ईरान और अमेरिका दोनों युद्ध की तैयारी में जुटे हैं। ईरान पर हमला कब होगा? यह सिर्फ डोनाल्ड ट्रंप को ही पता है। मगर आशंका जताई जा रही है कि इसी हफ्ते अमेरिका तेहरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। ईरान पर हमला करना है या नहीं, अमेरिका में इन दिनों इस बात पर चर्चा नहीं हो रही है। सभी को पता है कि हमला होना तय है। सारी रणनीति इस बात की बन रही है कि हमला कैसे करना है? आइये जानते हैं इन विकल्पों के बारे में, जिन पर अमेरिका में इन दिनों मंथन चल रहा है।

 

सत्ता परिवर्तन की रणनीति: इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप ईरान में सत्ता उखाड़ फेंकने वाले हालात पैदा करना चाहते हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप प्रदर्शनकारियों को कुचलने वाले सेना के अधिकारियों को निशाना बना सकते हैं। इसके अलावा अमेरिका सरकारी इमारतों और सेना के ठिकानों पर हमला कर सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के हमले सीमित होंगे। हालांकि इजरायल इसके पक्ष में नहीं है। इजरायल का मानना है कि सीमित हमले से ईरान की सरकार नहीं ढहेगी। 

 

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घेरेबंदी: अमेरिका ने छह युद्धपोत समेत बड़ा नौसैनिक बेड़ा मध्य पूर्व में तैनात किया है। इलाके में मौजूद 19 एयरबेस पर भी हथियारों की खेप पहुंचा जा रही है। ब्रिटेन भी कतर में अपने फाइटर प्लेन तैनात कर चुका है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप लंबे समय तक ईरान की नौसैनिक घेरेबंदी कर सकते हैं, ताकि ईरान को आर्थिक नुकसान पहुंचाया जा सके।

 

यूएसएस अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप की मदद से अमेरिका ईरान के तेल टैंकरों को जब्त कर सकता है। हालांकि इसके जवाब में ईरान भी होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की लगभग 20% तेल आपूर्ति प्रभावित होगी। अमेरिका के प्लान में ईरान की हवाई नाकेबंदी भी शामिल है। इससे अमेरिका ईरानी एयरबेस को प्रतिबंधित करने के अलावा सिविलियन उड़ानों को भी रोक सकता है।

 

सीमित हमले की रणनीति: ईरान के मिसाइल, परमाणु और सैन्य ठिकानों पर सटीक हमले की रणनीति भी बनी है। अमेरिका अपनी अगली कार्रवाई में ईरान की ड्रोन निर्माण यूनिट, मिसाइल प्लांट, ईरानी वायुसेना और रॉकेट लॉन्चरों को निशाना बना सकता है। उधर, इजरायल का कहना है कि अगर अमेरिका ने सीमित हमला किया तो यह ईरान को इजरायल पर बड़े हमले के प्रति उकसाएगा। इसके बाद तेल अवीव जोरदार तरीके से ईरानी हमले का जवाब देगा।

 

बड़े नेताओं पर हमला: अमेरिका में एक इस विकल्प पर भी विचार चल रहा है कि ईरान के प्रमुख नेताओं को निशाना बनाया जा सकता है। इसमें ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का भी नाम शामिल है। अमेरिका की रणनीति यह भी है कि ईरान पर एक साथ बड़ा हमला न करके कई चरणों में उसे निशाने बनाने की है। ट्रंप चाहते हैं कि ईरान में सत्ता का परिवर्तन ठीक वैसे ही हो, जैसे वेनेजुएला में किया गया।

 

गुप्त अभियान: आशंका यह भी है कि अमेरिका खुलकर ईरान से लड़ाई न करे, लेकिन उसके खिलाफ बड़े पैमाने पर गुप्त अभियान और टारगेट किलिंग को अंजाम दे। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप ईरान पर जमीन से हमला नहीं करेंगे, लेकिन उन्हें कमाडो अभियान खूब पसंद हैं। माना जा रहा है कि ट्रंप कंमाडो ऑपरेशन को भी हरी झंडी दे सकते हैं। 2020 में ट्रंप के ही आदेश पर बगदाद के पास कुद्स फोर्स के मुखिया जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिका ने हत्या की थी।

 

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अमेरिका ने कहां-कहां की तैनाती?

अमेरिका ने मध्य पूर्व में कुल छह युद्धपोतों की तैनात की है। यह युद्धपोत टॉमहॉक क्रूज मिसाइलों से लैस हैं। ईरान के अंदर लंबी दूरी तक मार करने में सक्षम है। ईरान के हमले से बचने की खातिर अमेरिका ने एक दर्जन अतिरिक्त एफ-15E हमलावर विमानों को तैनात किया है। मध्य-पूर्व में पैट्रियट और थाड एयर डिफेंस सिस्टम को एक्टिव किया गया है।

 

  • जॉर्डन के मुवाफ्फाक साल्टी एयर बेस पर लड़ाकू विमानों की तैनाती।
  • बहरीन में विध्वंसक और युद्धपोत खलीफा बिन सलमान बंदरगाह लंगर डाले खड़े।
  • कतर केअल-उदैद एयर बेस पर नए एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव।
  • ओमान के पास हिंद महासागर में यूएसएस अब्राहम लिंकन युद्धपोत तैनात।