ब्रिटेन में 2021 से 2025 के बीच जन्मे बच्चों के आंकड़ों से यह पता चलता है इस दौरान कितने लड़के और कितनी लड़कियां जन्मीं? हालांकि, इन आंकड़ों ने एक चिंताजनक बात सामने ला दी है और वह चिंताजनक बात यह है कि भारत से ब्रिटेन गए काफी लोगों में अभी भी गर्भपात जैसी प्रथा देखने को मिल रही है। इससे जाहिर होता है कि माइग्रेट करके गए हुए भारतीयों में अभी भी वही कुप्रथा देखने को मिल रही है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय समुदाय में लड़कों के प्रति स्पष्ट झुकाव दिखता है। रिपोर्ट बताती है कि 2021 से 2025 के बीच हर 100 लड़कियों के मुकाबले लगभग 118 लड़कों का जन्म हुआ, जो कि लड़कियों और लड़कों के बीच एक असंतुलन को दिखाता है। यह आंकड़े ब्रिटेन के अखबार द डेली मेल द्वारा प्रकाशित किए गए हैं।
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गर्भपात में बढ़ोतरी
ब्रिटेन में किए गए इस शोध के अनुसार, भारतीय समुदाय में हर साल 100 लड़कियों के मुकाबले 105 लड़कों का जन्म हो रहा है। इससे साफ़ होता है कि लड़कियों का जन्म लड़कों की तुलना में कम हो रहा है। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि गर्भावस्था के दौरान जाँच के जरिए बच्चे के लिंग का पता लगाया जाता है। यदि गर्भ में लड़की होने की जानकारी मिलती है, तो कई मामलों में गर्भपात करा लिया जाता है। इसी कारण लड़कों की संख्या अधिक हो रही है।
रिपोर्ट में बच्चों के जन्म अनुपात से जुड़ी एक चौंकाने वाली सच्चाई भी सामने आई है। इसमें बताया गया है कि जिन भारतीय माता-पिता के पहले से दो बेटियाँ हैं, वे तीसरी बेटी का गर्भपात करा रहे हैं। ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग द्वारा 2017 से 2021 के बीच किए गए एक विश्लेषण में पाया गया कि तीसरे बच्चे के रूप में भारतीय समुदाय में हर 100 लड़कियों के मुकाबले 113 लड़कों का जन्म हुआ। इससे स्पष्ट होता है कि तीसरे बच्चे के रूप में भी प्राथमिकता केवल लड़के को दी जा रही है।
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वजह क्या है?
एक्सपर्ट्स का कहना है कि महिलाओं पर गर्भपात के लिए दबाव डाला जाता है। अक्सर गर्भवती महिलाओं को उनके परिवार की ओर से मजबूर किया जाता है। आज के दौर में भी भारतीय समाज में लड़की की तुलना में लड़के को अधिक महत्व दिया जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि लड़का ही वंश को आगे बढ़ाएगा।
इस विषय पर सामाजिक कार्यकर्ता रानी बिल्कू ने महत्वपूर्ण तर्क रखे हैं। रानी बिल्कू महिलाओं पर हो रही घरेलू हिंसा के खिलाफ काम करती हैं। उन्होंने बताया कि कुछ महिलाओं को यह विश्वास दिलाया जाता है कि 'लड़कों को जन्म देने पर उनकी सोशल वैल्यू बढ़ती है।'
रानी बिल्कू के अनुसार, भारतीय समुदाय में लड़कों को 'राजकुमार' की तरह देखने की सोच मौजूद है। उन्होंने यह भी कहा कि लिंग के आधार पर गर्भपात लैंगिक असमानता का गंभीर मुद्दा है, जो दर्शाता है कि आज भी लड़कियों को लड़कों से कमतर समझा जाता है।
ब्रिटेन में गर्भपात अवैध
ब्रिटेन के स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार, इंग्लैंड, वेल्स और स्कॉटलैंड में लिंग के आधार पर गर्भपात कराना अवैध है। नियमों के तहत गर्भपात केवल तभी कराया जा सकता है, जब डॉक्टर यह सलाह दे कि बच्चे के जन्म से मां या बच्चे को गंभीर खतरा हो। गर्भपात की अनुमति तभी दी जाती है जब गर्भावस्था 24 सप्ताह से अधिक न हो और बच्चे को गंभीर शारीरिक या मानसिक समस्या होने की आशंका हो।
