

 

यह भी पढ़ें: 'पत्नी-बच्चों का खर्च नहीं उठा सकते तो शादी मत करो', इलाहाबाद हाई कोर्ट

 

भारत आने वाले हर नागरिक की सीमा पर जांच हो रही है। 100 रुपये से अधिक का सामान मिलने पर सीमा शुल्क मांगा जा रहा है। कई जगह सुरक्षाकर्मी लोगों से बदतमीजी भी करते दिखे हैं। इससे नाराजगी और बढ़ गई है। 

क्या बालेन सरकार ने लगाया नया नियम?

अगर कोई व्यक्ति 100 नेपाली रुपये (63 भारतीय रुपये) से अधिक का भारतीय सामान अपने साथ लाता है तो 5% से 80% तक सीमा शुल्क चुकाना होगा। हालांकि यह कोई नया नियम नहीं है। बस इतना है कि बालेन शाह सरकार ने इसे सख्ती से लागू करना शुरू कर दिया है। नेपाल की सीमा चौकियों पर सुरक्षाकर्मी लाउडस्पीकर से घोषणा कर रहे हैं कि नागरिकों, सरकारी कर्मचारियों व गैर सरकारी संगठनों के कार्यकर्ताओं को कोई छूट नहीं है। 100 रुपये से ज्यादा मूल्य के भारतीय सामान पर सीमा शुल्क देना होगा।

नेपाल सरकार का क्या तर्क?

नेपाल सरकार का तर्क है कि अभी भारत से सामान का अवैध आयात होता है। भारी मात्रा में राजस्व का नुकसान भी हो रहा है। वहीं सस्ते में भारतीय सामान आने की वजह से स्थानीय व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है। यही कारण है कि नेपाल सरकार को सख्ती से नियमों को लागू करना पड़ा है। 

 

यह भी पढ़ें: 'BJP को नेता नहीं पुलिस चला रही', बेटे ने लोगों को रौंदा तो बरस पड़े BJP विधायक

बालेन की पार्टी भी विरोध में 

बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी ने भी सरकार के खिलाफ आवाज उठाई है। उसका कहना है कि 100 रुपये तक के सामान पर सीमा शुल्क लगाना अव्यावहारिक है। सरकार को इस पर पुनर्विचार करना चाहिए। पार्टी का तर्क है कि फैसले का कम आय वाले परिवारों पर बुरा असर पड़ेगा।