तुर्की की संसद में बुधवार को दोनों पक्षों के बीच में मारपीट हो गई। यह घटना तब हुई जब रूलिंग पार्टी और अपोज़िशन के सांसदों के बीच नए जस्टिस मिनिस्टर के विवादित अपॉइंटमेंट को लेकर बहस हो रही थी। इससे संसद की कार्यवाही पूरी तरह से ठप हो गई और सदन को कुछ समय के लिए सस्पेंड करना पड़ा।
यह हाथापाई तब शुरू हुई जब अपोज़िशन के सांसदों ने कैबिनेट में फेरबदल के बाद प्रेसिडेंट रेसेप तैयप एर्दोगन द्वारा नए अपॉइंट किए गए जस्टिस मिनिस्टर अकिन गुरलेक को शपथ लेने से रोकने की कोशिश की। पावरफुल जस्टिस मिनिस्ट्री में गुरलेक के नॉमिनेशन की अपोज़िशन पार्टियों ने कड़ी आलोचना की है और उन पर पोलिटिकल भेदभाव का आरोप लगा रही हैं।
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शपथ ग्रहण के वक्त शुरू हुई मारपीट
यह टकराव तब शुरू हुआ जब विपक्ष के सांसद गुरलेक को शपथ ग्रहण समारोह में आगे बढ़ने से रोकने के लिए पोडियम के पास जमा हो गए। सत्ताधारी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (AK पार्टी) के सदस् उन्हें बचाने के लिए आगे बढ़े, जिससे सदन में अफरा-तफरी मच गई।
आखिरकार, संसद के स्पीकर ने व्यवस्था ठीक करने की कोशिश में 15 मिनट के लिए बैठक रोक दी। ब्रेक के बाद, गुरलेक ने शपथ ली लेकिन इस दौरान वह सत्ताधारी पार्टी के सांसदों से घिरे हुए थे।
गुरलेक पहले इस्तांबुल के चीफ पब्लिक प्रॉसिक्यूटर थे, जहां उन्होंने मुख्य विपक्षी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (CHP) के सदस्यों से जुड़े कई हाई-प्रोफाइल केस लड़े थे।
विपक्ष कर रहा था आलोचना
विपक्षी नेताओं ने लंबे समय से उन पर सरकार की आलोचना करने वालों को कमजोर करने के मकसद से राजनीति से प्रेरित केस चलाने का आरोप लगाया है। उनका तर्क है कि जस्टिस मिनिस्टर के तौर पर उनका प्रमोशन देश में न्यायिक स्वतंत्रता को और कमजोर करेगी।
CHP और दूसरे विपक्षी ग्रुप्स का कहना है कि उनका रिकॉर्ड तुर्की में कानून के राज और डेमोक्रेटिक अकाउंटेबिलिटी के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।
यह झगड़ा एर्दोगन के कैबिनेट में फेरबदल के एलान के बीच हुआ, जिसमें एर्ज़ुरम प्रांत के गवर्नर मुस्तफा सिफ्टसी को इंटीरियर मिनिस्टर बनाना भी शामिल था।
विपक्ष को किया जा रहा टारगेट
यह फेरबदल एक बड़े एंटी-करप्शन कैंपेन के तहत हो रहा है, जिसमें विपक्षी पार्टियों की चलाई जा रही म्युनिसिपैलिटी को टारगेट किया गया है। हाल के सालों में CHP से जुड़े सैकड़ों लोकल अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।
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जांच में फंसे सबसे जाने-माने लोगों में इस्तांबुल के मेयर एक्रेम इमामोग्लू भी हैं, जिन्हें आम तौर पर एर्दोगन का मुख्य पॉलिटिकल दुश्मन माना जाता है। इमामोग्लू को पिछले साल करप्शन और ऑर्गेनाइज्ड क्राइम के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।
